आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त — साथ ही पूरा व्रत कैलेंडर और पंचांग उपकरण। सभी गणनाएँ हमारे स्विस-एफ़ेमेरिस पंचांग इंजन से, नकल नहीं।
पंचांग (शाब्दिक अर्थ "पाँच अंग") पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है जो किसी दिन की गुणवत्ता आँकने के लिए प्रयोग होता है। इसके पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — सूर्य व चंद्र की सटीक स्थिति से गणना किए जाते हैं, इसलिए पंचांग प्रतिदिन बदलता है और नगर के अनुसार थोड़ा भिन्न होता है। लोग इससे तिथि जानते हैं, महत्वपूर्ण कार्य के लिए शुभ मुहूर्त चुनते हैं, और व्रत व त्योहार के दिन पहचानते हैं।
पाँच अंगों के अतिरिक्त, पंचांग प्रतिदिन विशेष काल भी बताता है। शुभ कालों में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 96–48 मिनट पूर्व, पूजा, ध्यान व अध्ययन हेतु उत्तम), मध्याह्न के निकट अभिजित मुहूर्त (जब कोई अन्य मुहूर्त न हो तब विकल्प), और अमृत काल (नए कार्य हेतु अमृततुल्य समय) आते हैं। महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए टालने योग्य काल हैं राहु काल (वार अनुसार प्रतिदिन बदलने वाला ~90 मिनट), यमगण्ड व गुलिक काल, तथा वर्ज्यम् और दुर्मुहूर्तम्। गण्डमूल और भद्रा (विष्टि करण) कुछ परंपराओं में अतिरिक्त सावधानियाँ हैं। ये सभी सूर्योदय, सूर्यास्त व तिथि से निकाले जाते हैं, इसलिए दिन-प्रतिदिन बदलते हैं और नगर अनुसार थोड़े भिन्न होते हैं।
पाँच अंगों के अतिरिक्त, वार, तिथि व नक्षत्र के कुछ संयोग विशेष योग बनाते हैं जो किसी दिन को असाधारण रूप से शुभ — या त्याज्य — बना देते हैं। जानने योग्य योग:
पाँच अंग सर्वत्र समान हैं, पर भारत उन्हें कई क्षेत्रीय कैलेंडरों से पढ़ता है। उत्तर भारत पूर्णिमांत मास (पूर्णिमा पर समाप्त) व विक्रम संवत का अनुसरण करता है; पश्चिम व दक्षिण अमांत मास (अमावस्या पर समाप्त) का। तमिल कैलेंडर सौर है — मास संक्रांति पर बदलते हैं — और उसकी दैनिक विधि में नल्ल नेरम व गौरी पंचांगम् जुड़ते हैं, जिन्हें हमारा गौरी टूल गणना करता है। बंगाली पंजिका व मलयालम कैलेंडर (कोल्लवर्षम्) भी सौर-आधारित हैं, जबकि तेलुगु-कन्नड़ नववर्ष उगादि चैत्र चंद्र-वर्ष का आरंभ है। तिथियाँ हर जगह समान हैं — केवल मास-नाम, नववर्ष दिवस व कुछ पालन-परंपराएँ भिन्न हैं, इसीलिए एक ही त्योहार विभिन्न क्षेत्रों में अलग मास-नामों से जुड़ता है।
पंचांग हिंदू ज्योतिष का दैनिक कैलेंडर है जिसके पाँच अंग हैं — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये सूर्य व चंद्र की सटीक स्थिति से गणना होते हैं, इसलिए पंचांग प्रतिदिन बदलता है और नगर के अनुसार थोड़ा भिन्न होता है।
तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्र का नक्षत्र), योग और करण — यही पाँच अंग "पंच-अंग" कहलाते हैं।
आज (मंगलवार, 29 सितंबर 2026) की तिथि नई दिल्ली के लिए Tritiya (Krishna) है। ऊपर आज का पंचांग स्नैपशॉट देखें।
राहु काल में नए शुभ कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण आरंभ टालना उत्तम माना जाता है; नित्य कार्य व पूजा-पाठ जारी रह सकते हैं।
ये चंद्र मास की सीमा तय करने के दो तरीके हैं। अमांत मास अमावस्या पर समाप्त होता है (पश्चिम व दक्षिण भारत), जबकि पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर (उत्तर भारत)। तिथियाँ समान रहती हैं — केवल मास का नाम बदलता है, इसीलिए एक ही त्योहार अलग मास-नाम में दिख सकता है।
हमारा पंचांग सूर्य व चंद्र की सटीक स्थिति (स्विस-एफ़ेमेरिस स्तर की खगोल गणना + लाहिरी अयनांश) से बनता है, नकल नहीं। चूँकि यह स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर है, राहु काल, चौघड़िया व मुहूर्त समय नगर अनुसार बदलते हैं — इसलिए सदैव अपने नगर का पंचांग देखें।
चौघड़िया दिन व रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है — अमृत, शुभ, लाभ व चर (शुभ) तथा रोग, काल व उद्वेग (त्याज्य)। जब औपचारिक मुहूर्त न हो, तब यात्रा, खरीदारी या छोटे कार्य हेतु शुभ चौघड़िया चुना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग 48 मिनट पहले समाप्त होने वाला ~48 मिनट का काल है (अर्थात ~96–48 मिनट पूर्व)। यह दिन का सर्वाधिक सात्विक समय माना जाता है — जागरण, ध्यान, पूजा व अध्ययन हेतु उत्तम। आज का सटीक ब्रह्म मुहूर्त ऊपर स्नैपशॉट में है।