त्रयोदशी कब है? सभी त्रयोदशी तिथियाँ व समय
अगला त्रयोदशी व्रत शुक्र प्रदोष है, शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को (कृष्ण पक्ष); त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:31 से 7 नवंबर सुबह 10:48 तक रहती है (नई दिल्ली)।
- तिथि प्रारंभ
- 6 नवंबर सुबह 10:31
- तिथि समाप्त
- 7 नवंबर सुबह 10:48
- तिथि प्रारंभ
- 22 नवंबर सुबह 4:57
- तिथि समाप्त
- 23 नवंबर रात 2:37
व्रत दिन और तिथि समय नई दिल्ली (IST) के लिए, हमारे पंचांग इंजन (लाहिड़ी अयनांश) से, दृक् पंचांग से मिलान सहित।
प्रदोष व्रत — प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को होता है और भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी पूजा संध्या के प्रदोष काल में की जाती है।
2026 में त्रयोदशी की तिथियाँ
| तारीख़ | पक्ष | तिथि समय | व्रत |
|---|---|---|---|
| गुरुवार, 1 जनवरी 2026 | शुक्ल | 1 जनवरी रात 1:48 से 1 जनवरी रात 10:22 | गुरु प्रदोष |
| शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 | कृष्ण | 15 जनवरी रात 8:17 से 16 जनवरी रात 10:22 | शुक्र प्रदोष |
| शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 | शुक्ल | 30 जनवरी सुबह 11:09 से 31 जनवरी सुबह 8:26 | शुक्र प्रदोष |
| शनिवार, 14 फ़रवरी 2026 | कृष्ण | 14 फ़रवरी दोपहर 4:02 से 15 फ़रवरी शाम 5:05 | शनि प्रदोष |
| रविवार, 1 मार्च 2026 | शुक्ल | 28 फ़रवरी रात 8:44 से 1 मार्च शाम 7:10 | रवि प्रदोष |
| सोमवार, 16 मार्च 2026 | कृष्ण | 16 मार्च सुबह 9:41 से 17 मार्च सुबह 9:23 | सोम प्रदोष |
| सोमवार, 30 मार्च 2026 | शुक्ल | 30 मार्च सुबह 7:10 से 31 मार्च सुबह 6:56 | सोम प्रदोष |
| बुधवार, 15 अप्रैल 2026 | कृष्ण | 15 अप्रैल रात 12:13 से 15 अप्रैल रात 10:32 | बुध प्रदोष |
| मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 | शुक्ल | 28 अप्रैल शाम 6:52 से 29 अप्रैल शाम 7:52 | भौम प्रदोष |
| गुरुवार, 14 मई 2026 | कृष्ण | 14 मई सुबह 11:21 से 15 मई सुबह 8:32 | गुरु प्रदोष |
| गुरुवार, 28 मई 2026 | शुक्ल | 28 मई सुबह 7:57 से 29 मई सुबह 9:51 | गुरु प्रदोष |
| शुक्रवार, 12 जून 2026 | कृष्ण | 12 जून शाम 7:37 से 13 जून दोपहर 4:08 | शुक्र प्रदोष |
| शनिवार, 27 जून 2026 | शुक्ल | 26 जून रात 10:23 से 28 जून रात 12:44 | शनि प्रदोष |
| रविवार, 12 जुलाई 2026 | कृष्ण | 12 जुलाई रात 2:04 से 12 जुलाई रात 10:30 | रवि प्रदोष |
| रविवार, 26 जुलाई 2026 | शुक्ल | 26 जुलाई दोपहर 1:58 से 27 जुलाई दोपहर 4:15 | रवि प्रदोष |
| सोमवार, 10 अगस्त 2026 | कृष्ण | 10 अगस्त सुबह 8:01 से 11 अगस्त सुबह 4:54 | सोम प्रदोष |
