कालाष्टमी 2025 तिथियाँ (अभिलेख)
2025 की कालाष्टमी तिथियाँ बीत चुकी हैं; यह पृष्ठ अभिलेख के लिए रखा गया है। आगामी तिथियों के लिए देखें: कालाष्टमी कब है — सभी आगामी तिथियाँ।
कालाष्टमी प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी है, जो काल भैरव — समय के अधिपति, शिव के उग्र रूप — को समर्पित है। मार्गशीर्ष की कालाष्टमी कालभैरव जयंती है। नीचे तिथियाँ दिल्ली के लिए हैं।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 21 जन॰ 2025 | 21 जनवरी, दोपहर 12:40 | 22 जनवरी, दोपहर 3:18 | कालाष्टमी | मंगल | कृष्ण · माघ |
| 20 फ़र॰ 2025 | 20 फ़रवरी, सुबह 9:58 | 21 फ़रवरी, सुबह 11:58 | कालाष्टमी | गुरु | कृष्ण · फाल्गुन |
| 22 मार्च 2025 | 22 मार्च, सुबह 4:24 | 23 मार्च, सुबह 5:23 | कालाष्टमी | शनि | कृष्ण · चैत्र |
| 20 अप्रैल 2025 | 20 अप्रैल, शाम 7:01 | 21 अप्रैल, शाम 6:59 | कालाष्टमी | रवि | कृष्ण · वैशाख |
| 20 मई 2025 | 20 मई, सुबह 5:52 | 21 मई, सुबह 4:55 | कालाष्टमी | मंगल | कृष्ण · ज्येष्ठ |
| 18 जून 2025 | 18 जून, दोपहर 1:35 | 19 जून, सुबह 11:56 | कालाष्टमी | बुध | कृष्ण · आषाढ़ |
| 17 जुल॰ 2025 | 17 जुलाई, शाम 7:09 | 18 जुलाई, शाम 5:02 | कालाष्टमी | गुरु | कृष्ण · श्रावण |
| 16 अग॰ 2025 | 15 अगस्त, रात 11:50 | 16 अगस्त, रात 9:35 | कालाष्टमी | शनि | कृष्ण · भाद्रपद |
| 14 सित॰ 2025 | 14 सितंबर, सुबह 5:05 | 15 सितंबर, रात 3:06 | कालाष्टमी | रवि | कृष्ण · आश्विन |
| 13 अक्टू॰ 2025 | 13 अक्टूबर, दोपहर 12:24 | 14 अक्टूबर, सुबह 11:10 | कालाष्टमी | सोम | कृष्ण · कार्तिक |
| 12 नव॰ 2025 | 11 नवंबर, रात 11:09 | 12 नवंबर, रात 10:58 | कालभैरव जयंती | बुध | कृष्ण · मार्गशीर्ष |
| 11 दिस॰ 2025 | 11 दिसंबर, दोपहर 1:57 | 12 दिसंबर, दोपहर 2:57 | कालाष्टमी | गुरु | कृष्ण · पौष |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
कालाष्टमी क्या है?
कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की मासिक रात्रि है। भैरव भय-निवारक, अन्याय के दंडक और काल के स्वामी रूप में पूजित हैं; उनका व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, अनुशासन और राहु-शनि जनित कष्टों से राहत हेतु रखा जाता है।
भैरव पूजा
पूजा संध्या या रात्रि में होती है — सरसों-तेल का दीपक, काले तिल और आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् इसका हृदय हैं। इस दिन भैरव के सहचर श्वानों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
कालाष्टमी व्रत विधि
व्रत सूर्योदय से रखा जाता है और मुख्य पूजा अंधेरे के बाद होती है, क्योंकि भैरव रात्रि के देवता हैं। भक्त स्नान कर संकल्प लेते हैं और संध्या या मध्यरात्रि में सरसों-तेल का दीपक, काले तिल, उड़द और पुष्प अर्पित कर पूजा करते हैं। आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् सामान्य पाठ है। कुत्तों को भोजन कराना अनुष्ठान का अंग माना जाता है, क्योंकि श्वान भैरव का वाहन है। अगली सुबह व्रत खोला जाता है। परंपरा घर और क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती है।
व्रत क्यों रखा जाता है
भैरव को भय-निवारक और व्यवस्था के रक्षक के रूप में देखा जाता है, इसलिए यह व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, साहस, ऋण और मुकदमों से मुक्ति, तथा शनि या राहु के कष्ट में राहत के लिए रखा जाता है। शैव परंपरा में वे क्षेत्रपाल भी हैं — पवित्र भूमि के रक्षक — इसीलिए अनेक मंदिरों की सीमा पर भैरव का स्थान होता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं, किसी परिणाम का दावा नहीं।
कथा — भैरव का प्रकट होना
शिव पुराण में कहा गया है कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव में श्रेष्ठता का विवाद हुआ और ब्रह्मा ने अपने पाँच सिरों के बल पर अहंकारपूर्वक अपना दावा रखा। शिव के क्रोध से एक उग्र रूप प्रकट हुआ — काल भैरव — जिसने अपने नखाग्र से वह पाँचवाँ सिर काट दिया। तब ब्रह्महत्या का दोष भैरव के पीछे लगा और ब्रह्मा का कपाल उनके हाथ से चिपक गया, जिसे लेकर वे भिक्षु रूप में भटकते रहे। विष्णु की सलाह पर वे काशी आए, जहाँ मत्स्योदरी तीर्थ के तट पर वह कपाल गिर गया और दोष दूर हुआ। तब शिव ने उन्हें वहीं काशी के कोतवाल के रूप में रहने का आदेश दिया, और कहा जाता है कि उनकी अनुमति के बिना काशी में कोई निवास नहीं कर सकता। मार्गशीर्ष की कालाष्टमी कालभैरव जयंती के रूप में मनाई जाती है।
कालाष्टमी पूजा सामग्री
संध्या पूजा से पूर्व ये सामग्री एकत्र करें:
- काल भैरव की मूर्ति या चित्र
- सरसों तेल का दीपक
- काले तिल
- उड़द दाल
- लाल या काले पुष्प
- सिंदूर और चंदन
- धूप
- नारियल और मौसमी फल
- कुत्तों को खिलाने का भोजन
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में कितनी कालाष्टमी हैं?+
2025 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 12 कालाष्टमी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण अष्टमी को एक, जिनमें मार्गशीर्ष की कालभैरव जयंती है।
काल भैरव कौन हैं?+
काल भैरव शिव का उग्र स्वरूप हैं — काल के स्वामी और तीर्थों के क्षेत्रपाल — विशेषतः काशी के, जहाँ वे नगर के कोतवाल माने जाते हैं।
कालभैरव जयंती कब है?+
मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) की कालाष्टमी कालभैरव जयंती — भैरव के प्राकट्य का दिन — मानी जाती है।
व्रत कैसे रखा जाता है?+
भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि में सरसों-तेल के दीप से भैरव पूजा करते हैं, कालभैरवाष्टकम् का पाठ करते हैं और उनके वाहन श्वान को भोजन कराते हैं।
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