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व्रत कैलेंडर

संकष्टी चतुर्थी कब है?

अगली संकष्टी चतुर्थी: शुक्रवार, 27 नवंबर 2026 (गणाधिप संकष्टी चतुर्थी) — तिथि 27 नवंबर सुबह 9:49 से 28 नवंबर सुबह 6:40 (नई दिल्ली)।

संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, गणेश को समर्पित, जब भक्त चंद्रोदय तक उपवास करते हैं। चंद्रोदय समय आवश्यक है — इसी पर व्रत खोला जाता है — जो नीचे दिल्ली के लिए दिया गया है। माघ की संकष्टी सकट चौथ है।

संकष्टी चतुर्थी की अगली तिथि
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी
21 दिन में · शुक्रवार, 27 नवंबर 2026 · चंद्रोदय 27 नवंबर, रात 8:17

आगामी 3 संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ

तिथिनामतिथि समयचंद्रोदय
शुक्रवार, 27 नवंबर 2026गणाधिप संकष्टी चतुर्थी27 नवंबर सुबह 9:49 से 28 नवंबर सुबह 6:4027 नवंबर, रात 8:17
शनिवार, 26 दिसंबर 2026आखुरथ संकष्टी चतुर्थी26 दिसंबर रात 8:05 से 27 दिसंबर शाम 5:1326 दिसंबर, रात 8:18
सोमवार, 25 जनवरी 2027सकट चौथ (लम्बोदर संकष्टी)25 जनवरी सुबह 8:11 से 26 जनवरी सुबह 6:0125 जनवरी, रात 9:16

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए।

माह व वर्ष कैलेंडर
विशेष संकष्टी चतुर्थी
अन्य व्रत
एकादशी कब हैप्रदोष व्रत कब हैअमावस्या कब हैपूर्णिमा कब हैमासिक शिवरात्रि कब हैविनायक चतुर्थी कब हैस्कन्द षष्ठी कब हैमासिक दुर्गाष्टमी कब हैकालाष्टमी कब हैमासिक कार्तिगाई कब हैभानु सप्तमी कब है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगली संकष्टी चतुर्थी कब है?+

अगली संकष्टी चतुर्थी गणाधिप संकष्टी चतुर्थी है — शुक्रवार, 27 नवंबर 2026, तिथि 27 नवंबर सुबह 9:49 से 28 नवंबर सुबह 6:40 (नई दिल्ली)। उसके बाद: शनिवार, 26 दिसंबर 2026; सोमवार, 25 जनवरी 2027।

2026 में कितनी संकष्टी चतुर्थी हैं?+

2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 13 संकष्टी चतुर्थी हैं — प्रत्येक चंद्र मास में एक।

चंद्रोदय समय क्यों महत्वपूर्ण है?+

संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है, इसलिए चंद्रोदय समय तय करता है कि आप कब भोजन कर सकते हैं। नीचे प्रत्येक तिथि का दिल्ली चंद्रोदय दिया है।

सकट चौथ क्या है?+

माघ मास की संकष्टी चतुर्थी सकट चौथ (या लंबोदर संकष्टी) कहलाती है, जिसे माताएँ अपने बच्चों के कल्याण के लिए विशेष रूप से रखती हैं।

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी क्या है?+

जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है तो वह अंगारकी चतुर्थी कहलाती है, गणेश पूजा हेतु विशेष प्रभावी मानी जाती है — एक अंगारकी को अनेक का फल कहा जाता है। यह वर्ष में एक-दो बार ही आती है।

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