दिसंबर 2027 में भानु सप्तमी
दिसंबर 2027 में भानु सप्तमी कब है? इस महीने दो बार — रविवार, 5 दिसंबर — तिथि 4 दिसंबर शाम 6:57 से 5 दिसंबर रात 9:37; और रविवार, 19 दिसंबर — तिथि 19 दिसंबर सुबह 5:37 से 20 दिसंबर रात 3:34 (नई दिल्ली)।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 5 दिस॰ 2027अगली | 4 दिसंबर, शाम 6:57 | 5 दिसंबर, रात 9:37 | भानु सप्तमी | रवि | शुक्ल · मार्गशीर्ष |
| 19 दिस॰ 2027 | 19 दिसंबर, सुबह 5:37 | 20 दिसंबर, रात 3:34 | भानु सप्तमी | रवि | कृष्ण · पौष |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
दिसंबर 2027 में भानु सप्तमी का पूरा समय
हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।
| तिथि | आरंभ | समाप्त | अवधि | वार | पक्ष | चंद्र मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 5 दिस॰ | 4 दिसंबर, शाम 6:57 | 5 दिसंबर, रात 9:37 | 26 घंटे 40 मिनट | रविवार | शुक्ल | मार्गशीर्ष |
| 19 दिस॰ | 19 दिसंबर, सुबह 5:37 | 20 दिसंबर, रात 3:34 | 21 घंटे 57 मिनट | रविवार | कृष्ण | पौष |
इस महीने की हर भानु सप्तमी
भानु सप्तमी — 5 दिस॰, रविवार को, शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष मास। तिथि 26 घंटे 40 मिनट चलती है (4 दिसंबर शाम 6:57 से)।
भानु सप्तमी — 19 दिस॰, रविवार को, कृष्ण पक्ष, पौष मास। तिथि 21 घंटे 57 मिनट चलती है (19 दिसंबर सुबह 5:37 से)।
दिसंबर की तुलना बाकी साल से
2027 में भानु सप्तमी की तिथि औसतन 23 घंटे 51 मिनट चलती है। दिसंबर में यह औसतन 24 घंटे 19 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ लंबी।
साल भर में यह अवधि 23 घंटे 24 मिनट (अगस्त) से 24 घंटे 19 मिनट (दिसंबर) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।
2027 में कुल 3 भानु सप्तमी हैं, जिनमें से 2 इस महीने पड़ती हैं।
दिसंबर 2027 के अन्य व्रत
एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।
| व्रत | तिथियाँ | कैलेंडर |
|---|---|---|
| विनायक चतुर्थी | 2 दिस॰ — विनायक चतुर्थी · 31 दिस॰ — विनायक चतुर्थी | देखें |
| स्कन्द षष्ठी | 3 दिस॰ — स्कन्द षष्ठी | देखें |
| मासिक दुर्गाष्टमी | 6 दिस॰ — मासिक दुर्गाष्टमी | देखें |
| एकादशी | 9 दिस॰ — मोक्षदा एकादशी · 23 दिस॰ — सफला एकादशी | देखें |
| प्रदोष व्रत | 11 दिस॰ — शनि प्रदोष · 25 दिस॰ — शनि प्रदोष | देखें |
| मासिक कार्तिगाई | 12 दिस॰ — मासिक कार्तिगाई | देखें |
| पूर्णिमा | 13 दिस॰ — मार्गशीर्ष पूर्णिमा | देखें |
| संकष्टी चतुर्थी | 16 दिस॰ — आखुरथ संकष्टी चतुर्थी | देखें |
| कालाष्टमी | 20 दिस॰ — कालाष्टमी | देखें |
| मासिक शिवरात्रि | 25 दिस॰ — मासिक शिवरात्रि | देखें |
| अमावस्या | 27 दिस॰ — सोमवती अमावस्या | देखें |
भानु सप्तमी क्या है?
