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वक्री

अभी कौन-से ग्रह वक्री हैं

शनि
राशि मीन · 18.80°
राहु
राशि कुम्भ · 4.52°
केतु
राशि सिंह · 4.52°

2026 वक्री कैलेंडर

ग्रहवक्री अवधिराशि
गुरु (बृहस्पति)12 नव॰ – 10 मार्चकर्क
बुध26 फ़र॰ – 20 मार्चकुम्भ
बुध30 जून – 23 जुल॰कर्क
शनि27 जुल॰ – 10 दिस॰मीन
शुक्र3 अक्टू॰ – 13 नव॰तुला
बुध24 अक्टू॰ – 13 नव॰तुला
गुरु (बृहस्पति)13 दिस॰ – 1 फ़र॰सिंह

राशियाँ सिडरियल (लाहिरी) हैं। राहु व केतु सदैव वक्री रहते हैं, इसलिए सूची में नहीं हैं। तिथियाँ एफ़ेमेरिस से गणना की गई हैं।

वक्री का क्या अर्थ है?

जब पृथ्वी से देखने पर कोई ग्रह राशिचक्र में पीछे की ओर चलता प्रतीत होता है, तब वह वक्री होता है। यह आभासी गति है — ग्रह वास्तव में उल्टा नहीं चलता — जो पृथ्वी व ग्रह की कक्षीय गति के सापेक्ष अंतर से होती है। वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह कुछ शास्त्रीय मापों (चेष्टा बल) में बलवान माना जाता है और प्रायः अपने कारकत्वों को अंतर्मुखी करता है — नई शुरुआत के बजाय पुनरावलोकन व सुधार का समय। राहु और केतु स्वभाव से सदैव वक्री रहते हैं।

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किस ग्रह का वक्री होना क्या दर्शाता है

  • बुध (Mercury)संवाद, अनुबंध, यात्रा व तकनीक की पुनः जाँच का समय; जल्दबाज़ी में हस्ताक्षर टालें।
  • शुक्र (Venus)पुराने रिश्ते व कलात्मक कार्य लौट सकते हैं; बड़े प्रेम-निर्णय व खरीदारी पर पुनर्विचार करें।
  • मंगल (Mars)ऊर्जा अंतर्मुखी होती है; नई आक्रामक शुरुआत के बजाय अधूरे कार्य पूरे करें, क्रोध पर संयम रखें।
  • गुरु (Jupiter)विश्वास, शिक्षा व धर्म पर पुनर्विचार; आंतरिक विकास व योजनाओं के पुनरावलोकन का अच्छा समय।
  • शनि (Saturn)कर्म, उत्तरदायित्व व अनुशासन की समीक्षा; पुराने दायित्व पूरे करें, धैर्य रखें।

वास्तविक प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि ग्रह आपकी कुंडली में किन भावों का स्वामी है और कहाँ स्थित है।

वक्री काल का सदुपयोग कैसे करें

वक्री काल भयभीत होने की बात नहीं — यह गियर बदलने जैसा है। चूँकि ग्रह अपनी ऊर्जा अंतर्मुखी करता है, इसका काल "पुनः" उपसर्ग वाले कार्यों के लिए उत्तम है: पुनरावलोकन, पुनर्विचार, पुनः-संपर्क, मरम्मत, मनन। बुध वक्री में डेटा का बैकअप लें, हस्ताक्षर से पूर्व अनुबंध पुनः पढ़ें, और यात्रा-योजना की पुष्टि करें, न कि बिल्कुल नया उद्यम आरंभ करें। शुक्र वक्री में संबंधों पर पुनर्विचार व रचनात्मक कार्य को सुधारें, आकस्मिक वचन न दें। शनि व बाह्य-ग्रह वक्री महीनों चलते हैं और दैनिक बाधा के बजाय दीर्घ सुदृढ़ीकरण-ऋतु के रूप में अनुभव होते हैं। शास्त्रीय सलाह सरल है: जो पहले से है उसे पूरा व परिष्कृत करें, और बड़ी नई शुरुआत ग्रह के मार्गी होने तक टालें।

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