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नवग्रह

नौ ग्रह

वैदिक ज्योतिष नौ ग्रहों को पढ़ता है: सात दृश्य पिंड और दो चंद्र-बिंदु, राहु व केतु। प्रत्येक के अपने कारकत्व हैं, एक या दो राशियों का स्वामी है, और राशिचक्र में अपनी गति से चलता है। नीचे दिए संबंध शास्त्रीय ज्योतिष (बृहत् पराशर होरा शास्त्र) पर आधारित हैं।

सूर्य

देवता: सूर्य देव

आत्मा, जीवनशक्ति, पिता, अधिकार, सरकार, स्वास्थ्य।

सूर्य आत्मा, पिता और अधिकार का कारक है। बलवान सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व, अच्छा स्वास्थ्य और राजकीय मान देता है; निर्बल या पीड़ित सूर्य आत्म-सम्मान की कमी, पिता या अधिकारियों से मतभेद, तथा हड्डी/हृदय की दुर्बलता दिखा सकता है। सूर्य मेष में उच्च और तुला में नीच होता है।

स्वामी: सिंहगति: ~1 माह प्रति राशि
रत्न: माणिक्यवार: रविवारउच्च: मेषनीच: तुलाबीज मंत्र: Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namahउपाय: सूर्योदय पर सूर्य को अर्घ्य दें; रविवार को गेहूँ या गुड़ का दान करें।

चंद्र

देवता: चंद्र देव

मन, भावनाएँ, माता, सुख, जनता, तरल।

चंद्र मन, भावनाओं और माता का स्वामी है। बलवान शुक्ल चंद्र भावनात्मक स्थिरता, लोकप्रियता और स्नेही स्वभाव देता है; निर्बल या क्षीण चंद्र चिंता, मनोदशा में उतार-चढ़ाव और बेचैनी ला सकता है। चंद्र वृषभ में उच्च और वृश्चिक में नीच होता है।

स्वामी: कर्कगति: ~2.25 दिन प्रति राशि
रत्न: मोतीवार: सोमवारउच्च: वृषभनीच: वृश्चिकबीज मंत्र: Om Shraam Shreem Shraum Sah Chandraya Namahउपाय: सोमवार को सफेद चावल या दूध अर्पित करें; चाँदी का पात्र रखें।

मंगल

देवता: कार्तिकेय / भौम

ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि, अनुशासन, संघर्ष।

मंगल ऊर्जा, साहस, भाई-बहन और भूमि का कारक है। शुभ मंगल उद्यम, अनुशासन और तकनीकी कौशल देता है; पीड़ित मंगल क्रोध, दुर्घटना और संघर्ष ला सकता है, तथा विवाह में मांगलिक दोष हेतु इसकी जाँच होती है। मंगल मकर में उच्च और कर्क में नीच होता है।

स्वामी: मेष, वृश्चिकगति: ~1.5 माह प्रति राशि
रत्न: मूँगावार: मंगलवारउच्च: मकरनीच: कर्कबीज मंत्र: Om Kraam Kreem Kraum Sah Bhaumaya Namahउपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें; मंगलवार को मसूर दाल का दान करें।

बुध

देवता: विष्णु (बुध रूप)

बुद्धि, वाणी, व्यापार, शिक्षा, संचार।

बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और विश्लेषण का स्वामी है। बलवान बुध तीव्र संवाद, व्यापारिक समझ और चातुर्य देता है; निर्बल बुध अनिर्णय, वाणी-दोष या घबराहट दिखा सकता है। बुध कन्या में उच्च और मीन में नीच होता है।

स्वामी: मिथुन, कन्यागति: ~1 माह प्रति राशि
रत्न: पन्नावार: बुधवारउच्च: कन्यानीच: मीनबीज मंत्र: Om Braam Breem Braum Sah Budhaya Namahउपाय: बुधवार को हरी मूँग का दान करें या गाय को हरा चारा खिलाएँ।

गुरु (बृहस्पति)

देवता: बृहस्पति

ज्ञान, धर्म, धन, संतान, गुरु, भाग्य।

गुरु महान शुभ ग्रह है — ज्ञान, धर्म, धन और संतान का कारक। बलवान गुरु विद्या, आशावाद, अच्छे गुरु और भाग्य देता है; निर्बल गुरु दुर्बल निर्णय, ऋण या मार्गदर्शन की कमी दिखा सकता है। गुरु कर्क में उच्च और मकर में नीच होता है।

स्वामी: धनु, मीनगति: ~1 वर्ष प्रति राशि
रत्न: पुखराजवार: गुरुवारउच्च: कर्कनीच: मकरबीज मंत्र: Om Graam Greem Graum Sah Gurave Namahउपाय: गुरुवार को हल्दी, चना दाल या पीली वस्तुएँ दान करें।

शुक्र

देवता: शुक्राचार्य

प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलासिता, वाहन।

शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला और सुख का स्वामी है। बलवान शुक्र आकर्षण, सुखी दांपत्य, कलात्मक प्रतिभा और विलासिता देता है; पीड़ित शुक्र संबंधों में कठिनाई या अति-भोग ला सकता है। शुक्र मीन में उच्च और कन्या में नीच होता है।

