नवंबर 2026 में स्कन्द षष्ठी
नवंबर 2026 में स्कन्द षष्ठी कब है? रविवार, 15 नवंबर — तिथि 14 नवंबर रात 11:24 से 16 नवंबर रात 2:01 (नई दिल्ली)।
इस दिन: 15 नवंबर — स्कन्द षष्ठी, छठ पूजा
| तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | नाम | दिन | पक्ष / मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|
| 15 नव॰ 2026अगली | 14 नवंबर, रात 11:24 | 16 नवंबर, रात 2:01 | स्कन्द षष्ठी | रवि | शुक्ल · कार्तिक |
सभी तिथियाँ व समय नई दिल्ली (IST) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस + लाहिरी अयनांश से गणना किए गए — नकल नहीं।
नवंबर 2026 में स्कन्द षष्ठी का पूरा समय
हर तिथि कब आरंभ होती है, कब समाप्त होती है और कितनी देर चलती है — सब दिल्ली (IST) के लिए गणना किया गया।
| तिथि | आरंभ | समाप्त | अवधि | वार | पक्ष | चंद्र मास (पूर्णिमांत) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 15 नव॰ | 14 नवंबर, रात 11:24 | 16 नवंबर, रात 2:01 | 26 घंटे 37 मिनट | रविवार | शुक्ल | कार्तिक |
इस महीने की हर स्कन्द षष्ठी
स्कन्द षष्ठी — 15 नव॰, रविवार को, शुक्ल पक्ष, कार्तिक मास। तिथि 26 घंटे 37 मिनट चलती है (14 नवंबर रात 11:24 से)।
नवंबर की तुलना बाकी साल से
2026 में स्कन्द षष्ठी की तिथि औसतन 23 घंटे 51 मिनट चलती है। नवंबर में यह औसतन 26 घंटे 37 मिनट है — यानी इस साल के हिसाब से कुछ लंबी।
साल भर में यह अवधि 21 घंटे 29 मिनट (मार्च) से 26 घंटे 37 मिनट (नवंबर) के बीच रहती है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती — तिथि की लंबाई हर बार बदलती है, इसीलिए व्रत की तारीख़ हर महीने आगे-पीछे खिसकती है।
2026 में कुल 12 स्कन्द षष्ठी हैं, जिनमें से 1 इस महीने पड़ती है।
नवंबर 2026 के अन्य व्रत
एक ही महीने में पड़ने वाले बाकी व्रत — तारीख़ के क्रम में।
| व्रत | तिथियाँ | कैलेंडर |
|---|---|---|
| कालाष्टमी | 1 नव॰ — कालाष्टमी | देखें |
| भानु सप्तमी | 1 नव॰ — भानु सप्तमी | देखें |
| एकादशी | 5 नव॰ — रमा एकादशी · 20 नव॰ — प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी | देखें |
| प्रदोष व्रत | 6 नव॰ — शुक्र प्रदोष · 22 नव॰ — रवि प्रदोष | देखें |
| मासिक शिवरात्रि | 7 नव॰ — मासिक शिवरात्रि | देखें |
| अमावस्या | 9 नव॰ — सोमवती अमावस्या | देखें |
| विनायक चतुर्थी | 13 नव॰ — विनायक चतुर्थी | देखें |
| मासिक दुर्गाष्टमी | 17 नव॰ — मासिक दुर्गाष्टमी | देखें |
| पूर्णिमा | 24 नव॰ — कार्तिक पूर्णिमा | देखें |
| मासिक कार्तिगाई | 24 नव॰ — मासिक कार्तिगाई | देखें |
| संकष्टी चतुर्थी | 27 नव॰ — गणाधिप संकष्टी चतुर्थी | देखें |
स्कन्द षष्ठी क्या है?
