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शुभ मुहूर्त · अगले 12 महीने

संपत्ति / भूमि मुहूर्त: आगामी शुभ तिथियाँ

2026 की तिथियाँ देखें →2027 की तिथियाँ देखें →अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत करें ↓

अगला संपत्ति / भूमि मुहूर्त:

शनिवार, 7 नवंबर 2026 (चित्रा) · आज

हमारी सूची में प्रतिपदा शामिल नहीं, जिसे कुछ पंचांग स्वीकार करते हैं, और अन्य सूचियाँ वार व नक्षत्र के भिन्न नियम रखती हैं, इसलिए इसमें कुछ तिथियाँ छूट भी सकती हैं और अतिरिक्त भी हो सकती हैं। सटीक समय अपने कुल-पुरोहित से सुनिश्चित करें। हमारी तिथियाँ भिन्न क्यों हैं →

नीचे की प्रत्येक तिथि पर संपत्ति खरीदने या उसके पंजीकरण के लिए उपयुक्त नक्षत्र है (सूर्योदय पर या उसी दिन बाद में आरंभ होने वाला), और सूर्योदय की तिथि वर्जित नहीं है; कोई तिथि मंगलवार को नहीं पड़ती। सूची अधिक मास को छोड़ती है। गुरु–शुक्र अस्त की जाँच केवल विवाह की सूची में होती है, इस सूची में नहीं। अपनी कुंडली के लिए नीचे व्यक्तिगत करें।

155
अगले 12 महीनों में शुभ दिन

अगले 12 महीनों में संपत्ति / भूमि की 155 शुभ मुहूर्त तिथियाँ हैं। सबसे अधिक जनवरी 2027 में (16 दिन)।

नवंबर 2026 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (10 तिथियाँ)

शनि, 7 नव॰
चित्रा · कृष्ण पक्ष
बुध, 11 नव॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
रवि, 15 नव॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
सोम, 16 नव॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
शनि, 21 नव॰
रेवती · शुक्ल पक्ष
रवि, 22 नव॰
अश्विनी · शुक्ल पक्ष
गुरु, 26 नव॰
मृगशिरा · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 27 नव॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
शनि, 28 नव॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
रवि, 29 नव॰
पुष्य · कृष्ण पक्ष

दिसंबर 2026 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (13 तिथियाँ)

गुरु, 3 दिस॰
हस्त · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 4 दिस॰
हस्त · कृष्ण पक्ष
शनि, 5 दिस॰
चित्रा · कृष्ण पक्ष
रवि, 6 दिस॰
स्वाती · कृष्ण पक्ष
शनि, 12 दिस॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
सोम, 14 दिस॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
बुध, 16 दिस॰
शतभिषा · शुक्ल पक्ष
शनि, 19 दिस॰
रेवती · शुक्ल पक्ष
रवि, 20 दिस॰
अश्विनी · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 25 दिस॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
शनि, 26 दिस॰
पुष्य · कृष्ण पक्ष
बुध, 30 दिस॰
हस्त · कृष्ण पक्ष
गुरु, 31 दिस॰
हस्त · कृष्ण पक्ष

जनवरी 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (16 तिथियाँ)

शनि, 2 जन॰
स्वाती · कृष्ण पक्ष
रवि, 3 जन॰
अनुराधा · कृष्ण पक्ष
सोम, 4 जन॰
अनुराधा · कृष्ण पक्ष
शनि, 9 जन॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
रवि, 10 जन॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
सोम, 11 जन॰
धनिष्ठा · शुक्ल पक्ष
गुरु, 14 जन॰
रेवती · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 15 जन॰
रेवती · शुक्ल पक्ष
शनि, 16 जन॰
अश्विनी · शुक्ल पक्ष
सोम, 18 जन॰
रोहिणी · शुक्ल पक्ष
बुध, 20 जन॰
मृगशिरा · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 22 जन॰
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
बुध, 27 जन॰
हस्त · कृष्ण पक्ष
गुरु, 28 जन॰
चित्रा · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 29 जन॰
स्वाती · कृष्ण पक्ष
रवि, 31 जन॰
अनुराधा · कृष्ण पक्ष

फ़रवरी 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (11 तिथियाँ)

सोम, 8 फ़र॰
शतभिषा · शुक्ल पक्ष
गुरु, 11 फ़र॰
रेवती · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 12 फ़र॰
अश्विनी · शुक्ल पक्ष
रवि, 14 फ़र॰
रोहिणी · शुक्ल पक्ष
बुध, 17 फ़र॰
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
गुरु, 18 फ़र॰
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 19 फ़र॰
पुष्य · शुक्ल पक्ष
गुरु, 25 फ़र॰
चित्रा · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 26 फ़र॰
स्वाती · कृष्ण पक्ष
शनि, 27 फ़र॰
अनुराधा · कृष्ण पक्ष
रवि, 28 फ़र॰
अनुराधा · कृष्ण पक्ष

