नवंबर 2026 में भानु सप्तमी
नवंबर 2026 में भानु सप्तमी कब है? रविवार, 1 नवंबर — तिथि 31 अक्टूबर दोपहर 4:58 से 1 नवंबर दोपहर 2:52 (नई दिल्ली)।
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 नव॰ 2026 | 31 अक्टूबर, दोपहर 4:58 | 1 नवंबर, दोपहर 2:52 | भानु सप्तमी | रवि | कृष्ण · कार्तिक |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
नवंबर 2026 में भानु सप्तमी का पूरा समय
हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।
| तिथि | आरंभ | समाप्त | अवधि | वार | पक्ष | चंद्र मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 नव॰ | 31 अक्टूबर, दोपहर 4:58 | 1 नवंबर, दोपहर 2:52 | 21 घंटे 54 मिनट | रविवार | कृष्ण | कार्तिक |
इस महीने की हर भानु सप्तमी
भानु सप्तमी — 1 नव॰, रविवार को, कृष्ण पक्ष, कार्तिक मास। तिथि 21 घंटे 54 मिनट चलती है (31 अक्टूबर दोपहर 4:58 से)।
नवंबर की तुलना बाकी साल से
2026 में भानु सप्तमी की तिथि औसतन 24 घंटे 14 मिनट चलती है। नवंबर में यह औसतन 21 घंटे 54 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ छोटी।
साल भर में यह अवधि 21 घंटे 54 मिनट (नवंबर) से 26 घंटे 33 मिनट (अक्टूबर) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।
2026 में कुल 6 भानु सप्तमी हैं, जिनमें से 1 इस महीने पड़ती है।
नवंबर 2026 के अन्य व्रत
एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।
| व्रत | तिथियाँ | कैलेंडर |
|---|---|---|
| कालाष्टमी | 1 नव॰ — कालाष्टमी | देखें |
| एकादशी | 5 नव॰ — रमा एकादशी · 20 नव॰ — प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी | देखें |
| प्रदोष व्रत | 6 नव॰ — शुक्र प्रदोष · 22 नव॰ — रवि प्रदोष | देखें |
| मासिक शिवरात्रि | 7 नव॰ — मासिक शिवरात्रि | देखें |
| अमावस्या | 9 नव॰ — सोमवती अमावस्या | देखें |
| विनायक चतुर्थी | 13 नव॰ — विनायक चतुर्थी | देखें |
| स्कन्द षष्ठी | 15 नव॰ — स्कन्द षष्ठी | देखें |
| मासिक दुर्गाष्टमी | 17 नव॰ — मासिक दुर्गाष्टमी | देखें |
| पूर्णिमा | 24 नव॰ — कार्तिक पूर्णिमा | देखें |
| मासिक कार्तिगाई | 24 नव॰ — मासिक कार्तिगाई | देखें |
| संकष्टी चतुर्थी | 27 नव॰ — गणाधिप संकष्टी चतुर्थी | देखें |
भानु सप्तमी क्या है?
भानु सप्तमी सूर्य की तिथि और सूर्य के वार का दुर्लभ संयोग है। इसे सूर्योदय अर्घ्य, आदित्य हृदयम् और प्रायः एक-दिवसीय व्रत से रखा जाता है। तिथि-वार संयोग पर निर्भर होने से वर्ष में गिनती की ही आती हैं — इस पृष्ठ की तिथियाँ दिल्ली के लिए सटीक गणना की गई हैं।
सूर्य पूजा
सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं और उनकी सप्तमी-विधियाँ परंपरा की प्राचीनतम परतों तक जाती हैं। माघ शुक्ल सप्तमी की रथ सप्तमी वर्ष की सबसे बड़ी सप्तमी है; भानु सप्तमी वही पूजा हर रविवार-सप्तमी संयोग तक विस्तारित करती है।
सूर्योदय का अर्घ्य
मुख्य विधि सरल है और सूर्योदय के समय, सप्तमी तिथि रहते हुए की जाती है। स्नान के बाद भक्त पूर्व की ओर मुख कर अर्घ्य देता है — ताँबे के पात्र से जल, जिसमें प्रायः थोड़ा रोली, लाल पुष्प और अक्षत डाले जाते हैं — और उसे उगते सूर्य के प्रकाश में गिरने दिया जाता है। आदित्य हृदयम् या गायत्री का पाठ किया जाता है, और बहुत से लोग मध्याह्न तक उपवास रखते हैं या एक बार भोजन करते हैं। जहाँ नदी-स्नान की प्रथा है, वह सूर्योदय से पूर्व किया जाता है।
भानु सप्तमी और रथ सप्तमी
भानु सप्तमी सूर्य की तिथि और सूर्य के वार का मिलन है — कोई भी सप्तमी जो रविवार को पड़े। इसलिए यह किसी निश्चित तिथि पर नहीं, वर्ष में कुछ ही बार आती है, और दोनों पक्षों में पड़ सकती है। रथ सप्तमी इससे भिन्न है — वह माघ शुक्ल की एकमात्र वार्षिक सप्तमी है, जो सूर्य के रथ के उत्तरायण की ओर मुड़ने का प्रतीक है। जब भानु सप्तमी उसी माघ सप्तमी पर पड़ती है, तो दोनों साथ मनाई जाती हैं, और उस संयोग को वर्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
महत्त्व
सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं — जिन्हें वास्तव में देखा जा सकता है — और उनकी उपासना परंपरा की प्राचीनतम अविच्छिन्न परतों में है। सप्तमी की विधियाँ स्वास्थ्य और ओज के लिए, संकल्प की स्पष्टता और स्थिरता के लिए, तथा ज्योतिष में निर्बल या पीड़ित सूर्य के बल हेतु रखी जाती हैं, जिन्हें जीवनी-शक्ति, पिता और आत्म-अधिकार का कारक माना जाता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं।
भानु सप्तमी सामग्री
सूर्योदय अर्घ्य से पूर्व ये एकत्र करें:
- अर्घ्य हेतु ताँबे का लोटा
- स्वच्छ जल, उपलब्ध हो तो गंगाजल
- रोली या कुमकुम
- लाल पुष्प
- अक्षत
- घी का दीपक
- धूप
- अर्पण हेतु गुड़ और गेहूँ
- मौसमी फल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवंबर 2026 में भानु सप्तमी कब है?+
नवंबर 2026 में भानु सप्तमी है: भानु सप्तमी — रविवार, 1 नवंबर 2026। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।
नवंबर 2026 में भानु सप्तमी तिथि कब से कब तक है?+
1 नवंबर: तिथि 31 अक्टूबर दोपहर 4:58 से 1 नवंबर दोपहर 2:52। (नई दिल्ली, IST)
2026 में कितनी भानु सप्तमी हैं?+
2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 6 भानु सप्तमी हैं — जब-जब सप्तमी तिथि रविवार से मिलती है।
यह विशेष क्यों है?+
सप्तमी तिथि सूर्य की है और रविवार उनका वार; दोनों के संयोग पर सूर्य-पूजा को परंपरा में सूर्यग्रहण-स्नान तुल्य पुण्य माना जाता है।
कैसे मनाई जाती है?+
भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान कर उदित सूर्य को अर्घ्य देते हैं, आदित्य हृदयम् या सूर्य मंत्रों का पाठ करते हैं और नमक-रहित व्रत रखते हैं।
किसलिए रखा जाता है?+
परंपरागत रूप से स्वास्थ्य, तेज और कुंडली में सूर्य-बल हेतु — आस्था के विषय, परंपरा के रूप में प्रस्तुत।
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