Astrologger
ENहिंदी
AI से पूछें
जून 2026 बीत चुका है
भानु सप्तमी की अगली तिथि: रविवार, 8 अगस्त 2027
अगस्त 2027 की भानु सप्तमी तिथि व समय →आगामी सभी भानु सप्तमी तिथियाँ →2026 की तिथियाँ →
पंचांग व्रत कैलेंडर

जून 2026 में भानु सप्तमी

जून 2026 में भानु सप्तमी कब है? इस महीने दो बार — रविवार, 7 जून — तिथि 7 जून रात 2:41 से 8 जून रात 3:25; और रविवार, 21 जून — तिथि 20 जून दोपहर 3:47 से 21 जून दोपहर 3:21 (नई दिल्ली)।

तिथितिथि आरंभतिथि समाप्तनामदिनपक्ष / मास (पूर्णिमांत)
7 जून 20267 जून, रात 2:418 जून, रात 3:25भानु सप्तमीरविकृष्ण · ज्येष्ठ
21 जून 202620 जून, दोपहर 3:4721 जून, दोपहर 3:21भानु सप्तमीरविशुक्ल · ज्येष्ठ

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।

भानु सप्तमी कब है — आगामी तिथियाँपूरे 2026 की भानु सप्तमी देखें

जून 2026 में भानु सप्तमी का पूरा समय

हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।

तिथिआरंभसमाप्तअवधिवारपक्षचंद्र मास (पूर्णिमांत)
7 जून7 जून, रात 2:418 जून, रात 3:2524 घंटे 44 मिनटरविवारकृष्णज्येष्ठ
21 जून20 जून, दोपहर 3:4721 जून, दोपहर 3:2123 घंटे 34 मिनटरविवारशुक्लज्येष्ठ

इस महीने की हर भानु सप्तमी

भानु सप्तमी — 7 जून, रविवार को, कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ मास। तिथि 24 घंटे 44 मिनट चलती है (7 जून रात 2:41 से)।

भानु सप्तमी — 21 जून, रविवार को, शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ मास। तिथि 23 घंटे 34 मिनट चलती है (20 जून दोपहर 3:47 से)।

जून की तुलना बाकी साल से

2026 में भानु सप्तमी की तिथि औसतन 24 घंटे 14 मिनट चलती है। जून में यह औसतन 24 घंटे 9 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से सामान्य।

साल भर में यह अवधि 21 घंटे 54 मिनट (नवंबर) से 26 घंटे 33 मिनट (अक्टूबर) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।

2026 में कुल 6 भानु सप्तमी हैं, जिनमें से 2 इस महीने पड़ती हैं।

जून 2026 के अन्य व्रत

एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।

व्रततिथियाँकैलेंडर
संकष्टी चतुर्थी3 जून — अधिक ज्येष्ठ संकष्टी चतुर्थीदेखें
कालाष्टमी8 जून — अधिक ज्येष्ठ कालाष्टमीदेखें
एकादशी11 जून — परमा एकादशी · 25 जून — निर्जला एकादशीदेखें
प्रदोष व्रत12 जून — शुक्र प्रदोष · 27 जून — शनि प्रदोषदेखें
मासिक शिवरात्रि13 जून — अधिक ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रिदेखें
मासिक कार्तिगाई13 जून — मासिक कार्तिगाईदेखें
अमावस्या15 जून — अधिक ज्येष्ठ अमावस्यादेखें
विनायक चतुर्थी18 जून — विनायक चतुर्थीदेखें
स्कन्द षष्ठी19 जून — स्कन्द षष्ठीदेखें
मासिक दुर्गाष्टमी22 जून — मासिक दुर्गाष्टमीदेखें
पूर्णिमा29 जून — ज्येष्ठ पूर्णिमादेखें

भानु सप्तमी क्या है?

भानु सप्तमी सूर्य की तिथि और सूर्य के वार का दुर्लभ संयोग है। इसे सूर्योदय अर्घ्य, आदित्य हृदयम् और प्रायः एक-दिवसीय व्रत से रखा जाता है। तिथि-वार संयोग पर निर्भर होने से वर्ष में गिनती की ही आती हैं — इस पृष्ठ की तिथियाँ दिल्ली के लिए सटीक गणना की गई हैं।

सूर्य पूजा

सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं और उनकी सप्तमी-विधियाँ परंपरा की प्राचीनतम परतों तक जाती हैं। माघ शुक्ल सप्तमी की रथ सप्तमी वर्ष की सबसे बड़ी सप्तमी है; भानु सप्तमी वही पूजा हर रविवार-सप्तमी संयोग तक विस्तारित करती है।

