2027 मासिक दुर्गाष्टमी तिथियाँ
मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (आठवीं तिथि) है, जो माँ दुर्गा को समर्पित है। आश्विन नवरात्रि की अष्टमी ही महान महाष्टमी (दुर्गाष्टमी) है। नीचे तिथियाँ दिल्ली के लिए हैं।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 16 जन॰ 2027अगली | 15 जनवरी, दोपहर 2:14 | 16 जनवरी, दोपहर 1:43 | मासिक दुर्गाष्टमी | शनि | शुक्ल · पौष |
| 14 फ़र॰ 2027 | 14 फ़रवरी, रात 2:07 | 15 फ़रवरी, रात 12:41 | मासिक दुर्गाष्टमी | रवि | शुक्ल · माघ |
| 16 मार्च 2027 | 15 मार्च, सुबह 10:51 | 16 मार्च, सुबह 8:55 | मासिक दुर्गाष्टमी | मंगल | शुक्ल · फाल्गुन |
| 14 अप्रैल 2027 | 13 अप्रैल, शाम 5:29 | 14 अप्रैल, दोपहर 3:24 | मासिक दुर्गाष्टमी | बुध | शुक्ल · चैत्र |
| 13 मई 2027 | 12 मई, रात 11:13 | 13 मई, रात 9:18 | मासिक दुर्गाष्टमी | गुरु | शुक्ल · वैशाख |
| 11 जून 2027 | 11 जून, सुबह 5:14 | 12 जून, रात 3:45 | मासिक दुर्गाष्टमी | शुक्र | शुक्ल · ज्येष्ठ |
| 11 जुल॰ 2027 | 10 जुलाई, दोपहर 12:38 | 11 जुलाई, सुबह 11:50 | मासिक दुर्गाष्टमी | रवि | शुक्ल · आषाढ़ |
| 9 अग॰ 2027 | 8 अगस्त, रात 10:25 | 9 अगस्त, रात 10:35 | मासिक दुर्गाष्टमी | सोम | शुक्ल · श्रावण |
| 8 सित॰ 2027 | 7 सितंबर, सुबह 11:29 | 8 सितंबर, दोपहर 12:45 | मासिक दुर्गाष्टमी | बुध | शुक्ल · भाद्रपद |
| 7 अक्टू॰ 2027 | 7 अक्टूबर, सुबह 4:14 | 8 अक्टूबर, सुबह 6:28 | मासिक दुर्गाष्टमी | गुरु | शुक्ल · आश्विन |
| 6 नव॰ 2027 | 6 नवंबर, रात 12:10 | 7 नवंबर, रात 2:50 | मासिक दुर्गाष्टमी | शनि | शुक्ल · कार्तिक |
| 6 दिस॰ 2027 | 5 दिसंबर, रात 9:37 | 7 दिसंबर, रात 12:00 | मासिक दुर्गाष्टमी | सोम | शुक्ल · मार्गशीर्ष |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
मासिक दुर्गाष्टमी क्या है?
मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक मास शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि को देवी की पूजा है। अष्टमी पूर्णिमा से पूर्व शक्ति की चरम तिथि है, और भक्त उपवास, दुर्गा पाठ व दीपों से इसे रखते हैं, रक्षा व बल की प्रार्थना करते हुए।
मासिक व्रत और वार्षिक महाष्टमी
मासिक अनुष्ठान शरद नवरात्रि की महान दुर्गाष्टमी की ओर ले जाता है, जब अष्टमी-नवमी की संधि पर महिषासुरमर्दिनी की संधि पूजा होती है। मासिक अष्टमी रखना उसी भक्ति को वर्षभर बनाए रखना माना जाता है।
व्रत विधि
दिन की शुरुआत प्रातःकाल स्नान और व्रत के संकल्प से होती है। वेदी पर देवी दुर्गा का चित्र स्थापित किया जाता है और लाल वस्त्र अर्पित किया जाता है। पूजा सामान्य क्रम से होती है — दीप और धूप, फिर पुष्प, कुमकुम और सिंदूर — साथ में दुर्गा चालीसा, दुर्गा अष्टोत्तर या घर की परंपरा के अनुसार सरल मंत्रों का पाठ। नैवेद्य में प्रायः खीर, हलवा, फल, नारियल और पंचामृत होते हैं। अनेक घरों में कन्या पूजन कर कन्याओं को भोजन और उपहार दिए जाते हैं — नवरात्रि की प्रथा का लघु रूप।
क्या खाएँ और क्या छोड़ें
व्रत रखने वाले फल, दूध, साबूदाना और कुट्टू का आटा लेते हैं, और उस दिन गेहूँ, चावल तथा दाल जैसे अन्न छोड़ देते हैं। प्याज़, लहसुन, मद्य और मांसाहार वर्जित हैं। परंपरा एक दूसरे प्रकार के संयम की भी अपेक्षा करती है — क्रोध और कटु वचन से बचना — और इसे व्रत का अंग मानती है, बाद की बात नहीं। किसी भी उपवास की तरह इसे अपने स्वास्थ्य और सामर्थ्य के अनुसार निभाया जाता है।
महत्त्व
अष्टमी वह तिथि मानी जाती है जिस पर देवी की शक्ति सर्वाधिक सुलभ होती है, और मासिक दुर्गाष्टमी रक्षा, साहस तथा परिवार के कल्याण के लिए रखी जाती है। यह परंपरागत रूप से विघ्न-निवारण और कठिनाई में स्थिरता से जुड़ी है। यह मासिक अनुष्ठान शरद नवरात्रि की महाष्टमी की ओर ले जाता है — वर्ष की सबसे बड़ी अष्टमी — जब अष्टमी और नवमी की संधि पर संधि पूजा होती है।
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा सामग्री
पूजा से पूर्व ये सामग्री एकत्र करें:
- देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र
- लाल वस्त्र या चुनरी
- लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल
- कुमकुम, सिंदूर और हल्दी
- घी का दीपक और धूप
- पंचामृत
- नैवेद्य हेतु खीर या हलवा
- नारियल, पान और फल
- कन्या पूजन हेतु चूड़ियाँ या उपहार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में कितनी मासिक दुर्गाष्टमी हैं?+
2027 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 12 मासिक दुर्गाष्टमी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की शुक्ल अष्टमी को एक।
नवरात्रि की दुर्गाष्टमी से क्या संबंध है?+
आश्विन की शुक्ल अष्टमी, जो शरद नवरात्रि में आती है, वार्षिक महाष्टमी है; मासिक दुर्गाष्टमियाँ वही भक्ति वर्षभर बनाए रखती हैं।
व्रत कैसे रखा जाता है?+
भक्त दिनभर उपवास रखते हैं, पुष्प व दीप से दुर्गा पूजा करते हैं और दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं। वार्षिक अष्टमी पर कुछ कन्या पूजन करते हैं।
महत्व क्या है?+
अष्टमी तिथि शक्ति-तत्व की पवित्र तिथि मानी जाती है; व्रत रक्षा, बल और भय-निवारण हेतु रखा जाता है — आस्था व परंपरा के विषय।
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