स्वामी: वृषभ, तुलागति: ~23 दिन प्रति राशि
रत्न: हीरावार: शुक्रवारउच्च: मीननीच: कन्याबीज मंत्र: Om Draam Dreem Draum Sah Shukraya Namahउपाय: शुक्रवार को सफेद मिठाई, दही या सफेद वस्त्र दान करें।

शनि

देवता: शनि देव

अनुशासन, कर्म, आयु, श्रम, विलंब, धैर्य।

शनि अनुशासन, कर्म, आयु और श्रम का कारक है। शुभ शनि धैर्य को स्थायी सफलता, उत्तरदायित्व और सहनशक्ति से पुरस्कृत करता है; पीड़ित शनि विलंब, कष्ट और साढ़ेसाती के पाठ लाता है। शनि तुला में उच्च और मेष में नीच होता है।

स्वामी: मकर, कुम्भगति: ~2.5 वर्ष प्रति राशि
रत्न: नीलमवार: शनिवारउच्च: तुलानीच: मेषबीज मंत्र: Om Praam Preem Praum Sah Shanaischaraya Namahउपाय: शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल या लोहा दान करें; ज़रूरतमंदों की सेवा करें।

राहु

देवता: राहु

इच्छा, महत्वाकांक्षा, विदेश, माया, आकस्मिक लाभ।

राहु, उत्तर चंद्र-बिंदु, सांसारिक इच्छा, महत्वाकांक्षा, विदेश और आकस्मिक अपरंपरागत लाभ का कारक है। बलवान राहु तीव्र उन्नति और आधुनिक क्षेत्रों में दक्षता दे सकता है; पीड़ित राहु भ्रम, आसक्ति और छल लाता है। राहु सदैव वक्री रहता है और जिस भाव-राशि में हो उसे प्रबल करता है।

स्वामी: कुम्भ का सह-स्वामी (परंपरा)गति: ~1.5 वर्ष प्रति राशि (वक्री)
रत्न: गोमेदवार: उच्च: वृषभ (मतभेद)नीच: वृश्चिक (मतभेद)बीज मंत्र: Om Bhraam Bhreem Bhraum Sah Rahave Namahउपाय: सरसों, कंबल या नारियल दान करें; राहु बीज मंत्र का जाप करें।

केतु

देवता: केतु

वैराग्य, मोक्ष, पूर्व कर्म, अध्यात्म, आकस्मिक हानि।

केतु, दक्षिण चंद्र-बिंदु, वैराग्य, अध्यात्म, पूर्वजन्म कर्म और मोक्ष का कारक है। बलवान केतु अंतर्ज्ञान, शोध-क्षमता और आध्यात्मिक गहराई देता है; पीड़ित केतु आकस्मिक हानि, एकाकीपन या भ्रम ला सकता है। केतु सदैव वक्री रहता है और एक मुक्तिदायी शक्ति की भाँति कार्य करता है।

स्वामी: वृश्चिक का सह-स्वामी (परंपरा)गति: ~1.5 वर्ष प्रति राशि (वक्री)
रत्न: लहसुनियावार: उच्च: वृश्चिक (मतभेद)नीच: वृषभ (मतभेद)बीज मंत्र: Om Sraam Sreem Sraum Sah Ketave Namahउपाय: रंग-बिरंगा कंबल या तिल दान करें; कुत्तों को भोजन दें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह कौन-कौन से हैं?

नौ ग्रह हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु।

क्या राहु और केतु वास्तविक ग्रह हैं?

नहीं। राहु और केतु भौतिक पिंड नहीं, बल्कि चंद्र-पथ और सूर्य-पथ के प्रतिच्छेदन बिंदु (चंद्र-बिंदु) हैं। इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है और ये सदैव वक्री रहते हैं।

प्रत्येक ग्रह किस राशि का स्वामी है?

सूर्य—सिंह, चंद्र—कर्क, मंगल—मेष व वृश्चिक, बुध—मिथुन व कन्या, गुरु—धनु व मीन, शुक्र—वृषभ व तुला, शनि—मकर व कुम्भ। राहु–केतु परंपरा में क्रमशः कुम्भ व वृश्चिक के सह-स्वामी माने जाते हैं।

सबसे धीमा और सबसे तेज़ ग्रह कौन है?

चंद्र सबसे तेज़ है (~सवा दो दिन प्रति राशि) और शनि सबसे धीमा (~2.5 वर्ष प्रति राशि)।

सबसे शक्तिशाली नवग्रह कौन है?

परंपरागत रूप से सूर्य (आत्मा व अधिकार) और गुरु (महान शुभ, ज्ञान व भाग्य) सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं; शनि सबसे बड़ा कर्म-कारक है। पर वास्तविक बल कुंडली में ग्रह की राशि, भाव व दशा पर निर्भर करता है — कोई एक ग्रह सदा सर्वोपरि नहीं।