सूर्योदय का अर्घ्य

मुख्य विधि सरल है और सूर्योदय के समय, सप्तमी तिथि रहते हुए की जाती है। स्नान के बाद भक्त पूर्व की ओर मुख कर अर्घ्य देता है — ताँबे के पात्र से जल, जिसमें प्रायः थोड़ा रोली, लाल पुष्प और अक्षत डाले जाते हैं — और उसे उगते सूर्य के प्रकाश में गिरने दिया जाता है। आदित्य हृदयम् या गायत्री का पाठ किया जाता है, और बहुत से लोग मध्याह्न तक उपवास रखते हैं या एक बार भोजन करते हैं। जहाँ नदी-स्नान की प्रथा है, वह सूर्योदय से पूर्व किया जाता है।

भानु सप्तमी और रथ सप्तमी

भानु सप्तमी सूर्य की तिथि और सूर्य के वार का मिलन है — कोई भी सप्तमी जो रविवार को पड़े। इसलिए यह किसी निश्चित तिथि पर नहीं, वर्ष में कुछ ही बार आती है, और दोनों पक्षों में पड़ सकती है। रथ सप्तमी इससे भिन्न है — वह माघ शुक्ल की एकमात्र वार्षिक सप्तमी है, जो सूर्य के रथ के उत्तरायण की ओर मुड़ने का प्रतीक है। जब भानु सप्तमी उसी माघ सप्तमी पर पड़ती है, तो दोनों साथ मनाई जाती हैं, और उस संयोग को वर्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

महत्त्व

सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं — जिन्हें वास्तव में देखा जा सकता है — और उनकी उपासना परंपरा की प्राचीनतम अविच्छिन्न परतों में है। सप्तमी की विधियाँ स्वास्थ्य और ओज के लिए, संकल्प की स्पष्टता और स्थिरता के लिए, तथा ज्योतिष में निर्बल या पीड़ित सूर्य के बल हेतु रखी जाती हैं, जिन्हें जीवनी-शक्ति, पिता और आत्म-अधिकार का कारक माना जाता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं।

भानु सप्तमी सामग्री

सूर्योदय अर्घ्य से पूर्व ये एकत्र करें:

  • अर्घ्य हेतु ताँबे का लोटा
  • स्वच्छ जल, उपलब्ध हो तो गंगाजल
  • रोली या कुमकुम
  • लाल पुष्प
  • अक्षत
  • घी का दीपक
  • धूप
  • अर्पण हेतु गुड़ और गेहूँ
  • मौसमी फल
अन्य व्रत कैलेंडर
एकादशी 2026प्रदोष व्रत 2026अमावस्या 2026पूर्णिमा 2026संकष्टी चतुर्थी 2026मासिक शिवरात्रि 2026विनायक चतुर्थी 2026स्कन्द षष्ठी 2026मासिक दुर्गाष्टमी 2026कालाष्टमी 2026मासिक कार्तिगाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 में भानु सप्तमी कब है?+

जून 2026 में दो भानु सप्तमी हैं: भानु सप्तमी — रविवार, 7 जून 2026; भानु सप्तमी — रविवार, 21 जून 2026। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

जून 2026 में भानु सप्तमी तिथि कब से कब तक है?+

7 जून: तिथि 7 जून रात 2:41 से 8 जून रात 3:25। 21 जून: तिथि 20 जून दोपहर 3:47 से 21 जून दोपहर 3:21। (नई दिल्ली, IST)

2026 में कितनी भानु सप्तमी हैं?+

2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 6 भानु सप्तमी हैं — जब-जब सप्तमी तिथि रविवार से मिलती है।

यह विशेष क्यों है?+

सप्तमी तिथि सूर्य की है और रविवार उनका वार; दोनों के संयोग पर सूर्य-पूजा को परंपरा में सूर्यग्रहण-स्नान तुल्य पुण्य माना जाता है।

कैसे मनाई जाती है?+

भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान कर उदित सूर्य को अर्घ्य देते हैं, आदित्य हृदयम् या सूर्य मंत्रों का पाठ करते हैं और नमक-रहित व्रत रखते हैं।

किसलिए रखा जाता है?+

परंपरागत रूप से स्वास्थ्य, तेज और कुंडली में सूर्य-बल हेतु — आस्था के विषय, परंपरा के रूप में प्रस्तुत।

भानु सप्तमी आपकी कुंडली के लिए क्या कहती है?

अपनी जन्म कुंडली के आधार पर व्रत, शुभ काल और उपाय पर एआई ज्योतिषी से नि:शुल्क पूछें।

एआई ज्योतिषी से पूछें