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2025 बीत चुका है
विनायक चतुर्थी की अगली तिथि: शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
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पंचांग व्रत कैलेंडर

विनायक चतुर्थी 2025 तिथियाँ (अभिलेख)

2025 की विनायक चतुर्थी तिथियाँ बीत चुकी हैं; यह पृष्ठ अभिलेख के लिए रखा गया है। आगामी तिथियों के लिए देखें: विनायक चतुर्थी कब है — सभी आगामी तिथियाँ।

विनायक (वरद) चतुर्थी प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, जो गणेश जी को समर्पित है। संकष्टी के विपरीत व्रत मध्याह्न में खोला जाता है — चंद्र-दर्शन आवश्यक नहीं। भाद्रपद की विनायक चतुर्थी ही महान गणेश चतुर्थी है। नीचे तिथियाँ दिल्ली के लिए हैं।

तिथितिथि आरंभतिथि समाप्तनामदिनपक्ष / मास (पूर्णिमांत)
3 जन॰ 20253 जनवरी, रात 1:083 जनवरी, रात 11:40विनायक चतुर्थीशुक्रशुक्ल · पौष
1 फ़र॰ 20251 फ़रवरी, सुबह 11:382 फ़रवरी, सुबह 9:15विनायक चतुर्थीशनिशुक्ल · माघ
3 मार्च 20252 मार्च, रात 9:023 मार्च, शाम 6:02विनायक चतुर्थीसोमशुक्ल · फाल्गुन
1 अप्रैल 20251 अप्रैल, सुबह 5:422 अप्रैल, रात 2:32विनायक चतुर्थीमंगलशुक्ल · चैत्र
1 मई 202530 अप्रैल, दोपहर 2:121 मई, सुबह 11:24विनायक चतुर्थीगुरुशुक्ल · वैशाख
30 मई 202529 मई, रात 11:1830 मई, रात 9:23विनायक चतुर्थीशुक्रशुक्ल · ज्येष्ठ
28 जून 202528 जून, सुबह 9:5429 जून, सुबह 9:15विनायक चतुर्थीशनिशुक्ल · आषाढ़
28 जुल॰ 202527 जुलाई, रात 10:4228 जुलाई, रात 11:25विनायक चतुर्थीसोमशुक्ल · श्रावण
27 अग॰ 202526 अगस्त, दोपहर 1:5527 अगस्त, दोपहर 3:45विनायक चतुर्थीबुधशुक्ल · भाद्रपद
25 सित॰ 202525 सितंबर, सुबह 7:0626 सितंबर, सुबह 9:33विनायक चतुर्थीगुरुशुक्ल · आश्विन
25 अक्टू॰ 202525 अक्टूबर, रात 1:2026 अक्टूबर, रात 3:48विनायक चतुर्थीशनिशुक्ल · कार्तिक
24 नव॰ 202523 नवंबर, शाम 7:2524 नवंबर, रात 9:22विनायक चतुर्थीसोमशुक्ल · मार्गशीर्ष
24 दिस॰ 202523 दिसंबर, दोपहर 12:1324 दिसंबर, दोपहर 1:11विनायक चतुर्थीबुधशुक्ल · पौष

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।

विनायक चतुर्थी कब है — आगामी तिथियाँविनायक चतुर्थी 2026विनायक चतुर्थी 2027विनायक चतुर्थी 2028

विनायक चतुर्थी क्या है?

विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि को गणेश जी की मासिक पूजा है। विघ्नहर्ता गणेश की पूजा मध्याह्न में — उनके जन्म से जुड़े मुहूर्त में — दूर्वा, मोदक और नाम-जप से की जाती है। भक्त बुद्धि, सफलता और नए कार्यों से विघ्न हटाने हेतु यह व्रत रखते हैं।

विनायक बनाम संकष्टी

प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थियाँ होती हैं: शुक्ल (विनायक) और कृष्ण (संकष्टी)। दोनों की लय — शुक्ल पक्ष में मध्याह्न पूजा, कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय पूजा — मास के दोनों छोरों पर गणेश को स्थापित करती है। इस साइट पर दोनों की सूचियाँ गणना की गई हैं।

मध्याह्न पूजा

विनायक पूजा मध्याह्न काल में होती है, जो गणेश जन्म का पहर माना जाता है। पूजा के बाद प्रायः व्रत खोल दिया जाता है — संकष्टी की चंद्र-प्रतीक्षा से सरल विधि।

व्रत विधि

उपवास प्रातः से चलता है और मध्याह्न पूजा के बाद खोला जाता है। भक्त स्नान कर संकल्प लेते हैं और गणेश जी की पूजा दूर्वा से करते हैं — इक्कीस दल की परंपरा है — साथ में लाल पुष्प, मोदक और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। जहाँ ज्ञात हो वहाँ संकटनाशन गणेश स्तोत्र या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है। संकष्टी के विपरीत, जो चंद्रोदय के बाद खोली जाती है, विनायक चतुर्थी दिन के उजाले में ही पूर्ण होती है।

विनायक चतुर्थी सामग्री

मध्याह्न पूजा से पूर्व ये एकत्र करें:

  • गणेश जी की मूर्ति या चित्र
  • दूर्वा
  • लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल
  • नैवेद्य हेतु मोदक या लड्डू
  • सिंदूर और चंदन
  • घी का दीपक और धूप
  • नारियल और पान के पत्ते
  • अक्षत
  • पंचामृत
अन्य व्रत कैलेंडर
एकादशी 2025प्रदोष व्रत 2025अमावस्या 2025पूर्णिमा 2025संकष्टी चतुर्थी 2025मासिक शिवरात्रि 2025स्कन्द षष्ठी 2025मासिक दुर्गाष्टमी 2025कालाष्टमी 2025मासिक कार्तिगाई 2025भानु सप्तमी 2025

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2025 में कितनी विनायक चतुर्थी हैं?+

2025 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 13 विनायक चतुर्थी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की शुक्ल चतुर्थी को एक।

विनायक चतुर्थी संकष्टी से कैसे अलग है?+

दोनों गणेश जी की हैं, पर विनायक शुक्ल (बढ़ते) पक्ष की चतुर्थी है जिसकी पूजा मध्याह्न में होती है, जबकि संकष्टी कृष्ण पक्ष की है और व्रत चंद्रोदय के बाद ही खुलता है।

सबसे बड़ी विनायक चतुर्थी कौन-सी है?+

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी ही वार्षिक गणेश चतुर्थी है — दस दिवसीय उत्सव जो विसर्जन से पूर्ण होता है।

व्रत कैसे रखा जाता है?+

भक्त मध्याह्न गणेश पूजा तक उपवास रखते हैं, दूर्वा व मोदक अर्पित करते हैं और गणेश मंत्रों का जाप करते हैं। विधि परंपरा अनुसार भिन्न होती है।

विनायक चतुर्थी आपकी कुंडली के लिए क्या कहती है?

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