मार्च 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (12 तिथियाँ)

गुरु, 4 मार्च
श्रवण · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 5 मार्च
श्रवण · कृष्ण पक्ष
शनि, 6 मार्च
धनिष्ठा · कृष्ण पक्ष
बुध, 10 मार्च
रेवती · शुक्ल पक्ष
गुरु, 11 मार्च
रेवती · शुक्ल पक्ष
रवि, 14 मार्च
रोहिणी · शुक्ल पक्ष
सोम, 15 मार्च
रोहिणी · शुक्ल पक्ष
गुरु, 18 मार्च
पुष्य · शुक्ल पक्ष
सोम, 22 मार्च
हस्त · शुक्ल पक्ष
बुध, 24 मार्च
चित्रा · कृष्ण पक्ष
गुरु, 25 मार्च
स्वाती · कृष्ण पक्ष
शनि, 27 मार्च
अनुराधा · कृष्ण पक्ष

अप्रैल 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (13 तिथियाँ)

गुरु, 1 अप्रैल
श्रवण · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 2 अप्रैल
श्रवण · कृष्ण पक्ष
शनि, 3 अप्रैल
धनिष्ठा · कृष्ण पक्ष
रवि, 4 अप्रैल
शतभिषा · कृष्ण पक्ष
गुरु, 8 अप्रैल
अश्विनी · शुक्ल पक्ष
रवि, 11 अप्रैल
रोहिणी · शुक्ल पक्ष
सोम, 12 अप्रैल
मृगशिरा · शुक्ल पक्ष
बुध, 14 अप्रैल
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
सोम, 19 अप्रैल
हस्त · शुक्ल पक्ष
गुरु, 22 अप्रैल
अनुराधा · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 23 अप्रैल
अनुराधा · कृष्ण पक्ष
बुध, 28 अप्रैल
श्रवण · कृष्ण पक्ष
गुरु, 29 अप्रैल
श्रवण · कृष्ण पक्ष

मई 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (13 तिथियाँ)

शनि, 1 मई
शतभिषा · कृष्ण पक्ष
सोम, 3 मई
रेवती · कृष्ण पक्ष
शनि, 8 मई
रोहिणी · शुक्ल पक्ष
रवि, 9 मई
मृगशिरा · शुक्ल पक्ष
बुध, 12 मई
पुष्य · शुक्ल पक्ष
रवि, 16 मई
हस्त · शुक्ल पक्ष
सोम, 17 मई
हस्त · शुक्ल पक्ष
गुरु, 20 मई
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
बुध, 26 मई
श्रवण · कृष्ण पक्ष
गुरु, 27 मई
धनिष्ठा · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 28 मई
धनिष्ठा · कृष्ण पक्ष
शनि, 29 मई
शतभिषा · कृष्ण पक्ष
सोम, 31 मई
रेवती · कृष्ण पक्ष

जून 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (10 तिथियाँ)

बुध, 2 जून
अश्विनी · कृष्ण पक्ष
रवि, 6 जून
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
सोम, 7 जून
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
रवि, 13 जून
हस्त · शुक्ल पक्ष
सोम, 14 जून
चित्रा · शुक्ल पक्ष
बुध, 16 जून
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
सोम, 21 जून
श्रवण · कृष्ण पक्ष
गुरु, 24 जून
धनिष्ठा · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 25 जून
शतभिषा · कृष्ण पक्ष
रवि, 27 जून
रेवती · कृष्ण पक्ष

जुलाई 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (14 तिथियाँ)

गुरु, 1 जुल॰
रोहिणी · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 2 जुल॰
रोहिणी · कृष्ण पक्ष
सोम, 5 जुल॰
पुनर्वसु · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 9 जुल॰
हस्त · शुक्ल पक्ष
शनि, 10 जुल॰
हस्त · शुक्ल पक्ष
रवि, 11 जुल॰
चित्रा · शुक्ल पक्ष
बुध, 14 जुल॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
बुध, 21 जुल॰
धनिष्ठा · कृष्ण पक्ष
शनि, 24 जुल॰
रेवती · कृष्ण पक्ष
रवि, 25 जुल॰
रेवती · कृष्ण पक्ष
सोम, 26 जुल॰
अश्विनी · कृष्ण पक्ष
गुरु, 29 जुल॰
रोहिणी · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 30 जुल॰
मृगशिरा · कृष्ण पक्ष
शनि, 31 जुल॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष

अगस्त 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (12 तिथियाँ)

शुक्र, 6 अग॰
हस्त · शुक्ल पक्ष
शनि, 7 अग॰
हस्त · शुक्ल पक्ष
रवि, 8 अग॰
चित्रा · शुक्ल पक्ष
सोम, 9 अग॰
स्वाती · शुक्ल पक्ष
बुध, 11 अग॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
रवि, 15 अग॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
रवि, 22 अग॰
रेवती · कृष्ण पक्ष
सोम, 23 अग॰
अश्विनी · कृष्ण पक्ष
बुध, 25 अग॰
रोहिणी · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 27 अग॰
मृगशिरा · कृष्ण पक्ष
शनि, 28 अग॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
रवि, 29 अग॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष

सितंबर 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (15 तिथियाँ)

गुरु, 2 सित॰
हस्त · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 3 सित॰
हस्त · शुक्ल पक्ष
रवि, 5 सित॰
स्वाती · शुक्ल पक्ष
सोम, 6 सित॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
शनि, 11 सित॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
रवि, 12 सित॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
सोम, 13 सित॰
धनिष्ठा · शुक्ल पक्ष
बुध, 15 सित॰
शतभिषा · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 17 सित॰
रेवती · कृष्ण पक्ष
शनि, 18 सित॰
रेवती · कृष्ण पक्ष
रवि, 19 सित॰
अश्विनी · कृष्ण पक्ष
बुध, 22 सित॰
रोहिणी · कृष्ण पक्ष
गुरु, 23 सित॰
मृगशिरा · कृष्ण पक्ष
शनि, 25 सित॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
रवि, 26 सित॰
पुष्य · कृष्ण पक्ष

अक्टूबर 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (13 तिथियाँ)

शुक्र, 1 अक्टू॰
चित्रा · शुक्ल पक्ष
शनि, 2 अक्टू॰
स्वाती · शुक्ल पक्ष
सोम, 4 अक्टू॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
रवि, 10 अक्टू॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
सोम, 11 अक्टू॰
धनिष्ठा · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 15 अक्टू॰
रेवती · शुक्ल पक्ष
सोम, 18 अक्टू॰
रोहिणी · कृष्ण पक्ष
बुध, 20 अक्टू॰
मृगशिरा · कृष्ण पक्ष
गुरु, 21 अक्टू॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
शुक्र, 22 अक्टू॰
पुनर्वसु · कृष्ण पक्ष
शनि, 23 अक्टू॰
पुष्य · कृष्ण पक्ष
बुध, 27 अक्टू॰
हस्त · कृष्ण पक्ष
रवि, 31 अक्टू॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष

नवंबर 2027 संपत्ति / भूमि मुहूर्त (3 तिथियाँ)

सोम, 1 नव॰
अनुराधा · शुक्ल पक्ष
शुक्र, 5 नव॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष
शनि, 6 नव॰
श्रवण · शुक्ल पक्ष

व्यक्तिगत करें

इनमें से कौन-सी तिथियाँ आपकी कुंडली के अनुकूल हैं?

हम सूची को उन तिथियों तक सीमित करते हैं जिनमें आपके जन्म-चंद्र से मज़बूत चंद्र बल और अनुकूल तारा हो। आपके जन्म-विवरण केवल इस गणना के लिए उपयोग होते हैं, संग्रहीत नहीं।

संपत्ति / भूमि की तिथि कैसे चुनी जाती है

ऊपर दी गई प्रत्येक तिथि को सूची में आने से पहले चार स्वतंत्र कसौटियों पर खरा उतरना पड़ा। कोई दिन तभी सूचीबद्ध होता है जब चारों उत्तीर्ण हों — इसीलिए कुछ महीनों में दर्जनों तिथियाँ होती हैं और कुछ में एक भी नहीं। ये कसौटियाँ हैं: चंद्रमा का नक्षत्र, तिथि, वार, और यह कि वह दिन उस काल में न पड़े जब परंपरा संपत्ति खरीदने या उसके पंजीकरण को स्थगित रखती है।

कौन-से नक्षत्र उपयुक्त माने जाते हैं

चंद्रमा एक चंद्रमास में 27 नक्षत्रों से गुज़रता है, और शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथ इनमें से कुछ ही को संपत्ति खरीदने या उसके पंजीकरण के लिए उपयुक्त मानते हैं। ऊपर की सूची इन 13 को स्वीकार करती है:

