सितंबर 2028 में पूर्णिमा
सितंबर 2028 में पूर्णिमा कब है? रविवार, 3 सितंबर — तिथि 3 सितंबर रात 2:53 से 4 सितंबर सुबह 5:18 (नई दिल्ली)।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 3 सित॰ 2028अगली | 3 सितंबर, रात 2:53 | 4 सितंबर, सुबह 5:18 | भाद्रपद पूर्णिमा | रवि | शुक्ल · भाद्रपद |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
सितंबर 2028 में पूर्णिमा का पूरा समय
हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।
| तिथि | आरंभ | समाप्त | अवधि | वार | पक्ष | चंद्र मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 3 सित॰ | 3 सितंबर, रात 2:53 | 4 सितंबर, सुबह 5:18 | 26 घंटे 25 मिनट | रविवार | शुक्ल | भाद्रपद |
इस महीने की हर पूर्णिमा
भाद्रपद पूर्णिमा — 3 सित॰, रविवार को, शुक्ल पक्ष, भाद्रपद मास। तिथि 26 घंटे 25 मिनट चलती है (3 सितंबर रात 2:53 से)।
सितंबर की तुलना बाकी साल से
2028 में पूर्णिमा की तिथि औसतन 23 घंटे 18 मिनट चलती है। सितंबर में यह औसतन 26 घंटे 25 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ लंबी।
साल भर में यह अवधि 20 घंटे 15 मिनट (मार्च) से 26 घंटे 25 मिनट (सितंबर) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।
2028 में कुल 13 पूर्णिमा हैं, जिनमें से 1 इस महीने पड़ती है।
सितंबर 2028 के अन्य व्रत
एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।
| व्रत | तिथियाँ | कैलेंडर |
|---|---|---|
| प्रदोष व्रत | 1 सित॰ — शुक्र प्रदोष · 16 सित॰ — शनि प्रदोष · 30 सित॰ — शनि प्रदोष | देखें |
| संकष्टी चतुर्थी | 7 सित॰ — विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी | देखें |
| मासिक कार्तिगाई | 10 सित॰ — मासिक कार्तिगाई | देखें |
| कालाष्टमी | 11 सित॰ — कालाष्टमी | देखें |
| एकादशी | 15 सित॰ — इंदिरा एकादशी · 29 सित॰ — पापांकुशा एकादशी | देखें |
| मासिक शिवरात्रि | 17 सित॰ — मासिक शिवरात्रि | देखें |
| अमावस्या | 18 सित॰ — महालया (सर्व पितृ) अमावस्या | देखें |
| विनायक चतुर्थी | 21 सित॰ — विनायक चतुर्थी | देखें |
| स्कन्द षष्ठी | 23 सित॰ — स्कन्द षष्ठी | देखें |
| मासिक दुर्गाष्टमी | 26 सित॰ — मासिक दुर्गाष्टमी | देखें |
पूर्णिमा क्या है?
पूर्णिमा पूर्ण चंद्रमा की रात है — शुक्ल (बढ़ते) पक्ष की पंद्रहवीं और अंतिम तिथि, जब चंद्रमा सूर्य के ठीक सामने होकर पूर्ण रूप से दिखाई देता है। यह प्रत्येक चांद्र मास में एक बार आती है, इस प्रकार वर्ष में लगभग बारह से तेरह पूर्णिमाएँ आती हैं। परंपरा में इसे पूर्णता, पूर्णत्व, उज्ज्वलता और सत्व (शुद्धता) का समय मानकर अत्यंत शुभ माना जाता है। अनेक भक्त पूर्णिमा व्रत रखते और चंद्रमा का पूजन करते हैं।
पूर्णिमा और चांद्र मास
पूर्ण चंद्रमा हिंदू पंचांग में एक मोड़ है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत प्रणाली में चांद्र मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है; जबकि दक्षिण और पश्चिम की अमांत प्रणाली में पूर्णिमा मास के मध्य में पड़ती है। प्रत्येक मास का नाम उस नक्षत्र पर रखा जाता है जिस पर पूर्णिमा के आसपास चंद्रमा स्थित होता है — चैत्र, वैशाख, आषाढ़ आदि इसी आधार पर नामित हैं।
सत्यनारायण व्रत और पूर्णिमा पूजन
पूर्णिमा सत्यनारायण पूजा और कथा के लिए सबसे प्रिय दिनों में से एक है, जिसमें भक्त भगवान विष्णु को सत्यनारायण रूप में पूजते, पारंपरिक कथा सुनते और प्रसाद बांटते हैं। अनेक लोग पूर्णिमा व्रत रखते हैं, जिसे चंद्रमा के दर्शन या पूजन के बाद खोला जाता है। विवाहित स्त्रियां कुछ पूर्णिमा व्रत रखती हैं। परंपरा इन्हें भक्ति, कृतज्ञता और संयम के भाव के रूप में देखती है, न कि निश्चित फल की गारंटी के रूप में।
वर्ष की प्रमुख पूर्णिमाएँ
कई पूर्णिमाएँ विशेष महत्व रखती हैं। आषाढ़ की गुरु पूर्णिमा अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता में मनाई जाती है। वैशाख की बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जन्म का दिन है। आश्विन की शरद पूर्णिमा पर खीर चांदनी में रखी जाती है, जिसे परंपरा में अमृत बरसाने वाली कहा जाता है। कार्तिक पूर्णिमा, जिसे देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है, पवित्र गंगा स्नान का दिन है। फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होता है।
