2026 विनायक चतुर्थी तिथियाँ
विनायक (वरद) चतुर्थी प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, जो गणेश जी को समर्पित है। संकष्टी के विपरीत व्रत मध्याह्न में खोला जाता है — चंद्र-दर्शन आवश्यक नहीं। भाद्रपद की विनायक चतुर्थी ही महान गणेश चतुर्थी है। नीचे तिथियाँ दिल्ली के लिए हैं।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 22 जन॰ 2026 | 22 जनवरी, रात 2:47 | 23 जनवरी, रात 2:29 | विनायक चतुर्थी | गुरु | शुक्ल · माघ |
| 21 फ़र॰ 2026 | 20 फ़रवरी, दोपहर 2:39 | 21 फ़रवरी, दोपहर 1:01 | विनायक चतुर्थी | शनि | शुक्ल · फाल्गुन |
| 22 मार्च 2026 | 21 मार्च, रात 11:57 | 22 मार्च, रात 9:17 | विनायक चतुर्थी | रवि | शुक्ल · चैत्र |
| 20 अप्रैल 2026 | 20 अप्रैल, सुबह 7:28 | 21 अप्रैल, सुबह 4:15 | विनायक चतुर्थी | सोम | शुक्ल · वैशाख |
| 20 मई 2026 | 19 मई, दोपहर 2:19 | 20 मई, सुबह 11:07 | अधिक ज्येष्ठ विनायक चतुर्थीअधिक | बुध | शुक्ल · ज्येष्ठ |
| 18 जून 2026 | 17 जून, रात 9:39 | 18 जून, शाम 6:59 | विनायक चतुर्थी | गुरु | शुक्ल · ज्येष्ठ |
| 17 जुल॰ 2026 | 17 जुलाई, सुबह 6:28 | 18 जुलाई, सुबह 4:43 | विनायक चतुर्थी | शुक्र | शुक्ल · आषाढ़ |
| 16 अग॰ 2026 | 15 अगस्त, शाम 5:29 | 16 अगस्त, दोपहर 4:53 | विनायक चतुर्थी | रवि | शुक्ल · श्रावण |
| 14 सित॰ 2026 | 14 सितंबर, सुबह 7:07 | 15 सितंबर, सुबह 7:45 | विनायक चतुर्थी | सोम | शुक्ल · भाद्रपद |
| 14 अक्टू॰ 2026 | 13 अक्टूबर, रात 11:28 | 15 अक्टूबर, रात 1:14 | विनायक चतुर्थी | बुध | शुक्ल · आश्विन |
| 13 नव॰ 2026अगली | 12 नवंबर, शाम 6:10 | 13 नवंबर, रात 8:43 | विनायक चतुर्थी | शुक्र | शुक्ल · कार्तिक |
| 13 दिस॰ 2026 | 12 दिसंबर, दोपहर 2:07 | 13 दिसंबर, दोपहर 4:48 | विनायक चतुर्थी | रवि | शुक्ल · मार्गशीर्ष |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
विनायक चतुर्थी क्या है?
विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि को गणेश जी की मासिक पूजा है। विघ्नहर्ता गणेश की पूजा मध्याह्न में — उनके जन्म से जुड़े मुहूर्त में — दूर्वा, मोदक और नाम-जप से की जाती है। भक्त बुद्धि, सफलता और नए कार्यों से विघ्न हटाने हेतु यह व्रत रखते हैं।
विनायक बनाम संकष्टी
प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थियाँ होती हैं: शुक्ल (विनायक) और कृष्ण (संकष्टी)। दोनों की लय — शुक्ल पक्ष में मध्याह्न पूजा, कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय पूजा — मास के दोनों छोरों पर गणेश को स्थापित करती है। इस साइट पर दोनों की सूचियाँ गणना की गई हैं।
मध्याह्न पूजा
विनायक पूजा मध्याह्न काल में होती है, जो गणेश जन्म का पहर माना जाता है। पूजा के बाद प्रायः व्रत खोल दिया जाता है — संकष्टी की चंद्र-प्रतीक्षा से सरल विधि।
व्रत विधि
उपवास प्रातः से चलता है और मध्याह्न पूजा के बाद खोला जाता है। भक्त स्नान कर संकल्प लेते हैं और गणेश जी की पूजा दूर्वा से करते हैं — इक्कीस दल की परंपरा है — साथ में लाल पुष्प, मोदक और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। जहाँ ज्ञात हो वहाँ संकटनाशन गणेश स्तोत्र या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है। संकष्टी के विपरीत, जो चंद्रोदय के बाद खोली जाती है, विनायक चतुर्थी दिन के उजाले में ही पूर्ण होती है।
विनायक चतुर्थी सामग्री
मध्याह्न पूजा से पूर्व ये एकत्र करें:
- गणेश जी की मूर्ति या चित्र
- दूर्वा
- लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल
- नैवेद्य हेतु मोदक या लड्डू
- सिंदूर और चंदन
- घी का दीपक और धूप
- नारियल और पान के पत्ते
- अक्षत
- पंचामृत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में कितनी विनायक चतुर्थी हैं?+
2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 12 विनायक चतुर्थी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की शुक्ल चतुर्थी को एक।
विनायक चतुर्थी संकष्टी से कैसे अलग है?+
दोनों गणेश जी की हैं, पर विनायक शुक्ल (बढ़ते) पक्ष की चतुर्थी है जिसकी पूजा मध्याह्न में होती है, जबकि संकष्टी कृष्ण पक्ष की है और व्रत चंद्रोदय के बाद ही खुलता है।
सबसे बड़ी विनायक चतुर्थी कौन-सी है?+
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी ही वार्षिक गणेश चतुर्थी है — दस दिवसीय उत्सव जो विसर्जन से पूर्ण होता है।
व्रत कैसे रखा जाता है?+
भक्त मध्याह्न गणेश पूजा तक उपवास रखते हैं, दूर्वा व मोदक अर्पित करते हैं और गणेश मंत्रों का जाप करते हैं। विधि परंपरा अनुसार भिन्न होती है।
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