अंगारकी चतुर्थी कब है
अन्य नाम: अंगारकी संकष्टी
अंगारकी चतुर्थी मंगलवार, 22 जून 2027 को है — तिथि 22 जून दोपहर 1:08 से 23 जून दोपहर 3:43 (नई दिल्ली)।
समय नई दिल्ली (IST) के लिए, लाहिड़ी अयनांश पर आधारित पंचांग इंजन से गणना।
मंगलवार, 22 जून 2027 को चंद्रोदय — व्रत कब खोलें
| नगर | चंद्रोदय (IST) |
|---|---|
| दिल्ली | 22 जून रात 9:56 |
| मुंबई | 22 जून रात 9:59 |
| पुणे | 22 जून रात 9:54 |
| बेंगलुरु | 22 जून रात 9:30 |
स्रोत: दिल्ली का चंद्रोदय हमारे पंचांग इंजन से बने व्रत डेटासेट से है (ऊपर के समय कार्ड जैसा); मुंबई, पुणे और बेंगलुरु का चंद्रोदय हर नगर के निर्देशांकों के लिए हमारे पंचांग API से। “—” का अर्थ है कि उस नगर का समय उपलब्ध नहीं हो सका। स्थानीय क्षितिज के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है।
अंगारकी चतुर्थी की सभी तिथियाँ
| तिथि | तिथि समय | चंद्रोदय | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|
| मंगलवार, 22 जून 2027अगली | 22 जून दोपहर 1:08 से 23 जून दोपहर 3:43 | 22 जून रात 9:56 | कृष्ण · आषाढ़ |
| मंगलवार, 8 अगस्त 2028 | 8 अगस्त रात 8:30 से 9 अगस्त रात 10:56 | 8 अगस्त रात 8:37 | कृष्ण · भाद्रपद |
| मंगलवार, 5 दिसंबर 2028 | 5 दिसंबर सुबह 6:04 से 6 दिसंबर सुबह 5:00 | 5 दिसंबर रात 8:39 | कृष्ण · पौष |
| मंगलवार, 29 सितंबर 2026 | 29 सितंबर शाम 5:10 से 30 सितंबर दोपहर 2:56 | 29 सितंबर शाम 7:44 | कृष्ण · आश्विन |
| मंगलवार, 5 मई 2026 | 5 मई सुबह 5:25 से 6 मई सुबह 7:52 | 5 मई रात 10:34 | कृष्ण · ज्येष्ठ |
| मंगलवार, 6 जनवरी 2026 | 6 जनवरी सुबह 8:02 से 7 जनवरी सुबह 6:53 | 6 जनवरी रात 8:59 | कृष्ण · माघ |
| मंगलवार, 12 अगस्त 2025 | 12 अगस्त सुबह 8:41 से 13 अगस्त सुबह 6:36 | 12 अगस्त रात 9:03 | कृष्ण · भाद्रपद |
अंगारकी चतुर्थी का महत्व
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार (अंगारक/मंगल का दिन) को पड़ती है तो वह अंगारकी चतुर्थी कहलाती है — सबसे प्रिय संकष्टी, जिसका फल अनेक संकष्टियों के बराबर माना जाता है। व्रत दिनभर रखा जाता है और चंद्रोदय के बाद चंद्र अर्घ्य व गणेश पूजा के साथ खोला जाता है।
अंगारकी संकष्टी व्रत विधि
परंपरा में इस दिन का क्रम सरल है। भक्त प्रातः स्नान करते हैं, गणेश जी की प्रतिमा के सामने संकल्प लेते हैं और दिनभर व्रत रखते हैं — कुछ लोग निर्जल, अधिकांश फल व दूध पर। सायंकाल गणेश पूजा होती है: लाल पुष्प, 21 दूर्वा, सिंदूर, दीपक, धूप और नैवेद्य में मोदक या लड्डू। संकष्टी व्रत कथा पढ़ी जाती है और अनेक लोग गणपति अथर्वशीर्ष या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करते हैं। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है — जल में थोड़ा दूध, अक्षत और पुष्प मिलाकर — और उसके बाद ही व्रत खोला जाता है। परिवारों की रीतियाँ विवरण में भिन्न होती हैं; चंद्रोदय का नियम सबमें समान है।
अंगारकी व्रत में क्या खाएँ
परंपरा से इस दिन अन्न, दालें और साधारण नमक नहीं लिए जाते। प्रायः फलाहार किया जाता है: साबूदाना खिचड़ी या वड़ा, फल, दूध व दही, भुनी मूँगफली, आलू या शकरकंद, और राजगिरा या सिंघाड़े का आटा — सेंधा नमक के साथ। जो कठोर व्रत रखते हैं, वे चंद्रोदय तक केवल जल लेते हैं या कुछ भी नहीं। व्रत चंद्रोदय और अर्घ्य के बाद खोला जाता है — पहले गणेश जी को अर्पित मोदक या लड्डू से, फिर हल्के सात्त्विक भोजन से। जो अस्वस्थ हों, गर्भवती हों, वृद्ध हों या दवा ले रहे हों, वे हल्का व्रत रखें या न रखें।
अंगारकी कितनी बार आती है?