पूर्णिमा पर क्या किया जाता है
पारंपरिक आचरण शुद्धता और दान पर केंद्रित हैं। भक्त ब्राह्म मुहूर्त में पवित्र स्नान करते हैं, यथासंभव किसी पवित्र नदी में, व्रत रखते हैं और जरूरतमंदों को दान करते हैं। चंद्रमा और विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा और रात भर जागकर भक्ति करना आम है। ये श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव से किए जाने वाले पारंपरिक कार्य हैं, जिन्हें फल के वादे के रूप में नहीं, बल्कि परंपरा के रूप में सम्मानित किया जाता है।
सत्यनारायण व्रत कथा
परंपरागत रूप से पूर्णिमा पर पढ़ी जाने वाली सत्यनारायण कथा भगवान विष्णु को सत्यनारायण, अर्थात सत्य के स्वरूप, के रूप में भक्ति की शिक्षा देती है। कथा के अनुसार, नारद मुनि विष्णु से इस व्रत को सीखते हैं और संसार में इसका प्रचार करते हैं। इसकी कथा एक निर्धन ब्राह्मण, एक लकड़हारे, राजा उल्कामुख, और विशेष रूप से साधु वैश्य व्यापारी और उसकी पुत्री कलावती के जीवन को दर्शाती है। श्रद्धा से व्रत रखने और प्रसाद का सम्मान करने पर सभी की उन्नति होती है, परंतु व्रत की उपेक्षा या प्रसाद के अनादर पर उन्हें कष्ट झेलने पड़ते हैं — धन की हानि, जहाज़ का डूबना, कारावास — और भक्ति के साथ लौटने पर उनका पुनः उद्धार होता है। इससे यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची श्रद्धा और प्रसाद का सम्मान कल्याण लाते हैं, जबकि उपेक्षा और अहंकार पतन का कारण बनते हैं।
सत्यनारायण पूजा सामग्री
एक सरल सत्यनारायण पूजा के लिए कुछ पारंपरिक वस्तुएँ श्रद्धापूर्वक एकत्र की जाती हैं:
- मंडप के लिए केले का पौधा या पत्ते
- सत्यनारायण (विष्णु) की मूर्ति या चित्र
- पंचामृत
- तुलसी के पत्ते
- शीरा / सपाथा प्रसाद (गेहूँ का आटा, घी, चीनी और केला)
- रोली और अक्षत
- पान के पत्ते और सुपारी
- ऋतु-फल, विशेषकर केला
- घी का दीपक
- धूप/अगरबत्ती
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सितंबर 2028 में पूर्णिमा कब है?+
सितंबर 2028 में पूर्णिमा है: भाद्रपद पूर्णिमा — रविवार, 3 सितंबर 2028। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।
सितंबर 2028 में पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?+
3 सितंबर: तिथि 3 सितंबर रात 2:53 से 4 सितंबर सुबह 5:18। (नई दिल्ली, IST)
2028 में कितनी पूर्णिमा हैं?+
2028 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 13 पूर्णिमा हैं — प्रत्येक चंद्र मास में एक पूर्ण चाँद (अधिक मास में एक अतिरिक्त)।
पूर्णिमा पर क्या किया जाता है?+
पूर्णिमा व्रत, स्नान, सत्यनारायण पूजा और दान के साथ मनाई जाती है। कई पूर्णिमाएँ प्रमुख त्योहार भी हैं।
कौन-सी पूर्णिमाएँ त्योहार हैं?+
बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख), गुरु पूर्णिमा (आषाढ़), रक्षाबंधन (श्रावण), शरद पूर्णिमा (आश्विन) और कार्तिक पूर्णिमा सर्वाधिक मनाई जाती हैं।
पूर्णिमा व्रत कैसे किया जाता है?+
व्रत प्रायः सूर्योदय से रखा जाता है और संध्या को चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है। कई लोग सत्यनारायण कथा व पूजा करते हैं, स्नान व दान करते हैं। उपवास निर्जला से फलाहार तक — व्यक्तिगत चुनाव।
पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा का महत्व क्या है?+
पूर्ण चाँद सत्यनारायण व्रत कथा के लिए शुभ माना जाता है, जो कल्याण, कृतज्ञता व मनोकामना पूर्ति हेतु की जाती है। यह अन्य दिनों में भी हो सकती है, पर पूर्णिमा पारंपरिक रूप से प्रिय है।
पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?+
कई पूर्णिमाओं (विशेषकर शरद पूर्णिमा) पर भक्त पूर्ण चाँद को अर्घ्य देते हैं और चाँदनी में खीर रखते हैं, यह मानते हुए कि उसकी किरणें शीतल व पोषक हैं — यह भक्ति परंपरा है, गारंटीशुदा प्रभाव नहीं।
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