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मार्च 2028 में मासिक कार्तिगाई

मार्च 2028 में मासिक कार्तिगाई कब है? इस महीने दो बार — शुक्रवार, 3 मार्च — कृत्तिका नक्षत्र 2 मार्च शाम 7:18 से 3 मार्च रात 8:10; और गुरुवार, 30 मार्च — कृत्तिका नक्षत्र 30 मार्च रात 12:50 से 31 मार्च रात 1:47 (नई दिल्ली)।

मासिक कार्तिगाई की अगली तिथि
मासिक कार्तिगाई
484 दिन में · शुक्रवार, 3 मार्च 2028 →
तिथिकृत्तिका आरंभकृत्तिका समाप्तनामदिनपक्ष / मास (पूर्णिमांत)
3 मार्च 2028अगली2 मार्च, शाम 7:183 मार्च, रात 8:10मासिक कार्तिगाईशुक्रशुक्ल · फाल्गुन
30 मार्च 202830 मार्च, रात 12:5031 मार्च, रात 1:47मासिक कार्तिगाईगुरुशुक्ल · चैत्र

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।

मासिक कार्तिगाई कब है — आगामी तिथियाँमासिक कार्तिगाई अप्रैल 2028 →पूरे 2028 की मासिक कार्तिगाई देखें

मार्च 2028 में मासिक कार्तिगाई का पूरा समय

हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।

तिथिआरंभसमाप्तअवधिवारपक्षचंद्र मास (पूर्णिमांत)
3 मार्च2 मार्च, शाम 7:183 मार्च, रात 8:1024 घंटे 52 मिनटशुक्रवारशुक्लफाल्गुन
30 मार्च30 मार्च, रात 12:5031 मार्च, रात 1:4724 घंटे 57 मिनटगुरुवारशुक्लचैत्र

इस महीने की हर मासिक कार्तिगाई

मासिक कार्तिगाई — 3 मार्च, शुक्रवार को, शुक्ल पक्ष, फाल्गुन मास। कृत्तिका नक्षत्र 24 घंटे 52 मिनट चलता है (2 मार्च शाम 7:18 से)।

मासिक कार्तिगाई — 30 मार्च, गुरुवार को, शुक्ल पक्ष, चैत्र मास। कृत्तिका नक्षत्र 24 घंटे 57 मिनट चलता है (30 मार्च रात 12:50 से)।

मार्च की तुलना बाकी साल से

2028 में मासिक कार्तिगाई की तिथि औसतन 24 घंटे 50 मिनट चलती है। मार्च में यह औसतन 24 घंटे 54 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से सामान्य।

साल भर में यह अवधि 23 घंटे 29 मिनट (जनवरी) से 25 घंटे 49 मिनट (अक्टूबर) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।

2028 में कुल 14 मासिक कार्तिगाई हैं, जिनमें से 2 इस महीने पड़ती हैं।

मार्च 2028 के अन्य व्रत

एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।

व्रततिथियाँकैलेंडर
स्कन्द षष्ठी2 मार्च — स्कन्द षष्ठी · 31 मार्च — स्कन्द षष्ठीदेखें
मासिक दुर्गाष्टमी4 मार्च — मासिक दुर्गाष्टमीदेखें
एकादशी7 मार्च — आमलकी एकादशी · 21 मार्च — पापमोचनी एकादशीदेखें
प्रदोष व्रत8 मार्च — बुध प्रदोष · 23 मार्च — गुरु प्रदोषदेखें
पूर्णिमा10 मार्च — फाल्गुन पूर्णिमादेखें
संकष्टी चतुर्थी13 मार्च — भालचंद्र संकष्टी चतुर्थीदेखें
कालाष्टमी17 मार्च — कालाष्टमीदेखें
मासिक शिवरात्रि24 मार्च — मासिक शिवरात्रिदेखें
अमावस्या26 मार्च — चैत्र अमावस्यादेखें
विनायक चतुर्थी30 मार्च — विनायक चतुर्थीदेखें

मासिक कार्तिगाई क्या है?

मासिक कार्तिगाई चंद्र की कृत्तिका (कृत्तिका-मंडल) में मासिक वापसी का पर्व है। संध्या को द्वार पर दीप-पंक्तियाँ इसकी पहचान हैं — मुरुगन और ज्योति-स्तंभ रूपी शिव को अर्पित प्रकाश। यह नक्षत्र-आधारित पर्व है, तिथि-आधारित नहीं, इसीलिए इसकी तिथियाँ तिथि-व्रतों से भिन्न चलती हैं।

कार्तिगाई दीपम्

वर्ष की प्रमुख कार्तिगाई तमिल कार्तिगाई मास में आती है, जब कृत्तिका पूर्णिमा से मिलती है। तिरुवण्णामलै में अरुणाचल पर्वत पर महादीपम् जलाया जाता है — शिव के अनंत ज्योति-स्तंभ रूप में प्रकट होने की स्मृति — तमिल साहित्य के प्राचीनतम पर्वों में से एक।

