शतभिषा नक्षत्र के बारे में
शतभिषा, जिसका अर्थ है 'सौ उपचारक', राहु द्वारा शासित है और इसके अधिष्ठाता वरुण हैं, जो ब्रह्मांडीय नियम, रात्रि आकाश और गुप्त जल के प्राचीन देवता हैं। खाली वृत्त ब्रह्मांड के रहस्य और उस विरोधाभासी उपचार क्षमता का प्रतीक है जो शून्य और अज्ञात में निहित है। इस नक्षत्र के जातक निजी स्वभाव के, वैज्ञानिक सोच वाले होते हैं और वैकल्पिक या समग्र उपचार, अत्याधुनिक अनुसंधान, या रहस्यमय और गुप्त जिज्ञासाओं की ओर आकर्षित होते हैं, जो पारंपरिक समझ से परे की खोज करते हैं।
मुख्य गुण
- आरोग्य
- रहस्य
- स्वतंत्रता
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- आत्म-चिंतन
शतभिषा के पाद (चरण)
| पाद | नवांश राशि | अक्षर |
|---|---|---|
| 1 | धनु | Go |
| 2 | मकर | Sa |
| 3 | कुंभ | Si |
| 4 | मीन | Su |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शतभिषा नक्षत्र क्या है?+
शतभिषा (Shatabhisha) वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में 24वाँ है। यह निरयण राशिचक्र में 6°40′–20°00′ कुंभ तक फैला है और इसका स्वामी राहु है। इसके अधिष्ठाता देवता वरुण और प्रतीक खाली वृत्त / सौ तारे है। शतभिषा राक्षस गण का है और इसकी योनि अश्व (घोड़ा) है।
शतभिषा नक्षत्र के जातकों के व्यक्तित्व गुण क्या हैं?+
शतभिषा नक्षत्र में जन्मे लोग सामान्यतः आरोग्य, रहस्य, स्वतंत्रता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्म-चिंतन जैसे गुणों से जुड़े होते हैं। खाली वृत्त ब्रह्मांड के रहस्य और उस विरोधाभासी उपचार क्षमता का प्रतीक है जो शून्य और अज्ञात में निहित है। इस नक्षत्र के जातक निजी स्वभाव के, वैज्ञानिक सोच वाले होते हैं और वैकल्पिक या समग्र उपचार, अत्याधुनिक अनुसंधान, या रहस्यमय और गुप्त जिज्ञासाओं की ओर आकर्षित होते हैं, जो पारंपरिक समझ से परे की खोज करते हैं।
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?+
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। विंशोत्तरी दशा प्रणाली में, शतभिषा में चंद्रमा के साथ जन्मा व्यक्ति अपने जीवन का आरंभ राहु की दशा से करता है। राहु की ग्रह-ऊर्जा इस नक्षत्र की प्रकृति और क्षमता को गहराई से प्रभावित करती है।
शतभिषा नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता कौन है?+
शतभिषा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता वरुण हैं। यह दिव्य ऊर्जा उच्च आध्यात्मिक उद्देश्य और उन प्रारूपिक विषयों को आकार देती है जिनका सामना शतभिषा जातक जीवन भर करते हैं।
शतभिषा नक्षत्र विवाह के लिए कैसा है?+
वैदिक कुंडली मिलान (गुण मिलान) में शतभिषा का गण राक्षस और योनि (पशु प्रतीक) अश्व (घोड़ा) है — ये आठ कूटों में से दो हैं जो कुंडली मिलान में देखे जाते हैं। विवाह के लिए कोई नक्षत्र सर्वथा अच्छा या बुरा नहीं होता; अनुकूलता इस पर निर्भर करती है कि ये कारक साथी के नक्षत्र से कैसे मेल खाते हैं। किसी भी जोड़ी को हमारे कुंडली मिलान टूल से जाँचें।