कल का पंचांग
कल का पंचांग — वाराणसी
कल रविवार, 8 नवंबर 2026 को वाराणसी में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी और राहु काल 03:51 pm–05:14 pm (IST) रहेगा।
कल कौन-सा व्रत है?
कल का दिन चौघड़िया
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कल का पंचांग क्यों देखें?
कल का पंचांग पहले से देखने पर आप महत्वपूर्ण कार्य को शुभ मुहूर्त में रख सकते हैं और अशुभ काल से बच सकते हैं। कल के सबसे शुभ समय हैं ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व, पूजा व अध्ययन हेतु), मध्याह्न का अभिजित मुहूर्त, और अमृत काल; नई शुरुआत के लिए टालने योग्य काल हैं राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल। किसी विशेष कार्य हेतु ऊपर दिए दिन चौघड़िया से शुभ समय चुनें। सभी समय वाराणसी के लिए हैं और नगर अनुसार थोड़े बदलते हैं।
ऊपर दिया प्रत्येक तत्व क्या दर्शाता है
- तिथि — चंद्र दिवस — व्रत, त्योहार व शुभ कार्य इसी पर तय होते हैं।
- नक्षत्र — चंद्र जिस नक्षत्र में है — कार्य की सफलता हेतु उपयुक्त नक्षत्र देखा जाता है।
- योग व करण — सूर्य-चंद्र के संयोग से बने, जो दिन की गुणवत्ता को और सूक्ष्म करते हैं।
- अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का शुभ काल — जब अन्य कोई मुहूर्त न हो तब उत्तम विकल्प।
- राहु काल / यमगण्ड / गुलिक — अशुभ काल — नए शुभ कार्य की शुरुआत इनमें टालें।
- चौघड़िया — दिन के शुभ/अशुभ खंड — छोटे कार्य हेतु शुभ खंड चुनें।
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वाराणसी में आज से कल क्या बदलता है
तिथि आज त्रयोदशी से बदलकर कल चतुर्दशी हो जाती है। चंद्रमा चित्रा से निकलकर स्वाती में प्रवेश करता है।
सूर्योदय 06:10 am से बदलकर 06:11 am होता है, और राहु काल 08:56 am–10:19 am से 03:51 pm–05:14 pm। राहु काल इसलिए बदलता है क्योंकि यह सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन का आठवाँ भाग है, और कौन-सा भाग होगा यह वार पर निर्भर करता है — इसलिए यह क्रमशः नहीं, छलाँग लगाकर बदलता है।
वाराणसी में कल के आठ भाग
राहु काल कोई निश्चित घड़ी का समय नहीं है — यह दिन के उजाले का एक हिस्सा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, जिनमें एक भाग राहु का, एक यम का और एक गुलिक का होता है। कल वाराणसी में दिन 06:11 am से 05:14 pm तक है, इसलिए हर भाग लगभग 83 मिनट का है।
| भाग | समय (IST) | स्वामी |
|---|---|---|
| 1 | 06:11 am – 07:34 am | — |
| 2 | 07:34 am – 08:57 am | — |
| 3 | 08:57 am – 10:20 am | — |
| 4 | 10:20 am – 11:43 am | — |
| 5 | 11:43 am – 01:06 pm | यमगण्ड |
| 6 | 01:06 pm – 02:29 pm | — |
| 7 | 02:29 pm – 03:51 pm | गुलिक काल |
| 8 | 03:51 pm – 05:14 pm | राहु काल |
भागों की सीमाएँ ऊपर दिए गए उसी सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाली गई हैं, इसलिए दोनों समय आपस में मेल खाते हैं।
वार के अनुसार राहु काल
आठ भागों में से कौन-सा भाग राहु का होगा, यह वार से तय होता है, तिथि से नहीं। नियम बस इतना ही है — बाकी सब आपके स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त का गणित है, इसीलिए हर शहर का समय अलग होता है और वर्ष भर बदलता रहता है।
| वार | राहु काल | यमगण्ड | गुलिक |
|---|---|---|---|
| रविवार (आज) | आठवाँ भाग | पाँचवाँ भाग | सातवाँ भाग |
| सोमवार | दूसरा भाग | चौथा भाग | छठा भाग |
| मंगलवार | सातवाँ भाग | तीसरा भाग | पाँचवाँ भाग |
| बुधवार | पाँचवाँ भाग | दूसरा भाग | चौथा भाग |
| गुरुवार | छठा भाग | पहला भाग | तीसरा भाग |
| शुक्रवार | चौथा भाग | सातवाँ भाग | दूसरा भाग |
| शनिवार | तीसरा भाग | छठा भाग | पहला भाग |
राहु काल, यमगण्ड और गुलिक में अंतर
तीनों अशुभ काल एक ही विधि से निकाले जाते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें एक ही मान लेते हैं। परंपरा में ये अलग हैं। राहु काल सबसे अधिक देखा जाता है और यह विशेष रूप से "आरंभ" का नियम है — यह शुरू करने से रोकता है, चलते हुए काम से नहीं। यमगण्ड को बाधा से जोड़ा जाता है और मुख्यतः यात्रा तथा समय पर पहुँचने वाले कार्यों में टाला जाता है। गुलिक, जो शनि-पुत्र का भाग है, पुनरावृत्ति का भाव रखता है — इसमें किया कार्य दोहराया जाता है, इसलिए ऋण, विवाद और अंत्येष्टि में इसे टाला जाता है, जबकि दोहराने योग्य शुभ आदतों के लिए इसे स्वीकार किया जाता है।
एक व्यावहारिक बात और: राहु काल शुभ आरंभ पर लागू होता है, साधारण जीवन पर नहीं। दैनिक कार्य, अध्ययन, पहले से चल रही यात्रा, औषधि, भोजन और आपात स्थिति किसी भी पारंपरिक मत में इससे बंधे नहीं हैं। यदि कोई कार्य वास्तव में टल नहीं सकता, तो उसे उसी दिन अभिजित मुहूर्त में आरंभ करने का विधान है — ऊपर दिया गया दोपहर का छोटा समय, जिसे परंपरा अधिकांश दोषों पर भारी मानती है।
उसी दिन के शुभ समय के लिए देखें आज का चौघड़िया, जो दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटकर हर भाग का नाम बताता है।
ये समय वाराणसी के लिए ही क्यों
वाराणसी में कल सूर्योदय 06:11 am पर है। इस पृष्ठ का हर समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के अंतराल का एक अंश है, इसलिए यह तिथि के साथ-साथ स्थान से भी बदलता है। पूरे भारत में एक ही घड़ी चलती है, जो 82.5°E देशांतर पर आधारित है, पर वाराणसी उससे लगभग 0.5° पूर्व है — सौर दृष्टि से लगभग 2 मिनट आगे। इसलिए सूर्य वाराणसी के ऊपर वही स्थिति घड़ी के हिसाब से 2 मिनट पहले लेता है, और आठों भाग उसी के साथ खिसक जाते हैं। यही कारण है कि एक शहर की तालिका किसी दूसरे शहर के लिए सही नहीं होती, और यह पृष्ठ वाराणसी के अपने अक्षांश-देशांतर से गणना करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाराणसी में कल कौन-सी तिथि है?
कल (रविवार, 8 नवंबर 2026) चतुर्दशी तिथि (कृष्ण पक्ष) है, वाराणसी के लिए, जो 11:28 am पर समाप्त होगी।
वाराणसी में कल का राहु काल कब है?
कल राहु काल 03:51 pm–05:14 pm (IST) रहेगा — महत्वपूर्ण नए कार्य हेतु टालें।