अप्रैल 2027 में कालाष्टमी
अप्रैल 2027 में कालाष्टमी कब है? बुधवार, 28 अप्रैल — तिथि 28 अप्रैल दोपहर 12:31 से 29 अप्रैल दोपहर 3:02 (नई दिल्ली)।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 28 अप्रैल 2027अगली | 28 अप्रैल, दोपहर 12:31 | 29 अप्रैल, दोपहर 3:02 | कालाष्टमी | बुध | कृष्ण · वैशाख |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
अप्रैल 2027 में कालाष्टमी का पूरा समय
हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।
| तिथि | आरंभ | समाप्त | अवधि | वार | पक्ष | चंद्र मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 28 अप्रैल | 28 अप्रैल, दोपहर 12:31 | 29 अप्रैल, दोपहर 3:02 | 26 घंटे 31 मिनट | बुधवार | कृष्ण | वैशाख |
इस महीने की हर कालाष्टमी
कालाष्टमी — 28 अप्रैल, बुधवार को, कृष्ण पक्ष, वैशाख मास। तिथि 26 घंटे 31 मिनट चलती है (28 अप्रैल दोपहर 12:31 से)।
अप्रैल की तुलना बाकी साल से
2027 में कालाष्टमी की तिथि औसतन 24 घंटे 10 मिनट चलती है। अप्रैल में यह औसतन 26 घंटे 31 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ लंबी।
साल भर में यह अवधि 22 घंटे 2 मिनट (नवंबर) से 26 घंटे 31 मिनट (अप्रैल) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।
2027 में कुल 12 कालाष्टमी हैं, जिनमें से 1 इस महीने पड़ती है।
अप्रैल 2027 के अन्य व्रत
एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।
| व्रत | तिथियाँ | कैलेंडर |
|---|---|---|
| एकादशी | 2 अप्रैल — पापमोचनी एकादशी · 17 अप्रैल — कामदा एकादशी | देखें |
| प्रदोष व्रत | 4 अप्रैल — रवि प्रदोष · 18 अप्रैल — रवि प्रदोष | देखें |
| मासिक शिवरात्रि | 5 अप्रैल — मासिक शिवरात्रि | देखें |
| अमावस्या | 6 अप्रैल — भौमवती अमावस्या | देखें |
| मासिक कार्तिगाई | 9 अप्रैल — मासिक कार्तिगाई | देखें |
| विनायक चतुर्थी | 10 अप्रैल — विनायक चतुर्थी | देखें |
| स्कन्द षष्ठी | 12 अप्रैल — स्कन्द षष्ठी | देखें |
| मासिक दुर्गाष्टमी | 14 अप्रैल — मासिक दुर्गाष्टमी | देखें |
| पूर्णिमा | 20 अप्रैल — चैत्र पूर्णिमा | देखें |
| संकष्टी चतुर्थी | 24 अप्रैल — विकट संकष्टी चतुर्थी | देखें |
कालाष्टमी क्या है?
कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की मासिक रात्रि है। भैरव भय-निवारक, अन्याय के दंडक और काल के स्वामी रूप में पूजित हैं; उनका व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, अनुशासन और राहु-शनि जनित कष्टों से राहत हेतु रखा जाता है।
भैरव पूजा
पूजा संध्या या रात्रि में होती है — सरसों-तेल का दीपक, काले तिल और आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् इसका हृदय हैं। इस दिन भैरव के सहचर श्वानों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
कालाष्टमी व्रत विधि
व्रत सूर्योदय से रखा जाता है और मुख्य पूजा अंधेरे के बाद होती है, क्योंकि भैरव रात्रि के देवता हैं। भक्त स्नान कर संकल्प लेते हैं और संध्या या मध्यरात्रि में सरसों-तेल का दीपक, काले तिल, उड़द और पुष्प अर्पित कर पूजा करते हैं। आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् सामान्य पाठ है। कुत्तों को भोजन कराना अनुष्ठान का अंग माना जाता है, क्योंकि श्वान भैरव का वाहन है। अगली सुबह व्रत खोला जाता है। परंपरा घर और क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती है।
व्रत क्यों रखा जाता है
भैरव को भय-निवारक और व्यवस्था के रक्षक के रूप में देखा जाता है, इसलिए यह व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, साहस, ऋण और मुकदमों से मुक्ति, तथा शनि या राहु के कष्ट में राहत के लिए रखा जाता है। शैव परंपरा में वे क्षेत्रपाल भी हैं — पवित्र भूमि के रक्षक — इसीलिए अनेक मंदिरों की सीमा पर भैरव का स्थान होता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं, किसी परिणाम का दावा नहीं।
कथा — भैरव का प्रकट होना
शिव पुराण में कहा गया है कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव में श्रेष्ठता का विवाद हुआ और ब्रह्मा ने अपने पाँच सिरों के बल पर अहंकारपूर्वक अपना दावा रखा। शिव के क्रोध से एक उग्र रूप प्रकट हुआ — काल भैरव — जिसने अपने नखाग्र से वह पाँचवाँ सिर काट दिया। तब ब्रह्महत्या का दोष भैरव के पीछे लगा और ब्रह्मा का कपाल उनके हाथ से चिपक गया, जिसे लेकर वे भिक्षु रूप में भटकते रहे। विष्णु की सलाह पर वे काशी आए, जहाँ मत्स्योदरी तीर्थ के तट पर वह कपाल गिर गया और दोष दूर हुआ। तब शिव ने उन्हें वहीं काशी के कोतवाल के रूप में रहने का आदेश दिया, और कहा जाता है कि उनकी अनुमति के बिना काशी में कोई निवास नहीं कर सकता। मार्गशीर्ष की कालाष्टमी कालभैरव जयंती के रूप में मनाई जाती है।
कालाष्टमी पूजा सामग्री
संध्या पूजा से पूर्व ये सामग्री एकत्र करें:
- काल भैरव की मूर्ति या चित्र
- सरसों तेल का दीपक
- काले तिल
- उड़द दाल
- लाल या काले पुष्प
- सिंदूर और चंदन
- धूप
- नारियल और मौसमी फल
- कुत्तों को खिलाने का भोजन
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अप्रैल 2027 में कालाष्टमी कब है?+
अप्रैल 2027 में कालाष्टमी है: कालाष्टमी — बुधवार, 28 अप्रैल 2027। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।
अप्रैल 2027 में कालाष्टमी तिथि कब से कब तक है?+
28 अप्रैल: तिथि 28 अप्रैल दोपहर 12:31 से 29 अप्रैल दोपहर 3:02। (नई दिल्ली, IST)
2027 में कितनी कालाष्टमी हैं?+
2027 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 12 कालाष्टमी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण अष्टमी को एक, जिनमें मार्गशीर्ष की कालभैरव जयंती है।
काल भैरव कौन हैं?+
काल भैरव शिव का उग्र स्वरूप हैं — काल के स्वामी और तीर्थों के क्षेत्रपाल — विशेषतः काशी के, जहाँ वे नगर के कोतवाल माने जाते हैं।
कालभैरव जयंती कब है?+
मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) की कालाष्टमी कालभैरव जयंती — भैरव के प्राकट्य का दिन — मानी जाती है।
व्रत कैसे रखा जाता है?+
भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि में सरसों-तेल के दीप से भैरव पूजा करते हैं, कालभैरवाष्टकम् का पाठ करते हैं और उनके वाहन श्वान को भोजन कराते हैं।
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