स्वाती नक्षत्र के बारे में
स्वाति, जिसका प्रतीक हवा में झुकती एक कोपल है, राहु द्वारा शासित और वायु देव द्वारा नियंत्रित है, जो अनुकूलनशीलता, स्वतंत्रता और बिना टूटे झुकने के विवेक को दर्शाता है। तुला राशि के केंद्र में स्थित और आर्कटुरस तारे से संबंधित, स्वाति नक्षत्र वाणिज्य, कूटनीति और बातचीत एवं अनुनय की कला से जुड़ा है। इस नक्षत्र के जातक आत्मनिर्भर, मिलनसार और अद्भुत सामाजिक बुद्धिमत्ता वाले होते हैं, जो लचीले और सतर्क रहकर जटिल परिस्थितियों में भी उन्नति करने में सक्षम होते हैं।
मुख्य गुण
- स्वतंत्रता
- लचीलापन
- कूटनीति
- सीखने की प्रवृत्ति
- व्यावसायिक कुशलता
स्वाती के पाद (चरण)
| पाद | नवांश राशि | अक्षर |
|---|---|---|
| 1 | धनु | Ru |
| 2 | मकर | Re |
| 3 | कुंभ | Ro |
| 4 | मीन | Ta |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वाती नक्षत्र क्या है?+
स्वाती (Swati) वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में 15वाँ है। यह निरयण राशिचक्र में 6°40′–20°00′ तुला तक फैला है और इसका स्वामी राहु है। इसके अधिष्ठाता देवता वायु और प्रतीक हवा में झूमती कोपल / मूंगा है। स्वाती देव गण का है और इसकी योनि महिष (भैंस) है।
स्वाती नक्षत्र के जातकों के व्यक्तित्व गुण क्या हैं?+
स्वाती नक्षत्र में जन्मे लोग सामान्यतः स्वतंत्रता, लचीलापन, कूटनीति, सीखने की प्रवृत्ति, व्यावसायिक कुशलता जैसे गुणों से जुड़े होते हैं। तुला राशि के केंद्र में स्थित और आर्कटुरस तारे से संबंधित, स्वाति नक्षत्र वाणिज्य, कूटनीति और बातचीत एवं अनुनय की कला से जुड़ा है। इस नक्षत्र के जातक आत्मनिर्भर, मिलनसार और अद्भुत सामाजिक बुद्धिमत्ता वाले होते हैं, जो लचीले और सतर्क रहकर जटिल परिस्थितियों में भी उन्नति करने में सक्षम होते हैं।
स्वाती नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?+
स्वाती नक्षत्र का स्वामी राहु है। विंशोत्तरी दशा प्रणाली में, स्वाती में चंद्रमा के साथ जन्मा व्यक्ति अपने जीवन का आरंभ राहु की दशा से करता है। राहु की ग्रह-ऊर्जा इस नक्षत्र की प्रकृति और क्षमता को गहराई से प्रभावित करती है।
स्वाती नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता कौन है?+
स्वाती नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता वायु हैं। यह दिव्य ऊर्जा उच्च आध्यात्मिक उद्देश्य और उन प्रारूपिक विषयों को आकार देती है जिनका सामना स्वाती जातक जीवन भर करते हैं।
स्वाती नक्षत्र विवाह के लिए कैसा है?+
वैदिक कुंडली मिलान (गुण मिलान) में स्वाती का गण देव और योनि (पशु प्रतीक) महिष (भैंस) है — ये आठ कूटों में से दो हैं जो कुंडली मिलान में देखे जाते हैं। विवाह के लिए कोई नक्षत्र सर्वथा अच्छा या बुरा नहीं होता; अनुकूलता इस पर निर्भर करती है कि ये कारक साथी के नक्षत्र से कैसे मेल खाते हैं। किसी भी जोड़ी को हमारे कुंडली मिलान टूल से जाँचें।