चंद्र मंत्र
समीक्षक: Neha Tripathi (English), संपादक ·
चंद्र बीज मंत्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
Om Śrāṁ Śrīṁ Śrauṁ Saḥ Chandramase Namaḥ
जप संख्या: साधना-काल में कुल 11,000, या प्रतिदिन 108
चंद्र चंद्रमा हैं, और ज्योतिष में मन, भावना और माता के ग्रह। वैदिक ज्योतिष सूर्य राशि नहीं, चंद्र राशि को पहले पढ़ता है, और चंद्रमा का नक्षत्र पूरा दशा-क्रम तय करता है। चंद्र के मंत्र सोमवार और पूर्णिमा को, तथा चंद्र दशा से गुज़रने वालों द्वारा जपे जाते हैं। इस खंड के अन्य ग्रहों की भाँति, यहाँ भी एक मंत्र नहीं, एक समूह है, प्रत्येक का अपना प्रयोग।
चंद्र मंत्र के 4 रूप
"चंद्र मंत्र" कोई एक श्लोक नहीं है। परंपरा में प्रचलित रूप ये हैं, प्रत्येक का अपना प्रयोजन और जप संख्या।
| रूप | आरंभ | जप संख्या |
|---|---|---|
| चंद्र बीज मंत्र | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः | साधना-काल में कुल 11,000, या प्रतिदिन 108 |
| चंद्र बीज मंत्र ("चन्द्राय" रूप) | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः | प्रतिदिन 108 |
| नवग्रह स्तोत्र (चंद्र श्लोक) | दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्। | 108 बार, या सोमवार को 11 बार |
| चंद्र गायत्री मंत्र | ॐ अमृताङ्गाय विद्महे कलारूपाय धीमहि। | 108 बार |
चंद्र बीज मंत्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
Om Śrāṁ Śrīṁ Śrauṁ Saḥ Chandramase Namaḥ
बीज रूप। श्रां, श्रीं और श्रौं शब्दकोशीय अर्थ वाले शब्द नहीं, ग्रह के अनुरूप ध्वनि-बीज हैं, और अंतिम पद चंद्रमा — चन्द्रमस् — को नमस्कार है। चंद्र जप में परंपरागत रूप से यही रूप गिना जाता है।
जप संख्या: साधना-काल में कुल 11,000, या प्रतिदिन 108
पाठ-स्रोत: द्रिक पंचांग, चंद्र मंत्र (चंद्र बीज मंत्र 2)
चंद्र बीज मंत्र ("चन्द्राय" रूप)
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
Om Śrāṁ Śrīṁ Śrauṁ Saḥ Chandrāya Namaḥ
वही बीज मंत्र, जिसमें चंद्रमा को चन्द्रमस् के स्थान पर चंद्र नाम से पुकारा गया है। दोनों रूप प्रचलित हैं और द्रिक पंचांग दोनों देता है; इस खंड का नवग्रह मंत्र पृष्ठ यही रूप प्रयोग करता है। जो रूप आपको दिया गया हो, वही रखें।
जप संख्या: प्रतिदिन 108
पाठ-स्रोत: द्रिक पंचांग, चंद्र मंत्र (चंद्र बीज मंत्र 1)
नवग्रह स्तोत्र (चंद्र श्लोक)
दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥
Dadhiśaṅkhatuṣārābhaṁ Kṣīrodārṇavasambhavam, Namāmi Śaśinaṁ Somaṁ Śambhormukuṭabhūṣaṇam.
व्यास को आरोपित नवग्रह स्तोत्र का चंद्र श्लोक। यह प्रणाम से पहले उनका वर्णन करता है: दही, शंख और हिम के समान श्वेत, क्षीरसागर से उत्पन्न, शिव के मुकुट का आभूषण — और उन्हें शशि और सोम कहकर नमस्कार करता है। कुछ हिंदी संस्करण प्रथम पंक्ति में "क्षीरार्णवसमुद्भवम्" पढ़ते हैं; भाव वही है।
जप संख्या: 108 बार, या सोमवार को 11 बार
पाठ-स्रोत: नवग्रह स्तोत्र, श्लोक 2 (भक्तिभारत, नवग्रह स्तोत्र)
चंद्र गायत्री मंत्र
ॐ अमृताङ्गाय विद्महे कलारूपाय धीमहि। तन्नः सोमः प्रचोदयात्॥
Om Amṛtāṅgāya Vidmahe Kalārūpāya Dhīmahi, Tannaḥ Somaḥ Prachodayāt.