अश्विनी · रोहिणी · मृगशिरा · पुनर्वसु · पुष्य · हस्त · चित्रा · स्वाती · अनुराधा · श्रवण · धनिष्ठा · शतभिषा · रेवती

कोई तिथि तब उपयुक्त होती है जब सूचीबद्ध नक्षत्र उस दिन किसी भी समय उपस्थित हो — केवल सूर्योदय पर नहीं। चंद्रमा लगभग प्रतिदिन नक्षत्र बदलता है, और वह समय सुविधाजनक नहीं होता; इसलिए प्रत्येक तिथि के सामने दिखाया गया नक्षत्र वही है जिसने वास्तव में नियम पूरा किया — कभी-कभी वह जो चंद्रमा उस दिन बाद में प्रवेश करता है, सूर्योदय वाला नहीं।

कौन-सी तिथियाँ छोड़ दी जाती हैं

तीन प्रकार की तिथियाँ नक्षत्र कितना भी शुभ हो, फिर भी छोड़ दी जाती हैं। रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी — परंपरा में "रिक्त" मानी जाती हैं और नए आरंभ के बजाय रख-रखाव के लिए रखी जाती हैं। अमावस्या छोड़ी जाती है। प्रतिपदा, प्रत्येक पक्ष का प्रथम दिन, भी छोड़ा जाता है। गणना में वही तिथि मानी जाती है जो सूर्योदय के समय हो।

वर्जित वार

मंगलवार संपत्ति खरीदने या उसके पंजीकरण के लिए वर्जित है। मंगलवार मंगल का वार है — तीव्र और उतावला, जो स्थिरता वाले संस्कार के विपरीत माना जाता है।

जिन महीनों में कोई तिथि नहीं होती

जब किसी महीने में शून्य तिथियाँ दिखें, तो कारण लगभग कभी नक्षत्र नहीं होता। कारण यह होता है कि पूरा महीना इन कालों में से किसी एक में पड़ता है:

  • अधिक मास — लगभग प्रत्येक तीन वर्ष में जोड़ा जाने वाला अधिक चंद्रमास, जो चंद्र और सौर पंचांग को मिलाए रखता है। इसमें कोई शुभ आरंभ नहीं रखा जाता।

आपकी कुंडली सूची को छोटा क्यों करती है

ऊपर का सब कुछ केवल पंचांग से गणना किया गया है — इसीलिए यह सूची सबके लिए एक ही है। पारंपरिक ज्योतिषी इसे व्यक्ति के अनुसार छाँटते हैं: चंद्र बल देखता है कि गोचर का चंद्रमा आपके जन्म चंद्रमा से किस भाव में है, और तारा बल आपके जन्म नक्षत्र से गिनती करके देखता है कि वह सहायक वर्ग में पड़ता है या नहीं। सूची के ऊपर दिया गया फ़ॉर्म दोनों लागू करता है और केवल वे तिथियाँ रखता है जिन पर दोनों अनुकूल हों, इसलिए सूची प्रायः काफ़ी छोटी हो जाती है।

जब आपकी आवश्यकता के समय कोई तिथि न हो

यह सामान्य स्थिति है, अपवाद नहीं — कब्ज़े की तारीख़, नोटिस अवधि और परिवार की उपलब्धता बहुत कम ही चातुर्मास-मुक्त महीनों की सूचीबद्ध नक्षत्र वाली तिथि पर आती है। परंपरा में इसका उत्तर है: अबूझ मुहूर्त — कुछ ऐसे दिन जो इतने शुभ माने जाते हैं कि उनके लिए गणना की आवश्यकता नहीं। अक्षय तृतीया, वसंत पंचमी, भड़ली नवमी, देव उठनी एकादशी और फुलेरा दूज सबसे प्रसिद्ध हैं, और इन पर उन महीनों में भी कार्य आरंभ किए जाते हैं जो अन्यथा बंद रहते हैं।

इस वर्ष इनमें से कौन-से पड़ते हैं, देखें मुहूर्त अवलोकन पर, अन्य कार्यों के साथ।

छपे हुए पंचांग से मिलान

क्षेत्रीय और छपे पंचांग संपत्ति खरीदने या उसके पंजीकरण के लिए वार, तिथि और नक्षत्र के भिन्न नियम रखते हैं; उदाहरण के लिए हम प्रतिपदा छोड़ते हैं, जिसे कुछ सूचियाँ स्वीकार करती हैं। इसलिए छपी सूची में ऐसी तिथियाँ हो सकती हैं जो हमारी सूची में नहीं, और हो सकता है कि उसमें कुछ ऐसी तिथियाँ न हों जो यहाँ दी गई हैं।

