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वक्री

अभी कौन-से ग्रह वक्री हैं

7 नवंबर 2026 तक बुध, शुक्र और शनि वक्री हैं; चंद्र-बिंदु राहु और केतु सदैव वक्री रहते हैं।

बुध ℞
राशि तुला · 14.38° · 13 नवंबर 2026 को मार्गी
शुक्र ℞
राशि कन्या · 29.50° · 14 नवंबर 2026 को मार्गी
शनि ℞
राशि मीन · 14.67° · 11 दिसंबर 2026 को मार्गी
सदैव वक्री (चंद्र-बिंदु)
राहु — कुम्भ 1.50° · केतु — सिंह 1.50°

अभी · अगले 30 दिन

  • बुध अभी वक्री है, 13 नवंबर 2026 तक
    13 नवंबर 2026 को 21:22 IST पर मार्गी होगा
  • शुक्र अभी वक्री है, 14 नवंबर 2026 तक
    14 नवंबर 2026 को 05:57 IST पर मार्गी होगा
  • शनि अभी वक्री है, 11 दिसंबर 2026 तक
    11 दिसंबर 2026 को 05:00 IST पर मार्गी होगा

2026 वक्री कैलेंडर

ग्रहवक्री अवधिराशि
गुरु (बृहस्पति)11 नवंबर 2025 – 11 मार्च 2026कर्क
बुध26 फ़रवरी 2026 – 21 मार्च 2026कुम्भ
बुध29 जून 2026 – 24 जुलाई 2026कर्क
शनि27 जुलाई 2026 – 11 दिसंबर 2026मीन
शुक्र3 अक्टूबर 2026 – 14 नवंबर 2026तुला
बुध24 अक्टूबर 2026 – 13 नवंबर 2026तुला
गुरु (बृहस्पति)13 दिसंबर 2026 – 13 अप्रैल 2027सिंह

राशियाँ सिडरियल (लाहिरी) हैं। राहु व केतु सदैव वक्री रहते हैं, इसलिए सूची में नहीं हैं। तिथियाँ वक्री और मार्गी होने के दिन हैं (IST, नई दिल्ली), द्रिक पंचांग से मिलान की गई।

वक्री का क्या अर्थ है?

जब पृथ्वी से देखने पर कोई ग्रह राशिचक्र में पीछे की ओर चलता प्रतीत होता है, तब वह वक्री होता है। यह आभासी गति है — ग्रह वास्तव में उल्टा नहीं चलता — जो पृथ्वी व ग्रह की कक्षीय गति के सापेक्ष अंतर से होती है। वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह कुछ शास्त्रीय मापों (चेष्टा बल) में बलवान माना जाता है और प्रायः अपने कारकत्वों को अंतर्मुखी करता है — नई शुरुआत के बजाय पुनरावलोकन व सुधार का समय। राहु और केतु स्वभाव से सदैव वक्री रहते हैं।

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किस ग्रह का वक्री होना क्या दर्शाता है

  • बुध (Mercury) — संवाद, अनुबंध, यात्रा व तकनीक की पुनः जाँच का समय; जल्दबाज़ी में हस्ताक्षर टालें।
  • शुक्र (Venus) — पुराने रिश्ते व कलात्मक कार्य लौट सकते हैं; बड़े प्रेम-निर्णय व खरीदारी पर पुनर्विचार करें।
  • मंगल (Mars) — ऊर्जा अंतर्मुखी होती है; नई आक्रामक शुरुआत के बजाय अधूरे कार्य पूरे करें, क्रोध पर संयम रखें।
  • गुरु (Jupiter) — विश्वास, शिक्षा व धर्म पर पुनर्विचार; आंतरिक विकास व योजनाओं के पुनरावलोकन का अच्छा समय।
  • शनि (Saturn) — कर्म, उत्तरदायित्व व अनुशासन की समीक्षा; पुराने दायित्व पूरे करें, धैर्य रखें।

वास्तविक प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि ग्रह आपकी कुंडली में किन भावों का स्वामी है और कहाँ स्थित है।

वक्री काल का सदुपयोग कैसे करें

वक्री काल भयभीत होने की बात नहीं — यह गियर बदलने जैसा है। चूँकि ग्रह अपनी ऊर्जा अंतर्मुखी करता है, इसका काल "पुनः" उपसर्ग वाले कार्यों के लिए उत्तम है: पुनरावलोकन, पुनर्विचार, पुनः-संपर्क, मरम्मत, मनन। बुध वक्री में डेटा का बैकअप लें, हस्ताक्षर से पूर्व अनुबंध पुनः पढ़ें, और यात्रा-योजना की पुष्टि करें, न कि बिल्कुल नया उद्यम आरंभ करें। शुक्र वक्री में संबंधों पर पुनर्विचार व रचनात्मक कार्य को सुधारें, आकस्मिक वचन न दें। शनि व बाह्य-ग्रह वक्री महीनों चलते हैं और दैनिक बाधा के बजाय दीर्घ सुदृढ़ीकरण-ऋतु के रूप में अनुभव होते हैं। शास्त्रीय सलाह सरल है: जो पहले से है उसे पूरा व परिष्कृत करें, और बड़ी नई शुरुआत ग्रह के मार्गी होने तक टालें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वक्री (Retrograde) का क्या अर्थ है?

वक्री तब होता है जब पृथ्वी से ग्रह राशिचक्र में पीछे चलता प्रतीत होता है — यह आभासी गति है। वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह चेष्टा बल में बलवान माना जाता है और पुनरावलोकन का समय दर्शाता है।

क्या राहु और केतु हमेशा वक्री रहते हैं?

हाँ, चंद्र-बिंदु राहु और केतु स्वभाव से सदैव वक्री गति में रहते हैं।

वक्री ग्रह हमें कैसे प्रभावित करते हैं?

वक्री ग्रह अपने कारकत्वों को अंतर्मुखी कर देता है — यह नई शुरुआत के बजाय पुनरावलोकन, पुनर्विचार और पुराने मामलों को सुलझाने का समय होता है। जैसे बुध वक्री में संवाद, यात्रा व अनुबंध दुबारा जाँचें; शुक्र वक्री में पुराने रिश्ते लौट सकते हैं। प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि ग्रह आपकी कुंडली में किस भाव का स्वामी है।

क्या वक्री ग्रह कमज़ोर होता है?

नहीं — वक्री ग्रह चेष्टा बल (गति-बल) में बलवान गिना जाता है और प्रायः अपने फल तीव्रता से देता है। "कमज़ोर" ग्रह वह है जो अस्त हो या नीच राशि में — वक्री होना दुर्बलता नहीं, बल्कि ऊर्जा की दिशा-बदल है।

बुध वक्री में क्या नहीं करना चाहिए?

बुध वक्री में जल्दबाज़ी में अनुबंध या इलेक्ट्रॉनिक खरीद, महत्वपूर्ण संवाद बिना दोबारा जाँचे भेजना, और बड़ी नई यात्रा-योजना से बचें। डेटा का बैकअप लें और पुराने कार्य पूरे करें — यह "पुनः" वाले कार्यों का समय है।

2026 में बुध कब वक्री है?

2026 में बुध वक्री रहता है: 26 फ़रवरी 2026 – 21 मार्च 2026; 29 जून 2026 – 24 जुलाई 2026; 24 अक्टूबर 2026 – 13 नवंबर 2026 (वक्री और मार्गी होने की तिथियाँ, IST, नई दिल्ली — द्रिक पंचांग से मिलान)।

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