Astrologger
ENहिंदी
AI से पूछें
पंचांग व्रत कैलेंडर

नवंबर 2026 में कालाष्टमी

नवंबर 2026 में कालाष्टमी कब है? रविवार, 1 नवंबर — तिथि 1 नवंबर दोपहर 2:52 से 2 नवंबर दोपहर 1:11 (नई दिल्ली)।

कालाष्टमी की अगली तिथि
कालभैरव जयंती
25 दिन में · मंगलवार, 1 दिसंबर 2026 →
तिथितिथि आरंभतिथि समाप्तनामदिनपक्ष / मास (पूर्णिमांत)
1 नव॰ 20261 नवंबर, दोपहर 2:522 नवंबर, दोपहर 1:11कालाष्टमीरविकृष्ण · कार्तिक

सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।

कालाष्टमी कब है — आगामी तिथियाँकालाष्टमी दिसंबर 2026 →पूरे 2026 की कालाष्टमी देखें

नवंबर 2026 में कालाष्टमी का पूरा समय

हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।

तिथिआरंभसमाप्तअवधिवारपक्षचंद्र मास (पूर्णिमांत)
1 नव॰1 नवंबर, दोपहर 2:522 नवंबर, दोपहर 1:1122 घंटे 19 मिनटरविवारकृष्णकार्तिक

इस महीने की हर कालाष्टमी

कालाष्टमी — 1 नव॰, रविवार को, कृष्ण पक्ष, कार्तिक मास। तिथि 22 घंटे 19 मिनट चलती है (1 नवंबर दोपहर 2:52 से)।

नवंबर की तुलना बाकी साल से

2026 में कालाष्टमी की तिथि औसतन 24 घंटे 2 मिनट चलती है। नवंबर में यह औसतन 22 घंटे 19 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ छोटी।

साल भर में यह अवधि 21 घंटे 48 मिनट (सितंबर) से 26 घंटे 27 मिनट (फ़रवरी) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।

2026 में कुल 13 कालाष्टमी हैं, जिनमें से 1 इस महीने पड़ती है।

नवंबर 2026 के अन्य व्रत

एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।

व्रततिथियाँकैलेंडर
भानु सप्तमी1 नव॰ — भानु सप्तमीदेखें
एकादशी5 नव॰ — रमा एकादशी · 20 नव॰ — प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीदेखें
प्रदोष व्रत6 नव॰ — शुक्र प्रदोष · 22 नव॰ — रवि प्रदोषदेखें
मासिक शिवरात्रि7 नव॰ — मासिक शिवरात्रिदेखें
अमावस्या9 नव॰ — सोमवती अमावस्यादेखें
विनायक चतुर्थी13 नव॰ — विनायक चतुर्थीदेखें
स्कन्द षष्ठी15 नव॰ — स्कन्द षष्ठीदेखें
मासिक दुर्गाष्टमी17 नव॰ — मासिक दुर्गाष्टमीदेखें
पूर्णिमा24 नव॰ — कार्तिक पूर्णिमादेखें
मासिक कार्तिगाई24 नव॰ — मासिक कार्तिगाईदेखें
संकष्टी चतुर्थी27 नव॰ — गणाधिप संकष्टी चतुर्थीदेखें

कालाष्टमी क्या है?

कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की मासिक रात्रि है। भैरव भय-निवारक, अन्याय के दंडक और काल के स्वामी रूप में पूजित हैं; उनका व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, अनुशासन और राहु-शनि जनित कष्टों से राहत हेतु रखा जाता है।

भैरव पूजा

पूजा संध्या या रात्रि में होती है — सरसों-तेल का दीपक, काले तिल और आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् इसका हृदय हैं। इस दिन भैरव के सहचर श्वानों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

कालाष्टमी व्रत विधि

व्रत सूर्योदय से रखा जाता है और मुख्य पूजा अंधेरे के बाद होती है, क्योंकि भैरव रात्रि के देवता हैं। भक्त स्नान कर संकल्प लेते हैं और संध्या या मध्यरात्रि में सरसों-तेल का दीपक, काले तिल, उड़द और पुष्प अर्पित कर पूजा करते हैं। आदि शंकराचार्य का कालभैरवाष्टकम् सामान्य पाठ है। कुत्तों को भोजन कराना अनुष्ठान का अंग माना जाता है, क्योंकि श्वान भैरव का वाहन है। अगली सुबह व्रत खोला जाता है। परंपरा घर और क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती है।

