महालया अमावस्या कब है
महालया अमावस्या बुधवार, 29 सितंबर 2027 को है — तिथि 29 सितंबर सुबह 10:55 से 30 सितंबर सुबह 8:06 (नई दिल्ली)।
समय नई दिल्ली (IST) के लिए, लाहिड़ी अयनांश पर आधारित पंचांग इंजन से गणना।
महालया अमावस्या की सभी तिथियाँ
| तिथि | तिथि समय | अपराह्न | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|
| बुधवार, 29 सितंबर 2027अगली | 29 सितंबर सुबह 10:55 से 30 सितंबर सुबह 8:06 | 29 सितंबर दोपहर 1:24 – 29 सितंबर दोपहर 3:48 | कृष्ण · आश्विन |
| सोमवार, 18 सितंबर 2028 | 18 सितंबर रात 3:47 से 18 सितंबर रात 11:54 | 18 सितंबर दोपहर 1:30 – 18 सितंबर दोपहर 3:57 | कृष्ण · आश्विन |
| शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 | 9 अक्टूबर रात 9:36 से 10 अक्टूबर रात 9:20 | 10 अक्टूबर दोपहर 1:19 – 10 अक्टूबर दोपहर 3:39 | कृष्ण · आश्विन |
| रविवार, 21 सितंबर 2025 | 21 सितंबर रात 12:17 से 22 सितंबर रात 1:24 | 21 सितंबर दोपहर 1:28 – 21 सितंबर दोपहर 3:54 | कृष्ण · आश्विन |
महालया अमावस्या का महत्व
महालया (सर्व पितृ) अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन और वर्ष का सर्वप्रमुख श्राद्ध दिवस है। जिन पितरों की मृत्यु-तिथि ज्ञात न हो — या पक्ष में पहले छूट गई हो — उनका इसी दिन तर्पण और पिंडदान से स्मरण किया जाता है।
यह कब पड़ती है
महालया अमावस्या पितृ पक्ष का समापन करने वाली अमावस्या (आश्विन, पूर्णिमांत) होती है। चंद्र मास सौर वर्ष से छोटा होता है, इसलिए ग्रेगोरियन तारीख़ हर वर्ष बदलती है। व्रत का दिन इस पर निर्भर करता है कि सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि चल रही है, इसलिए क्षेत्रीय पंचांगों में एक दिन का अंतर संभव है।
सामान्य प्रश्न
महालया अमावस्या कब है?
महालया अमावस्या बुधवार, 29 सितंबर 2027 को है — तिथि 29 सितंबर सुबह 10:55 से 30 सितंबर सुबह 8:06 (नई दिल्ली)। इसके बाद: सोमवार, 18 सितंबर 2028।
महालया अमावस्या की तिथि कब से कब तक है?
29 सितंबर 2027 की महालया अमावस्या के लिए तिथि 29 सितंबर सुबह 10:55 से 30 सितंबर सुबह 8:06 तक है; अपराह्न 29 सितंबर दोपहर 1:24 – 29 सितंबर दोपहर 3:48 (IST, नई दिल्ली)।
महालया अमावस्या किसे कहते हैं?
महालया अमावस्या पितृ पक्ष का समापन करने वाली अमावस्या (आश्विन, पूर्णिमांत) को कहते हैं। महालया (सर्व पितृ) अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन और वर्ष का सर्वप्रमुख श्राद्ध दिवस है। जिन पितरों की मृत्यु-तिथि ज्ञात न हो — या पक्ष में पहले छूट गई हो — उनका इसी दिन तर्पण और पिंडदान से स्मरण किया जाता है।