छह कृत्तिका माताएँ

परंपरा कहती है कि मुरुगन शिव के तृतीय नेत्र की छह चिंगारियों से प्रकट हुए, और छह कृत्तिका बहनों — कृत्तिका-मंडल के तारों — ने उन छह शिशुओं का पालन किया, जो बाद में एक षण्मुख बालक अरुमुगम के रूप में एक हो गए। इसी कारण कृत्तिका नक्षत्र उनका जन्म-नक्षत्र माना जाता है, और चंद्रमा का कृत्तिका में मासिक लौटना उनका दिन माना जाता है। इसीलिए मासिक कार्तिगाई तिथि नहीं, नक्षत्र के अनुसार चलती है, और हर मास पक्ष के सापेक्ष खिसकती रहती है।

दिन कैसे मनाया जाता है

यह कठोर उपवास नहीं, दीपों का पर्व है। भक्त स्नान करते हैं, दिनभर हल्का या फलाहार लेते हैं, और संध्या को द्वार, आँगन तथा पूजा-स्थान के सामने तेल के दीपों की पंक्तियाँ जलाते हैं। मुरुगन की — और अनेक घरों में शिव की भी — घी के दीपक, पुष्प और फल से पूजा की जाती है, फिर अर्चना और नाम-जप होता है। तमिल परंपरा के मंदिरों की दीवारों और गोपुरों पर दीप सजाए जाते हैं।

महत्त्व

दीपों के दो अर्थ साथ चलते हैं: वे छह चिंगारियों से मुरुगन के प्राकट्य का सम्मान करते हैं, और शिव के उस अनंत ज्योति-स्तंभ — लिंगोद्भव — का स्मरण कराते हैं जिसका आदि-अंत ब्रह्मा और विष्णु नहीं पा सके। यह दिन स्वास्थ्य, बल और रक्षा के लिए रखा जाता है, और प्रकाश को अज्ञान हरने वाले ज्ञान के रूप में पढ़ा जाता है। वर्ष की प्रमुख कार्तिगाई तमिल कार्तिगाई मास में आती है, जब कृत्तिका पूर्णिमा से मिलती है और तिरुवण्णामलै में अण्णामलै पर महादीप प्रज्वलित होता है।

मासिक कार्तिगाई सामग्री

संध्या दीप जलाने से पूर्व ये एकत्र करें:

  • तेल के दीपक (अगल विलक्कु) और बत्तियाँ
  • तिल या अरंडी का तेल, तथा मुख्य दीपक हेतु घी
  • मुरुगन का चित्र, और शिव का यदि हो
  • ताज़े पुष्प
  • मौसमी फल और नारियल
  • विभूति और चंदन
  • धूप
  • पान के पत्ते और सुपारी
  • नैवेद्य हेतु गुड़ या अप्पम
अन्य व्रत कैलेंडर
एकादशी 2028प्रदोष व्रत 2028अमावस्या 2028पूर्णिमा 2028संकष्टी चतुर्थी 2028मासिक शिवरात्रि 2028विनायक चतुर्थी 2028स्कन्द षष्ठी 2028मासिक दुर्गाष्टमी 2028कालाष्टमी 2028भानु सप्तमी 2028

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्च 2028 में मासिक कार्तिगाई कब है?+

मार्च 2028 में दो मासिक कार्तिगाई हैं: मासिक कार्तिगाई — शुक्रवार, 3 मार्च 2028; मासिक कार्तिगाई — गुरुवार, 30 मार्च 2028। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

मार्च 2028 में मासिक कार्तिगाई कृत्तिका नक्षत्र कब से कब तक है?+

3 मार्च: कृत्तिका नक्षत्र 2 मार्च शाम 7:18 से 3 मार्च रात 8:10। 30 मार्च: कृत्तिका नक्षत्र 30 मार्च रात 12:50 से 31 मार्च रात 1:47। (नई दिल्ली, IST)

2028 में कितनी मासिक कार्तिगाई हैं?+

2028 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 14 मासिक कार्तिगाई दिवस हैं — जब-जब चंद्र कृत्तिका नक्षत्र में गोचर करता है।

कृत्तिका नक्षत्र ही क्यों?+

कृत्तिका मुरुगन का जन्म-नक्षत्र है — छह कृत्तिकाओं ने षडानन कार्तिकेय का पालन किया — इसलिए चंद्र के कृत्तिका में आने का दिन उन्हें समर्पित है।

कार्तिगाई दीपम् क्या है?+

तमिल कार्तिगाई मास (नवंबर–दिसंबर) की वार्षिक कार्तिगाई, जब कृत्तिका पूर्णिमा से मिलती है, कार्तिगाई दीपम् है — हर घर में दीप-पंक्तियाँ और तिरुवण्णामलै के अरुणाचल पर महादीपम्।

दिन कैसे मनाया जाता है?+

भक्त संध्या को तेल के दीप जलाते हैं, मुरुगन मंदिर जाते हैं और सरल उपवास रखते हैं। यह मुख्यतः तमिल परंपरा है जो दक्षिण भारत भर में मनाई जाती है।

मासिक कार्तिगाई आपकी कुंडली के लिए क्या कहती है?

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