षटतिला एकादशी गुरुवार, 4 मार्च 2027 को है — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन मास। यह तिल के छह पारंपरिक उपयोगों के नाम पर, जिनसे इस व्रत का स्वरूप बनता है।
समय नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश पर आधारित पंचांग इंजन से गणना।
| वर्ष | तिथि | पक्ष | तिथि समय | पारण |
|---|---|---|---|---|
| 2025 | सोमवार, 24 फ़रवरी 2025 | कृष्ण पक्ष | 23 Feb, 1:56 PM → 24 Feb, 1:45 PM | 25 Feb, 6:52 AM – 25 Feb, 9:9 AM |
| 2026 | शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 | कृष्ण पक्ष | 12 Feb, 12:22 PM → 13 Feb, 2:26 PM | 14 Feb, 7:2 AM – 14 Feb, 9:15 AM |
| 2027 | गुरुवार, 4 मार्च 2027 | कृष्ण पक्ष | 3 Mar, 4:45 AM → 4 Mar, 7:25 AM | 5 Mar, 6:44 AM – 5 Mar, 9:4 AM |
षटतिला एकादशी हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। चंद्र मास सौर कैलेंडर से छोटा होता है, इसलिए ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है — ऊपर दी गई तालिका में 2025, 2026, 2027 की तिथियाँ देखें। तिथि सूर्योदय के समय जो चल रही हो, उसी के अनुसार व्रत का दिन तय होता है।
एकादशी व्रत सूर्योदय से आरंभ होकर अगले दिन द्वादशी को पारण के साथ पूर्ण होता है। पारण सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करने का विधान है — षटतिला एकादशी के लिए यह समय ऊपर दिया गया है। व्रत का स्वरूप (निर्जल, फलाहार या सात्विक भोजन) परंपरा और सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
षटतिला एकादशी गुरुवार, 4 मार्च 2027 (कृष्ण पक्ष, फाल्गुन मास) को है। तिथि 3 Mar, 4:45 AM से 4 Mar, 7:25 AM तक रहती है।
पारण शुक्रवार, 5 मार्च 2027 को 5 Mar, 6:44 AM से 5 Mar, 9:4 AM के बीच करना चाहिए। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करने का विधान है।
षटतिला एकादशी तिल के छह पारंपरिक उपयोगों के नाम पर, जिनसे इस व्रत का स्वरूप बनता है।