| मंगलवार, 25 अगस्त 2026 | शुक्ल | 25 अगस्त सुबह 6:21 से 26 अगस्त सुबह 8:00 | भौम प्रदोष |
| मंगलवार, 8 सितंबर 2026 | कृष्ण | 8 सितंबर दोपहर 2:43 से 9 सितंबर दोपहर 12:31 | भौम प्रदोष |
| गुरुवार, 24 सितंबर 2026 | शुक्ल | 23 सितंबर रात 10:51 से 24 सितंबर रात 11:19 | गुरु प्रदोष |
| गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 | कृष्ण | 7 अक्टूबर रात 11:17 से 8 अक्टूबर रात 10:16 | गुरु प्रदोष |
| शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | शुक्ल | 23 अक्टूबर दोपहर 2:36 से 24 अक्टूबर दोपहर 1:37 | शुक्र प्रदोष |
| शुक्रवार, 6 नवंबर 2026अगली | कृष्ण | 6 नवंबर सुबह 10:31 से 7 नवंबर सुबह 10:48 | शुक्र प्रदोष |
| रविवार, 22 नवंबर 2026 | शुक्ल | 22 नवंबर सुबह 4:57 से 23 नवंबर रात 2:37 | रवि प्रदोष |
| रविवार, 6 दिसंबर 2026 | कृष्ण | 6 दिसंबर रात 12:52 से 7 दिसंबर रात 2:22 | रवि प्रदोष |
| सोमवार, 21 दिसंबर 2026 | शुक्ल | 21 दिसंबर शाम 5:37 से 22 दिसंबर दोपहर 2:24 | सोम प्रदोष |
2027 में त्रयोदशी की तिथियाँ
| तारीख़ | पक्ष | तिथि समय | व्रत |
|---|---|---|---|
| मंगलवार, 5 जनवरी 2027 | कृष्ण | 4 जनवरी शाम 6:16 से 5 जनवरी रात 8:40 | भौम प्रदोष |
| बुधवार, 20 जनवरी 2027 | शुक्ल | 20 जनवरी सुबह 4:42 से 21 जनवरी रात 1:12 | बुध प्रदोष |
| बुधवार, 3 फ़रवरी 2027 | कृष्ण | 3 फ़रवरी दोपहर 1:51 से 4 फ़रवरी दोपहर 4:32 | बुध प्रदोष |
| गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 | शुक्ल | 18 फ़रवरी दोपहर 2:28 से 19 फ़रवरी सुबह 11:15 | गुरु प्रदोष |
| शुक्रवार, 5 मार्च 2027 | कृष्ण | 5 मार्च सुबह 9:54 से 6 मार्च दोपहर 12:04 | शुक्र प्रदोष |
| शनिवार, 20 मार्च 2027 | शुक्ल | 19 मार्च रात 11:18 से 20 मार्च रात 8:46 | शनि प्रदोष |
| रविवार, 4 अप्रैल 2027 | कृष्ण | 4 अप्रैल सुबह 4:27 से 5 अप्रैल सुबह 5:24 | रवि प्रदोष |
| रविवार, 18 अप्रैल 2027 | शुक्ल | 18 अप्रैल सुबह 7:43 से 19 अप्रैल सुबह 6:09 | रवि प्रदोष |
| सोमवार, 3 मई 2027 | कृष्ण | 3 मई रात 8:04 से 4 मई शाम 7:31 | सोम प्रदोष |
| सोमवार, 17 मई 2027 | शुक्ल | 17 मई दोपहर 4:29 से 18 मई दोपहर 4:04 | सोम प्रदोष |
| बुधवार, 2 जून 2027 | कृष्ण | 2 जून सुबह 8:29 से 3 जून सुबह 6:35 | बुध प्रदोष |
| बुधवार, 16 जून 2027 | शुक्ल | 16 जून रात 2:31 से 17 जून रात 3:21 | बुध प्रदोष |
| गुरुवार, 1 जुलाई 2027 | कृष्ण | 1 जुलाई शाम 6:15 से 2 जुलाई दोपहर 3:24 | गुरु प्रदोष |
| गुरुवार, 15 जुलाई 2027 | शुक्ल | 15 जुलाई दोपहर 2:41 से 16 जुलाई दोपहर 4:36 | गुरु प्रदोष |
| शनिवार, 31 जुलाई 2027 | कृष्ण | 31 जुलाई रात 2:19 से 31 जुलाई रात 10:58 | शनि प्रदोष |
