तिथि कैलेंडर — सभी 16 तिथियाँ और अगली तारीख़ें
हर पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं — 14 साझा नाम और पूर्णिमा व अमावस्या मिलाकर 16 नाम, और माह में 30 तिथियाँ। तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है, इसलिए यह घड़ी से नहीं चलती: एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है और दिन या रात के किसी भी समय आरंभ हो सकती है।
इसलिए पंचांग हर नागरिक दिन को उस तिथि के नाम से जानता है जो सूर्योदय के समय चल रही हो — उदया तिथि। इस नियम के दो परिणाम हैं। जब कोई छोटी तिथि एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए, तो उसमें कोई सूर्योदय नहीं पड़ता और वह दिनों की गिनती से छूट जाती है: क्षय तिथि। जब कोई लंबी तिथि दो सूर्योदयों को स्पर्श करे, तो दोनों दिन उसी के नाम से जाने जाते हैं: वृद्धि तिथि। इसीलिए किसी माह में नवमी दो बार दिख सकती है या दशमी छूट सकती है। इसी कारण कोई व्रत उस दिन से भिन्न दिन पड़ सकता है जिस दिन उसकी तिथि आरंभ होती है: हर व्रत का अपना निर्णायक समय होता है, जैसे संकष्टी के लिए चंद्रोदय या प्रदोष के लिए संध्या। नीचे की तिथियाँ नई दिल्ली के लिए हमारे पंचांग इंजन से तय व्रत दिन हैं, जिनका मिलान दृक् पंचांग से किया गया है।
16 तिथियाँ
| तिथि | देवता · समूह | अगली |
|---|---|---|
| 1. प्रतिपदा | अग्नि नंदा | — |
| 2. द्वितीया | ब्रह्मा भद्रा | — |
| 3. तृतीया | गौरी जया | — |
| 4. चतुर्थी → | गणेश रिक्ता | 13 नवंबर 2026 |
| 5. पंचमी | नाग पूर्णा | — |
| 6. षष्ठी | कार्तिकेय नंदा | — |
| 7. सप्तमी | सूर्य भद्रा | — |
| 8. अष्टमी → | शिव जया | 17 नवंबर 2026 |
| 9. नवमी | दुर्गा रिक्ता | — |
| 10. दशमी | यम पूर्णा | — |
| 11. एकादशी → | विश्वेदेव नंदा | 20 नवंबर 2026 |
| 12. द्वादशी | विष्णु भद्रा | — |
| 13. त्रयोदशी → | कामदेव जया | 22 नवंबर 2026 |
| 14. चतुर्दशी | शिव रिक्ता | — |
| 15. पूर्णिमा → | चंद्र पूर्णा | 24 नवंबर 2026 |
| 30. अमावस्या → | पितर पूर्णा | 9 नवंबर 2026 |
तिथियों के पाँच समूह
मुहूर्त चिंतामणि और नारद संहिता हर पक्ष की पंद्रह तिथियों को तीन-तीन के पाँच समूहों में बाँटते हैं, जो क्रम से दोहराते हैं: नंदा (“आनंद देने वाली”) — प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी; भद्रा (“कल्याणकारी”) — द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी; जया (“विजय देने वाली”) — तृतीया, अष्टमी, त्रयोदशी; रिक्ता (“रिक्त”) — चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी; और पूर्णा (“पूर्ण”) — पंचमी, दशमी, पूर्णिमा व अमावस्या। मुहूर्त ग्रंथ समूह को वार और नक्षत्र के साथ पढ़ते हैं; उदाहरण के लिए रिक्ता तिथियाँ परंपरा से आरंभ के बजाय पूजा और कार्य-पूर्ति के लिए रखी जाती हैं — फिर भी चतुर्थी और नवमी पर वर्ष के कुछ सबसे अधिक रखे जाने वाले व्रत पड़ते हैं।
तिथि से जुड़े प्रश्न
तिथियाँ कितनी होती हैं?
एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष में 15 और कृष्ण पक्ष में 15। पहले 14 नाम — प्रतिपदा से चतुर्दशी तक — दोनों पक्षों में दोहराए जाते हैं; पंद्रहवीं तिथि शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष में अमावस्या होती है, इस प्रकार कुल 16 नाम बनते हैं।
आज कौन सी तिथि है?
आज की तिथि हर दिन बदलती है और सूर्योदय पर देखी जाती है। आज के पंचांग पृष्ठ पर नई दिल्ली के लिए सूर्योदय की तिथि और उसका समाप्ति समय दिया है, और वार पृष्ठ पर अगले सात दिनों की तिथियाँ हैं।
क्षय तिथि और वृद्धि तिथि क्या हैं?
क्षय तिथि एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है, इसलिए किसी दिन का नाम उस पर नहीं होता। वृद्धि तिथि दो सूर्योदयों को स्पर्श करती है, इसलिए लगातार दो दिन उसके नाम से जाने जाते हैं। दोनों सूर्योदय की तिथि से दिन का नाम रखने के नियम से बनती हैं।
रिक्ता तिथियाँ कौन-सी हैं?
चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी (चौथी, नौवीं और चौदहवीं) रिक्ता समूह हैं। परंपरा उन्हें आरंभ के बजाय पूजा, उपवास और कार्य पूर्ण करने के लिए रखती है।