होली
4 मार्च 2026
2026 की तिथियाँ मानक पंचांग संदर्भों से ली गई सद्भावपूर्ण अनुमान हैं — नियोजन से पहले सटीक तिथि और मुहूर्त किसी वर्तमान पंचांग से मिलाकर पुष्टि करें।
महत्व
रंगों का यह त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो वसंत के आगमन, राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और आपसी मिलन की खुशी का प्रतीक है। इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को जीवंत रंगों और पानी से सराबोर करते हैं।
ज्योतिषीय महत्व
होली फाल्गुन पूर्णिमा के बाद आती है, इसलिए रंगों का यह उत्सव शीत ऋतु की अंतिम पूर्णिमा के ठीक बाद, जैसे ही चंद्र पक्ष बदलता है, मनाया जाता है। यह वसंत ऋतु के आगमन और दिनों के धीरे-धीरे लंबे होने का संकेत है। चूंकि यह फाल्गुन पूर्णिमा से जुड़ा है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसकी तिथि फरवरी के अंत और मार्च के बीच बदलती रहती है।
मास: फाल्गुन · पक्ष: कृष्ण · फाल्गुन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा — यह फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन के अगले दिन मनाया जाता है।
होली कैसे मनाया जाता है
- सूखे गुलाल और रंगीन पानी से खेलना
- मित्रों और परिजनों से मिलना और गुजिया जैसी मिठाइयाँ बाँटना
- ऋतु के अनुसार लोक गीतों पर गाना और नाचना
- विशेष रूप से ब्रज में राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव मनाना
- उत्सव के विशेष पकवान और पेय पदार्थ तैयार करना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में होली कब है?+
2026 में होली 4 मार्च को है। एक चंद्र पर्व होने के कारण इसकी तिथि हर साल बदलती है, इसलिए कृपया वर्तमान पंचांग से इसकी पुष्टि करें।
होली क्यों मनाई जाती है?+
यह वसंत के आगमन, बुराई पर अच्छाई की जीत और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव है, जिसे रंगों के आनंदमय खेल के साथ मनाया जाता है।
होली वसंत ऋतु में क्यों आती है?+
यह फाल्गुन पूर्णिमा के ठीक बाद आती है, जब ऋतु परिवर्तन होकर वसंत का आगमन होता है, इसीलिए इसे वसंत उत्सव भी कहा जाता है।
होली कैसे मनाई जाती है?+
लोग एक-दूसरे को गुलाल और रंगीन पानी से सराबोर करते हैं, गीत गाते हैं, नाचते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और अपने मित्रों एवं परिजनों से मिलते हैं।