| शनिवार, 14 अगस्त 2027 | शुक्ल | 14 अगस्त सुबह 5:22 से 15 अगस्त सुबह 7:54 | शनि प्रदोष |
| रविवार, 29 अगस्त 2027 | कृष्ण | 29 अगस्त सुबह 9:36 से 30 अगस्त सुबह 6:13 | रवि प्रदोष |
| सोमवार, 13 सितंबर 2027 | शुक्ल | 12 सितंबर रात 10:13 से 14 सितंबर रात 12:40 | सोम प्रदोष |
| सोमवार, 27 सितंबर 2027 | कृष्ण | 27 सितंबर दोपहर 4:56 से 28 सितंबर दोपहर 1:55 | सोम प्रदोष |
| मंगलवार, 12 अक्टूबर 2027 | शुक्ल | 12 अक्टूबर दोपहर 4:14 से 13 अक्टूबर शाम 5:49 | भौम प्रदोष |
| बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 | कृष्ण | 27 अक्टूबर रात 1:04 से 27 अक्टूबर रात 10:50 | बुध प्रदोष |
| गुरुवार, 11 नवंबर 2027 | शुक्ल | 11 नवंबर सुबह 10:08 से 12 नवंबर सुबह 10:21 | गुरु प्रदोष |
| गुरुवार, 25 नवंबर 2027 | कृष्ण | 25 नवंबर सुबह 10:51 से 26 नवंबर सुबह 9:48 | गुरु प्रदोष |
| शनिवार, 11 दिसंबर 2027 | शुक्ल | 11 दिसंबर रात 2:54 से 12 दिसंबर रात 1:43 | शनि प्रदोष |
| शनिवार, 25 दिसंबर 2027 | कृष्ण | 24 दिसंबर रात 11:09 से 25 दिसंबर रात 11:32 | शनि प्रदोष |
2028 में त्रयोदशी की तिथियाँ
| तारीख़ | पक्ष | तिथि समय | व्रत |
|---|---|---|---|
| रविवार, 9 जनवरी 2028 | शुक्ल | 9 जनवरी शाम 5:56 से 10 जनवरी दोपहर 3:37 | रवि प्रदोष |
| रविवार, 23 जनवरी 2028 | कृष्ण | 23 जनवरी दोपहर 2:24 से 24 जनवरी दोपहर 4:09 | रवि प्रदोष |
| मंगलवार, 8 फ़रवरी 2028 | शुक्ल | 8 फ़रवरी सुबह 6:52 से 9 फ़रवरी रात 3:47 | भौम प्रदोष |
| मंगलवार, 22 फ़रवरी 2028 | कृष्ण | 22 फ़रवरी सुबह 8:09 से 23 फ़रवरी सुबह 10:45 | भौम प्रदोष |
| बुधवार, 8 मार्च 2028 | शुक्ल | 8 मार्च शाम 5:28 से 9 मार्च दोपहर 2:02 | बुध प्रदोष |
| गुरुवार, 23 मार्च 2028 | कृष्ण | 23 मार्च रात 2:57 से 24 मार्च सुबह 5:34 | गुरु प्रदोष |
| शुक्रवार, 7 अप्रैल 2028 | शुक्ल | 7 अप्रैल रात 1:52 से 7 अप्रैल रात 10:33 | शुक्र प्रदोष |
| शनिवार, 22 अप्रैल 2028 | कृष्ण | 21 अप्रैल रात 9:04 से 22 अप्रैल रात 10:57 | शनि प्रदोष |
| शनिवार, 6 मई 2028 | शुक्ल | 6 मई सुबह 8:49 से 7 मई सुबह 6:06 | शनि प्रदोष |
| रविवार, 21 मई 2028 | कृष्ण | 21 मई दोपहर 1:20 से 22 मई दोपहर 2:02 | रवि प्रदोष |
| रविवार, 4 जून 2028 | शुक्ल | 4 जून दोपहर 3:30 से 5 जून दोपहर 1:49 | रवि प्रदोष |
| मंगलवार, 20 जून 2028 | कृष्ण | 20 जून रात 3:22 से 21 जून रात 2:48 | भौम प्रदोष |
| मंगलवार, 4 जुलाई 2028 | शुक्ल | 3 जुलाई रात 11:18 से 4 जुलाई रात 10:57 | भौम प्रदोष |
| बुधवार, 19 जुलाई 2028 | कृष्ण | 19 जुलाई दोपहर 3:22 से 20 जुलाई दोपहर 1:38 | बुध प्रदोष |