एक वर्ष में बारह या तेरह संकष्टी चतुर्थी होती हैं — हर कृष्ण पक्ष में एक — और अंगारकी केवल वह है जो मंगलवार को पड़ जाए। यह वार का संयोग है, इसलिए गिनती हर वर्ष बदलती है। जिन वर्षों की गणना हमारे पंचांग इंजन ने की है (2025–2028): 2025: 1 (12 अगस्त) · 2026: 3 (6 जनवरी, 5 मई, 29 सितंबर) · 2027: 1 (22 जून) · 2028: 2 (8 अगस्त, 5 दिसंबर)। अर्थात किसी वर्ष में कम से कम 1 और अधिक से अधिक 3 — सबसे अधिक 2026 में। ऊपर की तालिका में हर तिथि दी गई है।
अंगारकी और विनायक चतुर्थी में अंतर
दोनों गणेश जी की चतुर्थी हैं, पर चंद्र मास के विपरीत पक्षों में आती हैं। संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि है, पूर्णिमा के बाद; इसका व्रत चंद्रोदय पर पूरा होता है, इसलिए चंद्रोदय का समय ही मुख्य है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि है, अमावस्या के बाद; इसकी पूजा मध्याह्न के आसपास होती है, और भाद्रपद की विनायक चतुर्थी — गणेश चतुर्थी — पर चंद्र दर्शन परंपरा से वर्जित माना जाता है। अंगारकी वह संकष्टी (कृष्ण पक्ष की चतुर्थी) है जो मंगलवार को पड़े।
मंगलवार ही क्यों — नाम की कथा
अंगारक मंगल ग्रह का एक नाम है, जो मंगलवार के स्वामी हैं। गणेश परंपरा में कही जाने वाली एक कथा के अनुसार पृथ्वी माता के पुत्र अंगारक ने दीर्घ काल तक गणेश जी की उपासना की, और गणेश जी ने वरदान दिया कि अंगारक के दिन पड़ने वाली संकष्टी उनके नाम से जानी जाएगी। परंपरा में इस संकष्टी को साधारण संकष्टी से अधिक महत्त्व दिया जाता है, और गणेश मंदिरों में — मुंबई का सिद्धिविनायक और महाराष्ट्र के अष्टविनायक इनमें प्रमुख हैं — भोर से देर रात तक लंबी कतारें लगती हैं।
यह कब पड़ती है
अंगारकी चतुर्थी मंगलवार को पड़ने वाली कोई भी संकष्टी चतुर्थी होती है। चंद्र मास सौर वर्ष से छोटा होता है, इसलिए ग्रेगोरियन तारीख़ हर वर्ष बदलती है — और वार का संयोग होने से किसी वर्ष यह एक से अधिक बार आ सकती है, तो किसी वर्ष एक बार भी नहीं। व्रत का दिन इस पर निर्भर करता है कि चंद्रोदय के समय कौन-सी तिथि चल रही है, इसलिए क्षेत्रीय पंचांगों में एक दिन का अंतर संभव है।
सामान्य प्रश्न
अंगारकी चतुर्थी कब है?
अंगारकी चतुर्थी मंगलवार, 22 जून 2027 को है — तिथि 22 जून दोपहर 1:08 से 23 जून दोपहर 3:43 (नई दिल्ली)। इसके बाद: मंगलवार, 8 अगस्त 2028; मंगलवार, 5 दिसंबर 2028।
अंगारकी चतुर्थी की तिथि कब से कब तक है?
22 जून 2027 की अंगारकी चतुर्थी के लिए तिथि 22 जून दोपहर 1:08 से 23 जून दोपहर 3:43 तक है; चंद्रोदय 22 जून रात 9:56 (IST, नई दिल्ली)।
अंगारकी चतुर्थी किसे कहते हैं?
अंगारकी चतुर्थी मंगलवार को पड़ने वाली कोई भी संकष्टी चतुर्थी को कहते हैं। जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार (अंगारक/मंगल का दिन) को पड़ती है तो वह अंगारकी चतुर्थी कहलाती है — सबसे प्रिय संकष्टी, जिसका फल अनेक संकष्टियों के बराबर माना जाता है। व्रत दिनभर रखा जाता है और चंद्रोदय के बाद चंद्र अर्घ्य व गणेश पूजा के साथ खोला जाता है।
अंगारकी संकष्टी व्रत की विधि क्या है?
प्रातः स्नान कर संकल्प लें, दिनभर व्रत रखें, सायंकाल दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक से गणेश पूजा करें, संकष्टी कथा पढ़ें, फिर चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। रीतियाँ परिवार अनुसार भिन्न होती हैं।
अंगारकी व्रत में क्या खा सकते हैं?
परंपरा से केवल फलाहार: साबूदाना खिचड़ी, फल, दूध, मूँगफली, आलू और सेंधा नमक के साथ राजगिरा या सिंघाड़े का आटा — अन्न, दालें और साधारण नमक नहीं। व्रत चंद्रोदय के बाद खोला जाता है, प्रायः गणेश जी को अर्पित मोदक या लड्डू से।
क्या अंगारकी चतुर्थी वर्ष में दो बार आ सकती है?
हाँ — यह इस पर निर्भर है कि कितनी संकष्टी मंगलवार को पड़ती हैं, इसलिए संख्या हर वर्ष बदलती है। 2025–2028 के लिए हमारे इंजन की तिथियाँ: 2025: 1 (12 अगस्त) · 2026: 3 (6 जनवरी, 5 मई, 29 सितंबर) · 2027: 1 (22 जून) · 2028: 2 (8 अगस्त, 5 दिसंबर)। अर्थात वर्ष में 1 से 3 तक।
अंगारकी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
अंगारकी वह संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष, पूर्णिमा के बाद) है जो मंगलवार को पड़े, और इसका व्रत चंद्रोदय पर पूरा होता है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, अमावस्या के बाद, जिसकी पूजा मध्याह्न में होती है।