व्रत क्यों रखा जाता है

भैरव को भय-निवारक और व्यवस्था के रक्षक के रूप में देखा जाता है, इसलिए यह व्रत परंपरागत रूप से रक्षा, साहस, ऋण और मुकदमों से मुक्ति, तथा शनि या राहु के कष्ट में राहत के लिए रखा जाता है। शैव परंपरा में वे क्षेत्रपाल भी हैं — पवित्र भूमि के रक्षक — इसीलिए अनेक मंदिरों की सीमा पर भैरव का स्थान होता है। ये परंपरा द्वारा बताए गए कारण हैं, किसी परिणाम का दावा नहीं।

कथा — भैरव का प्रकट होना

शिव पुराण में कहा गया है कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव में श्रेष्ठता का विवाद हुआ और ब्रह्मा ने अपने पाँच सिरों के बल पर अहंकारपूर्वक अपना दावा रखा। शिव के क्रोध से एक उग्र रूप प्रकट हुआ — काल भैरव — जिसने अपने नखाग्र से वह पाँचवाँ सिर काट दिया। तब ब्रह्महत्या का दोष भैरव के पीछे लगा और ब्रह्मा का कपाल उनके हाथ से चिपक गया, जिसे लेकर वे भिक्षु रूप में भटकते रहे। विष्णु की सलाह पर वे काशी आए, जहाँ मत्स्योदरी तीर्थ के तट पर वह कपाल गिर गया और दोष दूर हुआ। तब शिव ने उन्हें वहीं काशी के कोतवाल के रूप में रहने का आदेश दिया, और कहा जाता है कि उनकी अनुमति के बिना काशी में कोई निवास नहीं कर सकता। मार्गशीर्ष की कालाष्टमी कालभैरव जयंती के रूप में मनाई जाती है।

कालाष्टमी पूजा सामग्री

संध्या पूजा से पूर्व ये सामग्री एकत्र करें:

  • काल भैरव की मूर्ति या चित्र
  • सरसों तेल का दीपक
  • काले तिल
  • उड़द दाल
  • लाल या काले पुष्प
  • सिंदूर और चंदन
  • धूप
  • नारियल और मौसमी फल
  • कुत्तों को खिलाने का भोजन
अन्य व्रत कैलेंडर
एकादशी 2026प्रदोष व्रत 2026अमावस्या 2026पूर्णिमा 2026संकष्टी चतुर्थी 2026मासिक शिवरात्रि 2026विनायक चतुर्थी 2026स्कन्द षष्ठी 2026मासिक दुर्गाष्टमी 2026मासिक कार्तिगाई 2026भानु सप्तमी 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवंबर 2026 में कालाष्टमी कब है?+

नवंबर 2026 में कालाष्टमी है: कालाष्टमी — रविवार, 1 नवंबर 2026। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

नवंबर 2026 में कालाष्टमी तिथि कब से कब तक है?+

1 नवंबर: तिथि 1 नवंबर दोपहर 2:52 से 2 नवंबर दोपहर 1:11। (नई दिल्ली, IST)

2026 में कितनी कालाष्टमी हैं?+

2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 13 कालाष्टमी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण अष्टमी को एक, जिनमें मार्गशीर्ष की कालभैरव जयंती है।

काल भैरव कौन हैं?+

काल भैरव शिव का उग्र स्वरूप हैं — काल के स्वामी और तीर्थों के क्षेत्रपाल — विशेषतः काशी के, जहाँ वे नगर के कोतवाल माने जाते हैं।

कालभैरव जयंती कब है?+

मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) की कालाष्टमी कालभैरव जयंती — भैरव के प्राकट्य का दिन — मानी जाती है।

व्रत कैसे रखा जाता है?+

भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि में सरसों-तेल के दीप से भैरव पूजा करते हैं, कालभैरवाष्टकम् का पाठ करते हैं और उनके वाहन श्वान को भोजन कराते हैं।

कालाष्टमी आपकी कुंडली के लिए क्या कहती है?

अपनी जन्म कुंडली के आधार पर व्रत, शुभ काल और उपाय पर एआई ज्योतिषी से नि:शुल्क पूछें।

एआई ज्योतिषी से पूछें