भानु सप्तमी सूर्य की तिथि और सूर्य के वार का दुर्लभ संयोग है। इसे सूर्योदय अर्घ्य, आदित्य हृदयम् और प्रायः एक-दिवसीय व्रत से रखा जाता है। तिथि-वार संयोग पर निर्भर होने से वर्ष में गिनती की ही आती हैं — इस पृष्ठ की तिथियाँ दिल्ली के लिए सटीक गणना की गई हैं।
सूर्य पूजा
सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं और उनकी सप्तमी-विधियाँ परंपरा की प्राचीनतम परतों तक जाती हैं। माघ शुक्ल सप्तमी की रथ सप्तमी वर्ष की सबसे बड़ी सप्तमी है; भानु सप्तमी वही पूजा हर रविवार-सप्तमी संयोग तक विस्तारित करती है।
सूर्योदय का अर्घ्य
मुख्य विधि सरल है और सूर्योदय के समय, सप्तमी तिथि रहते हुए की जाती है। स्नान के बाद भक्त पूर्व की ओर मुख कर अर्घ्य देता है — ताँबे के पात्र से जल, जिसमें प्रायः थोड़ा रोली, लाल पुष्प और अक्षत डाले जाते हैं — और उसे उगते सूर्य के प्रकाश में गिरने दिया जाता है। आदित्य हृदयम् या गायत्री का पाठ किया जाता है, और बहुत से लोग मध्याह्न तक उपवास रखते हैं या एक बार भोजन करते हैं। जहाँ नदी-स्नान की प्रथा है, वह सूर्योदय से पूर्व किया जाता है।
भानु सप्तमी और रथ सप्तमी
भानु सप्तमी सूर्य की तिथि और सूर्य के वार का मिलन है — कोई भी सप्तमी जो रविवार को पड़े। इसलिए यह किसी निश्चित तिथि पर नहीं, वर्ष में कुछ ही बार आती है, और दोनों पक्षों में पड़ सकती है। रथ सप्तमी इससे भिन्न है — वह माघ शुक्ल की एकमात्र वार्षिक सप्तमी है, जो सूर्य के रथ के उत्तरायण की ओर मुड़ने का प्रतीक है। जब भानु सप्तमी उसी माघ सप्तमी पर पड़ती है, तो दोनों साथ मनाई जाती हैं, और उस संयोग को वर्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
महत्त्व
सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं — जिन्हें वास्तव में देखा जा सकता है — और उनकी उपासना परंपरा की प्राचीनतम अविच्छिन्न परतों में है। सप्तमी की विधियाँ स्वास्थ्य और ओज के लिए, संकल्प की स्पष्टता और स्थिरता के लिए, तथा ज्योतिष में निर्बल या पीड़ित सूर्य के बल हेतु रखी जाती हैं, जिन्हें जीवनी-शक्ति, पिता और आत्म-अधिकार का कारक माना जाता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं।
भानु सप्तमी सामग्री
सूर्योदय अर्घ्य से पूर्व ये एकत्र करें:
- अर्घ्य हेतु ताँबे का लोटा
- स्वच्छ जल, उपलब्ध हो तो गंगाजल
- रोली या कुमकुम
- लाल पुष्प
- अक्षत
- घी का दीपक
- धूप
- अर्पण हेतु गुड़ और गेहूँ
- मौसमी फल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिसंबर 2027 में भानु सप्तमी कब है?+
दिसंबर 2027 में दो भानु सप्तमी हैं: भानु सप्तमी — रविवार, 5 दिसंबर 2027; भानु सप्तमी — रविवार, 19 दिसंबर 2027। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।
दिसंबर 2027 में भानु सप्तमी तिथि कब से कब तक है?+
5 दिसंबर: तिथि 4 दिसंबर शाम 6:57 से 5 दिसंबर रात 9:37। 19 दिसंबर: तिथि 19 दिसंबर सुबह 5:37 से 20 दिसंबर रात 3:34। (नई दिल्ली, IST)
2027 में कितनी भानु सप्तमी हैं?+
2027 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 3 भानु सप्तमी हैं — जब-जब सप्तमी तिथि रविवार से मिलती है।
यह विशेष क्यों है?+
सप्तमी तिथि सूर्य की है और रविवार उनका वार; दोनों के संयोग पर सूर्य-पूजा को परंपरा में सूर्यग्रहण-स्नान तुल्य पुण्य माना जाता है।
कैसे मनाई जाती है?+
भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान कर उदित सूर्य को अर्घ्य देते हैं, आदित्य हृदयम् या सूर्य मंत्रों का पाठ करते हैं और नमक-रहित व्रत रखते हैं।
किसलिए रखा जाता है?+
परंपरागत रूप से स्वास्थ्य, तेज और कुंडली में सूर्य-बल हेतु — आस्था के विषय, परंपरा के रूप में प्रस्तुत।
अपनी जन्म कुंडली के आधार पर व्रत, शुभ काल और उपाय पर एआई ज्योतिषी से नि:शुल्क पूछें।