सूची में किसी तिथि का अर्थ है कि उस दिन उपयुक्त नक्षत्र और तिथि आते हैं, आवश्यक नहीं कि पूरे दिन। यह पृष्ठ समय-खंड की गणना नहीं करता, इसलिए सटीक समय अपने कुल-पुरोहित से सुनिश्चित करें।

दो और चेतावनियाँ। ये तिथियाँ नई दिल्ली के लिए गणना की गई हैं, और भारत भर में सूर्योदय नक्षत्र व तिथि की सीमाओं को लगभग एक घंटे तक खिसका देता है — संक्रमण की कगार पर पड़ी तिथि चेन्नई या गुवाहाटी के लिए भिन्न हो सकती है। और ऊपर के वर्जित काल पूर्णिमांत गणना तथा दृक्-पंचांग परंपरा का अनुसरण करते हैं; कुछ क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ भिन्न सूची रखती हैं, विशेषतः रिक्ता तिथियों और मघा के विषय में। जहाँ आपके कुल-पुरोहित इस पृष्ठ से असहमत हों, वहाँ पुरोहित का अनुसरण कीजिए।

मुहूर्त किसी कार्य के आरंभ का समय चुनने की पारंपरिक पद्धति है। यह पंचांग से की गई एक श्रेणीबद्धता है, भविष्यवाणी नहीं — इस पृष्ठ की कोई तिथि किसी परिणाम का कारण होने का दावा नहीं करती, और यहाँ कुछ भी ख़रीदने की आवश्यकता नहीं है।
अपना संपत्ति / भूमि मुहूर्त सुनिश्चित करें

एआई ज्योतिषी से पूछें कि इनमें से कौन-सी तिथियाँ आपकी कुंडली के अनुकूल हैं (पहले 3 मिनट नि:शुल्क)।

एआई ज्योतिषी से नि:शुल्क पूछें →

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगले 12 महीनों में संपत्ति / भूमि के लिए कितने शुभ मुहूर्त हैं?

अगले 12 महीनों में संपत्ति / भूमि के लिए 155 शुभ मुहूर्त तिथियाँ हैं, जो शास्त्रीय पंचांग नियमों से नई दिल्ली के लिए गणना की गई हैं। जनवरी 2027 में सबसे अधिक — 16।

अगले 12 महीनों में संपत्ति / भूमि मुहूर्त किन महीनों में नहीं है?

अगले 12 महीनों के हर माह में कम-से-कम एक शुभ तिथि है।

जब मेरी आवश्यकता के समय कोई संपत्ति / भूमि मुहूर्त न हो तो क्या करें?

यह सामान्य स्थिति है, अपवाद नहीं। परंपरा में अबूझ मुहूर्त मान्य हैं — वे दिन जो बिना गणना शुभ माने जाते हैं, जैसे अक्षय तृतीया, वसंत पंचमी, भड़ली नवमी, देव उठनी एकादशी और फुलेरा दूज — इन पर बंद महीनों में भी कार्य आरंभ किए जाते हैं।

यह सूची मेरे कुल-पंचांग से भिन्न क्यों है?

तीन सामान्य कारण। क्षेत्रीय और छपे पंचांग संपत्ति खरीदने या उसके पंजीकरण के लिए वार, तिथि और नक्षत्र के भिन्न नियम रखते हैं; उदाहरण के लिए हम प्रतिपदा छोड़ते हैं, जिसे कुछ सूचियाँ स्वीकार करती हैं। इसलिए छपी सूची में ऐसी तिथियाँ हो सकती हैं जो हमारी सूची में नहीं, और हो सकता है कि उसमें कुछ ऐसी तिथियाँ न हों जो यहाँ दी गई हैं। ये तिथियाँ नई दिल्ली के लिए गणना की गई हैं, और भारत भर में सूर्योदय नक्षत्र व तिथि की सीमाओं को लगभग एक घंटे तक खिसकाता है। और क्षेत्रीय परंपराएँ कुछ भिन्न सूची रखती हैं, विशेषतः रिक्ता तिथियों में। जहाँ कुल-पुरोहित भिन्न कहें, वहाँ उनका अनुसरण कीजिए।

दिखाया गया नक्षत्र पूरे दिन रहना आवश्यक है?

नहीं। सूची में आने का अर्थ है कि उस दिन उपयुक्त नक्षत्र और तिथि आते हैं, पूरे दिन नहीं भी। प्रत्येक तिथि के सामने दिया नक्षत्र वही है जिसने वास्तव में नियम पूरा किया — कभी-कभी वह जो चंद्रमा उस दिन बाद में प्रवेश करता है। सटीक समय अपने कुल-पुरोहित से सुनिश्चित करें।