Astrologger
ENहिंदी
AI से पूछें
व्रत कैलेंडर

प्रदोष व्रत कब है?

अगला प्रदोष व्रत: रविवार, 22 नवंबर 2026 (रवि प्रदोष) — तिथि 22 नवंबर सुबह 4:57 से 23 नवंबर रात 2:37 (नई दिल्ली)।

प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को होता है और भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी पूजा संध्या के प्रदोष काल में की जाती है। व्रत का नाम वार पर आधारित है — शनि प्रदोष (शनिवार) और सोम प्रदोष (सोमवार) सर्वाधिक प्रिय हैं। नीचे समय दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

प्रदोष व्रत की अगली तिथि
रवि प्रदोष
15 दिन में · रविवार, 22 नवंबर 2026 · प्रदोष काल 22 नवंबर, शाम 5:26 – 22 नवंबर, रात 8:07

आगामी 3 प्रदोष व्रत तिथियाँ

तिथिनामतिथि समयप्रदोष पूजा (काल)
रविवार, 22 नवंबर 2026रवि प्रदोष22 नवंबर सुबह 4:57 से 23 नवंबर रात 2:3722 नवंबर, शाम 5:26 – 22 नवंबर, रात 8:07
रविवार, 6 दिसंबर 2026रवि प्रदोष6 दिसंबर रात 12:52 से 7 दिसंबर रात 2:226 दिसंबर, शाम 5:25 – 6 दिसंबर, रात 8:08
सोमवार, 21 दिसंबर 2026सोम प्रदोष21 दिसंबर शाम 5:37 से 22 दिसंबर दोपहर 2:2421 दिसंबर, शाम 5:37 – 21 दिसंबर, रात 8:14

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए।

माह व वर्ष कैलेंडर
अन्य व्रत
एकादशी कब हैअमावस्या कब हैपूर्णिमा कब हैसंकष्टी चतुर्थी कब हैमासिक शिवरात्रि कब हैविनायक चतुर्थी कब हैस्कन्द षष्ठी कब हैमासिक दुर्गाष्टमी कब हैकालाष्टमी कब हैमासिक कार्तिगाई कब हैभानु सप्तमी कब है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगला प्रदोष व्रत कब है?+

अगला प्रदोष व्रत रवि प्रदोष है — रविवार, 22 नवंबर 2026, तिथि 22 नवंबर सुबह 4:57 से 23 नवंबर रात 2:37 (नई दिल्ली)। उसके बाद: रविवार, 6 दिसंबर 2026; सोमवार, 21 दिसंबर 2026।

2026 में कितने प्रदोष व्रत हैं?+

2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 25 प्रदोष व्रत हैं — प्रायः प्रति माह दो, प्रत्येक पक्ष में एक।

प्रदोष काल क्या है?+

प्रदोष काल सूर्यास्त के आस-पास लगभग ढाई घंटे की अवधि है (सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक) जब त्रयोदशी को शिव पूजा की जाती है। प्रत्येक तिथि के साथ उसका प्रदोष काल दिया है।

शनि प्रदोष क्यों विशेष है?+

शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि-दोष से राहत के लिए विशेष प्रभावी माना जाता है; सोम प्रदोष (सोमवार) मनोकामना और विवाह के लिए शुभ है।

प्रदोष व्रत कैसे करें?+

भक्त दिनभर व्रत रखते हैं, संध्या से पूर्व स्नान कर प्रदोष काल में शिव पूजा करते हैं — जल, बेलपत्र व दीप अर्पित कर प्रदोष व्रत कथा सुनते हैं। विधि परिवार अनुसार भिन्न होती है; महत्व भक्ति में माना जाता है, कठोरता में नहीं।

एआई ज्योतिषी से पूछें