| बुधवार, 2 अगस्त 2028 | शुक्ल | 2 अगस्त सुबह 9:25 से 3 अगस्त सुबह 10:26 | बुध प्रदोष |
| शुक्रवार, 18 अगस्त 2028 | कृष्ण | 18 अगस्त रात 1:44 से 18 अगस्त रात 11:01 | शुक्र प्रदोष |
| शुक्रवार, 1 सितंबर 2028 | शुक्ल | 31 अगस्त रात 10:31 से 2 सितंबर रात 12:35 | शुक्र प्रदोष |
| शनिवार, 16 सितंबर 2028 | कृष्ण | 16 सितंबर सुबह 10:52 से 17 सितंबर सुबह 7:30 | शनि प्रदोष |
| शनिवार, 30 सितंबर 2028 | शुक्ल | 30 सितंबर दोपहर 2:34 से 1 अक्टूबर शाम 5:06 | शनि प्रदोष |
| रविवार, 15 अक्टूबर 2028 | कृष्ण | 15 अक्टूबर शाम 7:17 से 16 अक्टूबर दोपहर 3:46 | रवि प्रदोष |
| सोमवार, 30 अक्टूबर 2028 | शुक्ल | 30 अक्टूबर सुबह 8:51 से 31 अक्टूबर सुबह 11:09 | सोम प्रदोष |
| मंगलवार, 14 नवंबर 2028 | कृष्ण | 14 नवंबर रात 3:41 से 15 नवंबर रात 12:36 | भौम प्रदोष |
| बुधवार, 29 नवंबर 2028 | शुक्ल | 29 नवंबर सुबह 4:14 से 30 नवंबर सुबह 5:43 | बुध प्रदोष |
| बुधवार, 13 दिसंबर 2028 | कृष्ण | 13 दिसंबर दोपहर 12:57 से 14 दिसंबर सुबह 10:50 | बुध प्रदोष |
| शुक्रवार, 29 दिसंबर 2028 | शुक्ल | 28 दिसंबर रात 11:22 से 29 दिसंबर रात 11:37 | शुक्र प्रदोष |
बीती तिथियाँ हल्के रंग में हैं। हर व्रत का नाम उस माह का व्रत पृष्ठ खोलता है, जहाँ पूजा समय दिए हैं।
त्रयोदशी का महत्व
त्रयोदशी, तेरहवीं तिथि, के स्वामी मुहूर्त चिंतामणि में कामदेव हैं, पर यह हर जगह प्रदोष व्रत के लिए जानी जाती है — शिव और पार्वती की संध्याकालीन पूजा, जो दोनों पक्षों की त्रयोदशी को रखी जाती है। “प्रदोष” दिन और रात का संधिकाल है; परंपरा मानती है कि उस बेला में शिव नृत्य करते हैं, इसलिए पूजा प्रदोष काल में होती है — वह अवधि जो सूर्यास्त से आरंभ होती है। प्रदोष का नाम वार से बनता है — सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष आदि — और शनि व सोम प्रदोष सबसे प्रिय हैं। कार्तिक की कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस (धनत्रयोदशी) है, जिससे दीपावली आरंभ होती है। भक्त संध्या से पूर्व स्नान करते हैं, शिवलिंग का जल व दूध से अभिषेक करते हैं, बेलपत्र और दीप अर्पित करते हैं और प्रदोष कथा सुनते हैं। परंपरा इस व्रत से जो फल जोड़ती है, वे यहाँ संदर्भ के लिए दिए गए हैं, वचन के रूप में नहीं।
प्रदोष माह के दोनों पक्षों में रखा जाता है, इसलिए त्रयोदशी से वर्ष में लगभग चौबीस-पच्चीस व्रत दिन बनते हैं। शुक्ल त्रयोदशी पूर्णिमा से दो दिन पहले और कृष्ण त्रयोदशी अमावस्या से दो दिन पहले आती है; कृष्ण त्रयोदशी के अगले दिन प्रायः चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है।
व्रत की तारीख़ कैसे तय होती है
