शनि अमावस्या कब है
शनि अमावस्या शनिवार, 6 फ़रवरी 2027 को है — तिथि 5 फ़रवरी शाम 7:06 से 6 फ़रवरी रात 9:26 (नई दिल्ली)।
समय नई दिल्ली (IST) के लिए, लाहिड़ी अयनांश पर आधारित पंचांग इंजन से गणना।
शनि अमावस्या की सभी तिथियाँ
| तिथि | तिथि समय | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|
| शनिवार, 6 फ़रवरी 2027अगली | 5 फ़रवरी शाम 7:06 से 6 फ़रवरी रात 9:26 | कृष्ण · माघ |
| शनिवार, 22 जुलाई 2028 | 21 जुलाई सुबह 11:18 से 22 जुलाई सुबह 8:32 | कृष्ण · श्रावण |
| शनिवार, 16 दिसंबर 2028 | 15 दिसंबर सुबह 9:01 से 16 दिसंबर सुबह 7:36 | कृष्ण · पौष |
| शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 | 9 अक्टूबर रात 9:36 से 10 अक्टूबर रात 9:20 | कृष्ण · आश्विन |
| शनिवार, 16 मई 2026 | 16 मई सुबह 5:11 से 17 मई रात 1:31 | कृष्ण · ज्येष्ठ |
| शनिवार, 23 अगस्त 2025 | 22 अगस्त सुबह 11:56 से 23 अगस्त सुबह 11:36 | कृष्ण · भाद्रपद |
| शनिवार, 29 मार्च 2025 | 28 मार्च शाम 7:56 से 29 मार्च दोपहर 4:28 | कृष्ण · चैत्र |
शनि अमावस्या का महत्व
शनिवार की अमावस्या शनि अमावस्या (शनिश्चरी अमावस्या) कहलाती है, जो शनि उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। प्रचलित विधियाँ हैं — शनि देव को तिल या सरसों का तेल अर्पित करना, पीपल के नीचे दीपक जलाना, काले तिल व उड़द का दान और पितृ तर्पण।
यह कब पड़ती है
शनि अमावस्या शनिवार को पड़ने वाली कोई भी अमावस्या होती है। चंद्र मास सौर वर्ष से छोटा होता है, इसलिए ग्रेगोरियन तारीख़ हर वर्ष बदलती है — और वार का संयोग होने से किसी वर्ष यह एक से अधिक बार आ सकती है, तो किसी वर्ष एक बार भी नहीं। व्रत का दिन इस पर निर्भर करता है कि सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि चल रही है, इसलिए क्षेत्रीय पंचांगों में एक दिन का अंतर संभव है।
सामान्य प्रश्न
शनि अमावस्या कब है?
शनि अमावस्या शनिवार, 6 फ़रवरी 2027 को है — तिथि 5 फ़रवरी शाम 7:06 से 6 फ़रवरी रात 9:26 (नई दिल्ली)। इसके बाद: शनिवार, 22 जुलाई 2028; शनिवार, 16 दिसंबर 2028।
शनि अमावस्या की तिथि कब से कब तक है?
6 फ़रवरी 2027 की शनि अमावस्या के लिए तिथि 5 फ़रवरी शाम 7:06 से 6 फ़रवरी रात 9:26 तक है (IST, नई दिल्ली)।
शनि अमावस्या किसे कहते हैं?
शनि अमावस्या शनिवार को पड़ने वाली कोई भी अमावस्या को कहते हैं। शनिवार की अमावस्या शनि अमावस्या (शनिश्चरी अमावस्या) कहलाती है, जो शनि उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। प्रचलित विधियाँ हैं — शनि देव को तिल या सरसों का तेल अर्पित करना, पीपल के नीचे दीपक जलाना, काले तिल व उड़द का दान और पितृ तर्पण।