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व्रत कैलेंडर

एकादशी कब है?

अगली एकादशी: शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 (प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी) — तिथि 20 नवंबर सुबह 7:16 से 21 नवंबर सुबह 6:32 (नई दिल्ली)।

एकादशी प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — विष्णु को समर्पित उपवास का दिन, माह में दो बार। नीचे वर्ष की हर एकादशी तिथि समय तथा अगले दिन (द्वादशी) के पारण समय के साथ दी गई है, जो दिल्ली के लिए वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना की गई है — नकल नहीं।

एकादशी की अगली तिथि
प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी
13 दिन में · शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 · पारण 21 नवंबर दोपहर 1:12–21 नवंबर दोपहर 3:19

आगामी 3 एकादशी तिथियाँ

तिथिनामतिथि समयपारण (व्रत तोड़ना)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी20 नवंबर सुबह 7:16 से 21 नवंबर सुबह 6:3221 नवंबर दोपहर 1:12–21 नवंबर दोपहर 3:19
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026उत्पन्ना एकादशी3 दिसंबर रात 11:04 से 4 दिसंबर रात 11:455 दिसंबर सुबह 7:00–5 दिसंबर सुबह 9:05
रविवार, 20 दिसंबर 2026मोक्षदा एकादशी19 दिसंबर रात 10:10 से 20 दिसंबर रात 8:1521 दिसंबर सुबह 7:10–21 दिसंबर सुबह 9:14

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए।

माह व वर्ष कैलेंडर
नाम से एकादशी
अजा एकादशीआमलकी एकादशीअपरा एकादशीइंदिरा एकादशीजया एकादशीकामदा एकादशीकामिका एकादशीमोहिनी एकादशीमोक्षदा एकादशीनिर्जला एकादशीपद्मिनी एकादशीपापांकुशा एकादशीपापमोचनी एकादशीपरमा एकादशीपरिवर्तिनी एकादशीपौष पुत्रदा एकादशीरमा एकादशीसफला एकादशीषटतिला एकादशीश्रावण पुत्रदा एकादशीउत्पन्ना एकादशीवरूथिनी एकादशीविजया एकादशीयोगिनी एकादशीदेवशयनी एकादशीप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी
अन्य व्रत
प्रदोष व्रत कब हैअमावस्या कब हैपूर्णिमा कब हैसंकष्टी चतुर्थी कब हैमासिक शिवरात्रि कब हैविनायक चतुर्थी कब हैस्कन्द षष्ठी कब हैमासिक दुर्गाष्टमी कब हैकालाष्टमी कब हैमासिक कार्तिगाई कब हैभानु सप्तमी कब है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगली एकादशी कब है?+

अगली एकादशी प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी है — शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, तिथि 20 नवंबर सुबह 7:16 से 21 नवंबर सुबह 6:32 (नई दिल्ली)। उसके बाद: शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026; रविवार, 20 दिसंबर 2026।

2026 में कितनी एकादशी हैं?+

2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 24 एकादशी व्रत हैं — अधिकांश माह में दो (शुक्ल और कृष्ण पक्ष)। अधिक मास होने पर पद्मिनी और परमा जैसी अतिरिक्त एकादशियाँ जुड़ती हैं।

पारण समय क्या है?+

पारण अगली सुबह (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, दिन के प्रथम पंचमांश में और द्वादशी समाप्त होने से पहले किया जाता है — तथा हरि वासर में कभी नहीं। नीचे प्रत्येक तिथि का सटीक पारण समय दिया है।

सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?+

निर्जला एकादशी (बिना जल के) तथा देवशयनी व प्रबोधिनी (जो चातुर्मास आरंभ और समाप्त करती हैं) सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, पर हर एकादशी का अपना फल है।

एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?+

परंपरागत रूप से अनाज (चावल, गेहूँ) और दालें वर्जित हैं। सामान्यतः फल, दूध व दुग्ध-उत्पाद, आलू व अन्य कंद, साबूदाना, मेवे और सेंधा नमक ग्रहण किए जाते हैं। कठोरता व्यक्तिगत चुनाव है — निर्जला से लेकर एक फलाहार तक।

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