गोवर्धन पूजा
10 नवंबर 2026 · भगवान कृष्ण
2026 की तिथियाँ मानक पंचांग संदर्भों से ली गई सद्भावपूर्ण अनुमान हैं — नियोजन से पहले सटीक तिथि और मुहूर्त किसी वर्तमान पंचांग से मिलाकर पुष्टि करें।
महत्व
दिवाली के अगले दिन (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) को भक्त गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं, जो भगवान कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। कृष्ण ने इंद्र के क्रोध से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए इस पर्वत को उठाया था। मंदिरों में 'अन्नकूट' (भोजन का पर्वत) का भोग लगाया जाता है।
ज्योतिषीय महत्व
गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि को मनाई जाती है, जो दिवाली की अमावस्या के ठीक अगले दिन होती है, जब शुक्ल पक्ष का प्रारंभ होता है। कुछ क्षेत्रों में इस दिन को अन्नकूट और गुजराती नव वर्ष (बेस्तु वरस) के रूप में भी मनाया जाता है। चंद्र कैलेंडर पर आधारित होने के कारण, इसकी ग्रेगोरियन तिथि अक्टूबर और नवंबर के बीच बदलती रहती है। वर्ष 2026 में यह मंगलवार, 10 नवंबर को है (कुछ क्षेत्रीय कैलेंडरों में प्रतिपदा तिथि की गणना के आधार पर यह 9 नवंबर हो सकती है) — कृपया सटीक मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
मास: कार्तिक · पक्ष: शुक्ल · कार्तिक मास की शुक्ल प्रतिपदा (चंद्रमा के बढ़ते चरण का पहला दिन) — दिवाली (अमावस्या) के ठीक अगले दिन।
गोवर्धन पूजा कैसे मनाया जाता है
- गोबर या खाद्य पदार्थों से गोवर्धन पर्वत की छोटी प्रतिकृति बनाना और उसकी पूजा करना
- मंदिरों में विभिन्न प्रकार के शाकाहारी व्यंजनों का 'अन्नकूट' भोग लगाना
- भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण करना
- ग्रामीण परंपराओं में गौ-वंश का सम्मान और पूजन करना
- कुछ समुदायों में गुजराती नव वर्ष (बेस्तु वरस) मनाना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में गोवर्धन पूजा कब है?+
वर्ष 2026 में यह 10 नवंबर को है। चंद्र कैलेंडर के अनुसार इसकी तिथि हर साल बदलती है, इसलिए वर्तमान पंचांग से इसकी पुष्टि अवश्य करें।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?+
यह पर्व भगवान कृष्ण द्वारा भारी वर्षा से अपने समुदाय की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन भक्त पर्वत की पूजा करते हैं और अन्नकूट का भोग लगाते हैं।
अन्नकूट क्या है?+
अन्नकूट का अर्थ है "भोजन का पर्वत"। इस दिन मंदिरों में भगवान के समक्ष कई प्रकार के शाकाहारी व्यंजनों का विशाल भोग लगाया जाता है।
इस दिन का कैलेंडर के अनुसार क्या महत्व है?+
यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है, जो दिवाली की अमावस्या के ठीक बाद शुक्ल पक्ष का पहला दिन होता है। कुछ क्षेत्रों में यह गुजराती नव वर्ष का भी प्रतीक है।