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पंचांग व्रत कैलेंडर

दिसंबर 2027 में कालाष्टमी

दिसंबर 2027 में कालाष्टमी कब है? सोमवार, 20 दिसंबर — तिथि 20 दिसंबर रात 3:34 से 21 दिसंबर रात 1:53 (नई दिल्ली)।

कालाष्टमी की अगली तिथि
कालाष्टमी
410 दिन में · सोमवार, 20 दिसंबर 2027 →
तिथितिथि आरंभतिथि समाप्तनामदिनपक्ष / मास (पूर्णिमांत)
20 दिस॰ 2027अगली20 दिसंबर, रात 3:3421 दिसंबर, रात 1:53कालाष्टमीसोमकृष्ण · पौष

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।

कालाष्टमी कब है — आगामी तिथियाँकालाष्टमी जनवरी 2028 →पूरे 2027 की कालाष्टमी देखें

दिसंबर 2027 में कालाष्टमी का पूरा समय

हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।

तिथिआरंभसमाप्तअवधिवारपक्षचंद्र मास (पूर्णिमांत)
20 दिस॰20 दिसंबर, रात 3:3421 दिसंबर, रात 1:5322 घंटे 19 मिनटसोमवारकृष्णपौष

इस महीने की हर कालाष्टमी

कालाष्टमी — 20 दिस॰, सोमवार को, कृष्ण पक्ष, पौष मास। तिथि 22 घंटे 19 मिनट चलती है (20 दिसंबर रात 3:34 से)।

दिसंबर की तुलना बाकी साल से

2027 में कालाष्टमी की तिथि औसतन 24 घंटे 10 मिनट चलती है। दिसंबर में यह औसतन 22 घंटे 19 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ छोटी।

साल भर में यह अवधि 22 घंटे 2 मिनट (नवंबर) से 26 घंटे 31 मिनट (अप्रैल) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।

2027 में कुल 12 कालाष्टमी हैं, जिनमें से 1 इस महीने पड़ती है।

दिसंबर 2027 के अन्य व्रत

एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।

व्रततिथियाँकैलेंडर
विनायक चतुर्थी2 दिस॰ — विनायक चतुर्थी · 31 दिस॰ — विनायक चतुर्थीदेखें
स्कन्द षष्ठी3 दिस॰ — स्कन्द षष्ठीदेखें
भानु सप्तमी5 दिस॰ — भानु सप्तमी · 19 दिस॰ — भानु सप्तमीदेखें
मासिक दुर्गाष्टमी6 दिस॰ — मासिक दुर्गाष्टमीदेखें
एकादशी9 दिस॰ — मोक्षदा एकादशी · 23 दिस॰ — सफला एकादशीदेखें
प्रदोष व्रत11 दिस॰ — शनि प्रदोष · 25 दिस॰ — शनि प्रदोषदेखें
मासिक कार्तिगाई12 दिस॰ — मासिक कार्तिगाईदेखें
पूर्णिमा13 दिस॰ — मार्गशीर्ष पूर्णिमादेखें
संकष्टी चतुर्थी16 दिस॰ — आखुरथ संकष्टी चतुर्थीदेखें
मासिक शिवरात्रि25 दिस॰ — मासिक शिवरात्रिदेखें
अमावस्या27 दिस॰ — सोमवती अमावस्यादेखें

कालाष्टमी क्या है?

कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की मासिक रात्रि है। भैरव भय-निवारक, अन्याय के दंडक और काल के स्वामी रूप में पूजित हैं; उनका व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, अनुशासन और राहु-शनि जनित कष्टों से राहत हेतु रखा जाता है।

भैरव पूजा

पूजा संध्या या रात्रि में होती है — सरसों-तेल का दीपक, काले तिल और आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् इसका हृदय हैं। इस दिन भैरव के सहचर श्वानों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

कालाष्टमी व्रत विधि

व्रत सूर्योदय से रखा जाता है और मुख्य पूजा अंधेरे के बाद होती है, क्योंकि भैरव रात्रि के देवता हैं। भक्त स्नान कर संकल्प लेते हैं और संध्या या मध्यरात्रि में सरसों-तेल का दीपक, काले तिल, उड़द और पुष्प अर्पित कर पूजा करते हैं। आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् सामान्य पाठ है। कुत्तों को भोजन कराना अनुष्ठान का अंग माना जाता है, क्योंकि श्वान भैरव का वाहन है। अगली सुबह व्रत खोला जाता है। परंपरा घर और क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती है।