गायत्री छंद पर आधारित। यह उन्हें अमृत-अंग वाले और कला-रूप — वे कलाएँ जिनसे चंद्रमा बढ़ते-घटते हैं — कहकर नाम देता है, फिर प्रार्थना करता है कि सोम बुद्धि को प्रेरित करें। एक अन्य व्यापक रूप से सिखाया जाने वाला पाठ है — "क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि, तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्"।
जप संख्या: 108 बार
पाठ-स्रोत: द्रिक पंचांग, चंद्र मंत्र (चंद्र गायत्री मंत्र)
चंद्र मन से जुड़े हैं, परंतु ये मंत्र चिंता, उदासी या अनिद्रा का उपचार नहीं हैं, और चिकित्सक से मिलने को टालने का कारण नहीं।
जप विधि
दिन: सोमवार, और पूर्णिमा
- सोमवार चंद्र का दिन है; चंद्रोदय के बाद संध्या सामान्य समय है, और महीने में पूर्णिमा सर्वाधिक चुनी जाने वाली तिथि।
- उत्तर-पश्चिम (वायव्य) की ओर मुख रखें, जो दिशा परंपरा चंद्रमा को देती है। चंद्रमा को जल या दूध का अर्घ्य और श्वेत पुष्प अर्पित करें।
- स्फटिक की माला परंपरागत है। 108 के चक्र में गिनें; 11,000 का पूर्ण चंद्र जप साधना के दिनों में बाँटा जाता है।
- श्वेत उनका रंग है, और सोमवार को चावल, दूध और श्वेत वस्त्र सामान्यतः दान किए जाते हैं।
- शुक्ल पक्ष के किसी सोमवार से आरंभ करें और आरंभ के बाद प्रतिदिन वही समय रखें।
लाभ: परंपरा क्या मानती है
चंद्र मंत्र परंपरागत रूप से चंद्र महादशा या अंतर्दशा में, कुंडली में चंद्रमा निर्बल या पीड़ित होने पर, और अशांत दौर में मन को स्थिर रखना चाहने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा जपे जाते हैं। परंपरा चंद्रमा को माता, विश्राम और भावनात्मक संतुलन से जोड़ती है, इसीलिए इसके उपाय कोमल हैं: जल, दूध, श्वेत पुष्प और नियमित संध्या साधना। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं, किसी परिणाम का दावा नहीं।
आपकी कुंडली में चंद्रमा कहाँ है?
चंद्र का विचार आपकी चंद्र राशि, उसके भाव, और चंद्र महादशा या अंतर्दशा चल रही है या नहीं — इनसे होता है। तीनों आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान से निकलते हैं — यह गणना है, अनुमान नहीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंद्र का बीज मंत्र क्या है?
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः। एक अन्य रूप "चन्द्राय नमः" पर समाप्त होता है; दोनों प्रचलित हैं। पूर्ण परंपरागत चंद्र जप साधना-काल में 11,000 का है, या प्रतिदिन 108 की एक माला।
चंद्र मंत्र अंग्रेज़ी में क्या है?
रोमन अक्षरों में बीज मंत्र है — Om Shraam Shreem Shraum Sah Chandramase Namah। नवग्रह स्तोत्र का श्लोक "दधिशङ्खतुषाराभं" से आरंभ होता है — "दही, शंख और हिम के समान श्वेत"। दोनों ऊपर देवनागरी और रोमन में, अर्थ सहित दिए गए हैं।
चंद्र मंत्र किस दिन जपना चाहिए?
सोमवार, जिसका नाम ही चंद्रमा (सोम) पर है, चंद्रोदय के बाद संध्या में। महीने में पूर्णिमा सर्वाधिक चुनी जाती है, और साधना प्रायः शुक्ल पक्ष के सोमवार से आरंभ की जाती है।
चंद्र मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
प्रतिदिन 108 की एक माला सामान्य विधान है। पूर्ण चंद्र जप के लिए बीज मंत्र की परंपरागत कुल संख्या 11,000 है, जो साधना के दिनों में बाँटी जाती है।