Astrologger
EN|हिंदी
मुफ़्त शुरू करें
पंचांग व्रत कैलेंडर

दिसंबर 2026 में कालाष्टमी

दिसंबर 2026 में 2 कालाष्टमी हैं। नीचे तिथि व समय दिए हैं, जो दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

दिसंबर 2026 में दो कालाष्टमी हैं — कालभैरव जयंती (मंगलवार, 1 दिसंबर, कृष्ण पक्ष) और कालाष्टमी (बुधवार, 30 दिसंबर, कृष्ण पक्ष)।

अगली कालाष्टमी
कालाष्टमी
22 दिन में · · Saturday, October 3, 2026
तिथिदिननामपक्ष / मासतिथि आरंभतिथि समाप्त
1 दिस॰ 2026अगलीमंगलकालभैरव जयंतीकृष्ण · Kartika1 Dec, 12:12 AM1 Dec, 11:14 PM
30 दिस॰ 2026बुधकालाष्टमीकृष्ण · Margashirsha29 Dec, 1:25 PM30 Dec, 12:37 PM

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।

पूरे 2026 की कालाष्टमी देखें

कालाष्टमी क्या है?

कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की मासिक रात्रि है। भैरव भय-निवारक, अन्याय के दंडक और काल के स्वामी रूप में पूजित हैं; उनका व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, अनुशासन और राहु-शनि जनित कष्टों से राहत हेतु रखा जाता है।

भैरव पूजा

पूजा संध्या या रात्रि में होती है — सरसों-तेल का दीपक, काले तिल और आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् इसका हृदय हैं। इस दिन भैरव के सहचर श्वानों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

अन्य व्रत कैलेंडर
एकादशी 2026प्रदोष व्रत 2026अमावस्या 2026पूर्णिमा 2026संकष्टी चतुर्थी 2026मासिक शिवरात्रि 2026विनायक चतुर्थी 2026स्कन्द षष्ठी 2026मासिक दुर्गाष्टमी 2026मासिक कार्तिगाई 2026भानु सप्तमी 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कितनी कालाष्टमी हैं?+

2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 13 कालाष्टमी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण अष्टमी को एक, जिनमें मार्गशीर्ष की कालभैरव जयंती है।

काल भैरव कौन हैं?+

काल भैरव शिव का उग्र स्वरूप हैं — काल के स्वामी और तीर्थों के क्षेत्रपाल — विशेषतः काशी के, जहाँ वे नगर के कोतवाल माने जाते हैं।

कालभैरव जयंती कब है?+

मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) की कालाष्टमी कालभैरव जयंती — भैरव के प्राकट्य का दिन — मानी जाती है।

व्रत कैसे रखा जाता है?+

भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि में सरसों-तेल के दीप से भैरव पूजा करते हैं, कालभैरवाष्टकम् का पाठ करते हैं और उनके वाहन श्वान को भोजन कराते हैं।

कालाष्टमी आपकी कुंडली के लिए क्या कहती है?

अपनी जन्म कुंडली के आधार पर व्रत, शुभ काल और उपाय पर एआई ज्योतिषी से नि:शुल्क पूछें।

एआई ज्योतिषी से पूछें