ऊपर की हर पंक्ति एक व्रत दिन है, जिसे हमारे पंचांग इंजन ने नई दिल्ली के लिए तय किया है और दृक् पंचांग से मिलाया है। तिथि किसी भी समय आरंभ हो सकती है, इसलिए व्रत का दिन केवल “जिस दिन तिथि आरंभ हुई” नहीं होता। सामान्य नियम उदया तिथि का है — सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम देती है — पर हर व्रत अपना निर्णायक समय जोड़ता है: प्रदोष के लिए संध्या के प्रदोष काल में त्रयोदशी आवश्यक है, इसलिए व्रत प्रायः उस दिन रखा जाता है जिस दिन तिथि दोपहर में आरंभ होती है। इसीलिए पहले स्तंभ की तारीख़ कभी-कभी उस दिन से एक दिन पहले होती है जिस दिन तिथि सूर्योदय को स्पर्श करती है, और क्षेत्रीय पंचांगों में एक दिन का अंतर संभव है। “तिथि समय” स्तंभ में IST में सटीक अवधि दी है, ताकि आप हर पंक्ति स्वयं जाँच सकें। इस पृष्ठ पर माह के नाम (जैसे कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ) उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार हैं; अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष का माह एक पहले का होता है।
शास्त्रीय तालिका में त्रयोदशी के स्वामी कामदेव हैं। तृतीया और अष्टमी के साथ यह जया (“विजय देने वाली”) तिथियों का समूह बनाती है।
त्रयोदशी से जुड़े प्रश्न
अगला त्रयोदशी व्रत कब है?
कृष्ण पक्ष का व्रत: शुक्र प्रदोष, शुक्रवार, 6 नवंबर 2026; त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:31 से 7 नवंबर सुबह 10:48 तक। शुक्ल पक्ष का व्रत: रवि प्रदोष, रविवार, 22 नवंबर 2026; त्रयोदशी तिथि 22 नवंबर सुबह 4:57 से 23 नवंबर रात 2:37 तक।
2026 में कितनी त्रयोदशी हैं?
हमारे नई दिल्ली डेटा में 2026 में 25 त्रयोदशी व्रत दिन हैं — 13 शुक्ल पक्ष और 12 कृष्ण पक्ष में। एक कैलेंडर वर्ष में हर पक्ष की त्रयोदशी 12 या 13 बार आती है, क्योंकि सौर वर्ष में लगभग 12.4 चंद्र मास होते हैं।
प्रदोष काल क्या है?
प्रदोष काल सूर्यास्त से आरंभ होकर लगभग ढाई घंटे चलने वाली अवधि है, जिसमें त्रयोदशी को शिव पूजा की जाती है। यह स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए शहर और ऋतु के साथ बदलता है; हर प्रदोष माह पृष्ठ पर नई दिल्ली का प्रदोष काल दिया है।
त्रयोदशी का व्रत कभी तिथि आरंभ से एक दिन पहले या बाद क्यों होता है?
तिथि किसी भी समय आरंभ हो सकती है, और हर व्रत का अपना निर्णायक समय है — प्रदोष के लिए संध्या के प्रदोष काल में त्रयोदशी आवश्यक है, इसलिए व्रत प्रायः उस दिन रखा जाता है जिस दिन तिथि दोपहर में आरंभ होती है। इसलिए व्रत का दिन उस दिन से भिन्न हो सकता है जिस दिन तिथि आरंभ होती है, और क्षेत्रीय पंचांगों में एक दिन का अंतर संभव है।