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No.7

पुनर्वसु नक्षत्र

Punarvasu

20°00′ मिथुन–3°20′ कर्क · स्वामी: बृहस्पति · देवता: अदिति · देव गण

नवीनीकरणआशावादबहुमुखी प्रतिभाबुद्धिमत्ताकरुणा

पुनर्वसु नक्षत्र के बारे में

पुनर्वसु, जिसका अर्थ है 'प्रकाश की वापसी', बृहस्पति द्वारा शासित है और इसकी अधिष्ठात्री देवी अदिति हैं, जो अनंत संभावनाओं की प्रतीक असीम मातृदेवी हैं। बाणों का तरकश तत्परता, संसाधनशीलता और बार-बार अपने मूल स्रोत पर लौटने और पुनः आरंभ करने की क्षमता का प्रतीक है। इस नक्षत्र के जातक स्वाभाविक रूप से आशावादी, अनुकूलनशील और आध्यात्मिक होते हैं, जिनमें एक लचीला स्वभाव होता है जो उन्हें नए उद्देश्य और उत्साह के साथ प्रतिकूलताओं से उबरने में मदद करता है।

मुख्य गुण

  • नवीनीकरण
  • आशावाद
  • बहुमुखी प्रतिभा
  • बुद्धिमत्ता
  • करुणा

पुनर्वसु के पाद (चरण)

पादनवांश राशिअक्षर
1मेषKe
2वृषभKo
3मिथुनHa
4कर्कHi

पुनर्वसु के लिए शिशु नाम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुनर्वसु नक्षत्र क्या है?+

पुनर्वसु (Punarvasu) वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में 7वाँ है। यह निरयण राशिचक्र में 20°00′ मिथुन–3°20′ कर्क तक फैला है और इसका स्वामी बृहस्पति है। इसके अधिष्ठाता देवता अदिति और प्रतीक बाणों का तरकश है। पुनर्वसु देव गण का है और इसकी योनि मार्जार (बिल्ली) है।

पुनर्वसु नक्षत्र के जातकों के व्यक्तित्व गुण क्या हैं?+

पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे लोग सामान्यतः नवीनीकरण, आशावाद, बहुमुखी प्रतिभा, बुद्धिमत्ता, करुणा जैसे गुणों से जुड़े होते हैं। बाणों का तरकश तत्परता, संसाधनशीलता और बार-बार अपने मूल स्रोत पर लौटने और पुनः आरंभ करने की क्षमता का प्रतीक है। इस नक्षत्र के जातक स्वाभाविक रूप से आशावादी, अनुकूलनशील और आध्यात्मिक होते हैं, जिनमें एक लचीला स्वभाव होता है जो उन्हें नए उद्देश्य और उत्साह के साथ प्रतिकूलताओं से उबरने में मदद करता है।

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?+

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। विंशोत्तरी दशा प्रणाली में, पुनर्वसु में चंद्रमा के साथ जन्मा व्यक्ति अपने जीवन का आरंभ बृहस्पति की दशा से करता है। बृहस्पति की ग्रह-ऊर्जा इस नक्षत्र की प्रकृति और क्षमता को गहराई से प्रभावित करती है।

पुनर्वसु नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता कौन है?+

पुनर्वसु नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अदिति हैं। यह दिव्य ऊर्जा उच्च आध्यात्मिक उद्देश्य और उन प्रारूपिक विषयों को आकार देती है जिनका सामना पुनर्वसु जातक जीवन भर करते हैं।

पुनर्वसु नक्षत्र विवाह के लिए कैसा है?+

वैदिक कुंडली मिलान (गुण मिलान) में पुनर्वसु का गण देव और योनि (पशु प्रतीक) मार्जार (बिल्ली) है — ये आठ कूटों में से दो हैं जो कुंडली मिलान में देखे जाते हैं। विवाह के लिए कोई नक्षत्र सर्वथा अच्छा या बुरा नहीं होता; अनुकूलता इस पर निर्भर करती है कि ये कारक साथी के नक्षत्र से कैसे मेल खाते हैं। किसी भी जोड़ी को हमारे कुंडली मिलान टूल से जाँचें।

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