व्रत क्यों रखा जाता है

भैरव को भय-निवारक और व्यवस्था के रक्षक के रूप में देखा जाता है, इसलिए यह व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, साहस, ऋण और मुकदमों से मुक्ति, तथा शनि या राहु के कष्ट में राहत के लिए रखा जाता है। शैव परंपरा में वे क्षेत्रपाल भी हैं — पवित्र भूमि के रक्षक — इसीलिए अनेक मंदिरों की सीमा पर भैरव का स्थान होता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं, किसी परिणाम का दावा नहीं।

कथा — भैरव का प्रकट होना

शिव पुराण में कहा गया है कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव में श्रेष्ठता का विवाद हुआ और ब्रह्मा ने अपने पाँच सिरों के बल पर अहंकारपूर्वक अपना दावा रखा। शिव के क्रोध से एक उग्र रूप प्रकट हुआ — काल भैरव — जिसने अपने नखाग्र से वह पाँचवाँ सिर काट दिया। तब ब्रह्महत्या का दोष भैरव के पीछे लगा और ब्रह्मा का कपाल उनके हाथ से चिपक गया, जिसे लेकर वे भिक्षु रूप में भटकते रहे। विष्णु की सलाह पर वे काशी आए, जहाँ मत्स्योदरी तीर्थ के तट पर वह कपाल गिर गया और दोष दूर हुआ। तब शिव ने उन्हें वहीं काशी के कोतवाल के रूप में रहने का आदेश दिया, और कहा जाता है कि उनकी अनुमति के बिना काशी में कोई निवास नहीं कर सकता। मार्गशीर्ष की कालाष्टमी कालभैरव जयंती के रूप में मनाई जाती है।

कालाष्टमी पूजा सामग्री

संध्या पूजा से पूर्व ये सामग्री एकत्र करें:

  • काल भैरव की मूर्ति या चित्र
  • सरसों तेल का दीपक
  • काले तिल
  • उड़द दाल
  • लाल या काले पुष्प
  • सिंदूर और चंदन
  • धूप
  • नारियल और मौसमी फल
  • कुत्तों को खिलाने का भोजन
अन्य व्रत कैलेंडर
एकादशी 2027प्रदोष व्रत 2027अमावस्या 2027पूर्णिमा 2027संकष्टी चतुर्थी 2027मासिक शिवरात्रि 2027विनायक चतुर्थी 2027स्कन्द षष्ठी 2027मासिक दुर्गाष्टमी 2027मासिक कार्तिगाई 2027भानु सप्तमी 2027

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिसंबर 2027 में कालाष्टमी कब है?+

दिसंबर 2027 में कालाष्टमी है: कालाष्टमी — सोमवार, 20 दिसंबर 2027। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

दिसंबर 2027 में कालाष्टमी तिथि कब से कब तक है?+

20 दिसंबर: तिथि 20 दिसंबर रात 3:34 से 21 दिसंबर रात 1:53। (नई दिल्ली, IST)

2027 में कितनी कालाष्टमी हैं?+

2027 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 12 कालाष्टमी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण अष्टमी को एक, जिनमें मार्गशीर्ष की कालभैरव जयंती है।

काल भैरव कौन हैं?+

काल भैरव शिव का उग्र स्वरूप हैं — काल के स्वामी और तीर्थों के क्षेत्रपाल — विशेषतः काशी के, जहाँ वे नगर के कोतवाल माने जाते हैं।

कालभैरव जयंती कब है?+

मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) की कालाष्टमी कालभैरव जयंती — भैरव के प्राकट्य का दिन — मानी जाती है।

व्रत कैसे रखा जाता है?+

भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि में सरसों-तेल के दीप से भैरव पूजा करते हैं, कालभैरवाष्टकम् का पाठ करते हैं और उनके वाहन श्वान को भोजन कराते हैं।

कालाष्टमी आपकी कुंडली के लिए क्या कहती है?

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