श्रवण नक्षत्र के बारे में
श्रवण, जिसका अर्थ है 'सुनना', चंद्रमा द्वारा शासित है और भगवान विष्णु से संबंधित है, जो ब्रह्मांड के सर्वव्यापी संरक्षक हैं और जिन्होंने अपने तीन विशाल कदमों से पूरे ब्रह्मांड को नापा था। इसका प्रतीक—तीन पदचिह्न या एक कान—इस नक्षत्र के गहरे श्रवण, सीखने और आध्यात्मिक ग्रहणशीलता के मूल गुण को दर्शाता है। इस नक्षत्र के जातकों में ज्ञान को आत्मसात करने, संश्लेषित करने और प्रसारित करने की अद्भुत क्षमता होती है, जो उन्हें उत्कृष्ट शिक्षक, परामर्शदाता, विद्वान और पवित्र परंपराओं को संरक्षित करने वाले भक्त बनाती है।
मुख्य गुण
- श्रवण
- सीखना
- भक्ति
- ग्रहणशीलता
- ज्ञान
श्रवण के पाद (चरण)
| पाद | नवांश राशि | अक्षर |
|---|---|---|
| 1 | मेष | Ju |
| 2 | वृषभ | Je |
| 3 | मिथुन | Jo |
| 4 | कर्क | Gha |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रवण नक्षत्र क्या है?+
श्रवण (Shravana) वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में 22वाँ है। यह निरयण राशिचक्र में 10°00′–23°20′ मकर तक फैला है और इसका स्वामी चंद्र है। इसके अधिष्ठाता देवता विष्णु और प्रतीक तीन पदचिह्न / कान है। श्रवण देव गण का है और इसकी योनि वानर (बंदर) है।
श्रवण नक्षत्र के जातकों के व्यक्तित्व गुण क्या हैं?+
श्रवण नक्षत्र में जन्मे लोग सामान्यतः श्रवण, सीखना, भक्ति, ग्रहणशीलता, ज्ञान जैसे गुणों से जुड़े होते हैं। इसका प्रतीक—तीन पदचिह्न या एक कान—इस नक्षत्र के गहरे श्रवण, सीखने और आध्यात्मिक ग्रहणशीलता के मूल गुण को दर्शाता है। इस नक्षत्र के जातकों में ज्ञान को आत्मसात करने, संश्लेषित करने और प्रसारित करने की अद्भुत क्षमता होती है, जो उन्हें उत्कृष्ट शिक्षक, परामर्शदाता, विद्वान और पवित्र परंपराओं को संरक्षित करने वाले भक्त बनाती है।
श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?+
श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्र है। विंशोत्तरी दशा प्रणाली में, श्रवण में चंद्रमा के साथ जन्मा व्यक्ति अपने जीवन का आरंभ चंद्र की दशा से करता है। चंद्र की ग्रह-ऊर्जा इस नक्षत्र की प्रकृति और क्षमता को गहराई से प्रभावित करती है।
श्रवण नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता कौन है?+
श्रवण नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता विष्णु हैं। यह दिव्य ऊर्जा उच्च आध्यात्मिक उद्देश्य और उन प्रारूपिक विषयों को आकार देती है जिनका सामना श्रवण जातक जीवन भर करते हैं।
श्रवण नक्षत्र विवाह के लिए कैसा है?+
वैदिक कुंडली मिलान (गुण मिलान) में श्रवण का गण देव और योनि (पशु प्रतीक) वानर (बंदर) है — ये आठ कूटों में से दो हैं जो कुंडली मिलान में देखे जाते हैं। विवाह के लिए कोई नक्षत्र सर्वथा अच्छा या बुरा नहीं होता; अनुकूलता इस पर निर्भर करती है कि ये कारक साथी के नक्षत्र से कैसे मेल खाते हैं। किसी भी जोड़ी को हमारे कुंडली मिलान टूल से जाँचें।