स्कन्द षष्ठी प्रत्येक मास शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को कार्तिकेय (मुरुगन) की पूजा है। यह तिथि उन्हीं की है — षष्ठी देवी उनके पालन से जुड़ी हैं — और भक्त साहस, आंतरिक शत्रुओं पर विजय और संतान के कल्याण हेतु इसे रखते हैं।
सूरसंहारम्
कार्तिक की वार्षिक स्कन्द षष्ठी उस छह-दिवसीय युद्ध की स्मृति है जिसमें मुरुगन ने सुरपद्मन का वध किया — तिरुचेन्दूर और विश्वभर के मुरुगन मंदिरों में नाट्य-रूप में मनाई जाती है। मासिक षष्ठियाँ वही भक्ति वर्षभर आगे बढ़ाती हैं।
व्रत कैसे रखा जाता है
स्कन्द षष्ठी शुक्ल षष्ठी को उपवास के रूप में रखी जाती है, और ऐप्पसि मास की वार्षिक षष्ठी प्रतिपदा से षष्ठी तक छह दिन चलती है। परंपरा में विविधता है: कुछ पूर्ण उपवास रखते हैं, कुछ केवल तरल लेते हैं, और बहुत से लोग रात्रि में पूजा के बाद एक सात्त्विक भोजन करते हैं, जिसमें प्याज़-लहसुन नहीं होता। इस अवधि में मांसाहार त्याग दिया जाता है। दिन की शुरुआत प्रातः स्नान और संकल्प से होती है, और मुरुगन को घी का दीपक, पुष्प तथा फल अर्पित किए जाते हैं।
कन्द षष्ठी कवचम्
इस व्रत से सर्वाधिक जुड़ा पाठ कन्द षष्ठी कवचम् है — कार्तिकेय को समर्पित रक्षा का तमिल स्तोत्र, जिसकी रचना उन्नीसवीं शताब्दी में चेन्निमलै में देवराय स्वामिगल ने की थी। भक्त इसे दिनभर पढ़ते हैं, और मुरुगन मंदिरों में छह दिनों तक इसका बार-बार गायन होता है। कवच का अर्थ है रक्षा-स्तोत्र, और इसे उसी भाव में रखा जाता है — रक्षा की प्रार्थना, कोई मंत्र-प्रयोग नहीं।
महत्त्व
षष्ठी मुरुगन की तिथि है, और यह मासिक व्रत स्वास्थ्य, साहस और रक्षा के लिए रखा जाता है, विशेषकर संतान के कल्याण हेतु। वार्षिक व्रत के छह दिन उनके छह मुखों और शिव के तृतीय नेत्र से निकली उन छह चिंगारियों के प्रतीक हैं जिनसे परंपरा के अनुसार उनका प्राकट्य हुआ। तमिल परंपरा में उनके छह प्रमुख धाम — अरुपडै वीडु — इस काल में तीर्थयात्रा के केंद्र होते हैं।
स्कन्द षष्ठी पूजा सामग्री
पूजा से पूर्व ये सामग्री एकत्र करें:
- मुरुगन (कार्तिकेय) की मूर्ति या चित्र
- घी का दीपक
- ताज़े पुष्प, विशेषकर लाल
- वेल (भाला), यदि घर के मंदिर में हो
- मौसमी फल और नारियल
- चंदन और विभूति
- धूप
- पंचामृत
- पान के पत्ते और सुपारी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवंबर 2026 में स्कन्द षष्ठी कब है?+
नवंबर 2026 में स्कन्द षष्ठी है: स्कन्द षष्ठी — रविवार, 15 नवंबर 2026। समय नई दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।
नवंबर 2026 में स्कन्द षष्ठी तिथि कब से कब तक है?+
15 नवंबर: तिथि 14 नवंबर रात 11:24 से 16 नवंबर रात 2:01। (नई दिल्ली, IST)
नवंबर 2026 की स्कन्द षष्ठी पर कौन-सा पर्व है?+
15 नवंबर: स्कन्द षष्ठी, छठ पूजा।
2026 में कितनी स्कन्द षष्ठी हैं?+
2026 में दिल्ली क्षेत्र के लिए 12 स्कन्द षष्ठी हैं — प्रत्येक चंद्र मास की शुक्ल षष्ठी को एक।
स्कन्द कौन हैं?+
स्कन्द — कार्तिकेय, मुरुगन या सुब्रह्मण्य — शिव-पार्वती के पुत्र और देव-सेनापति हैं, तमिल परंपरा में विशेष पूजित।
मुख्य स्कन्द षष्ठी कौन-सी है?+
कार्तिक मास (तमिल ऐप्पसि) की दीपावली के बाद की षष्ठी महान स्कन्द षष्ठी है, जो सूरसंहारम् — सुरपद्मन पर विजय — से पूर्ण होती है।
व्रत कैसे रखा जाता है?+
भक्त दिनभर उपवास रखते हैं, मुरुगन मंदिर जाते हैं और स्कन्द षष्ठी कवचम् का पाठ करते हैं। विधि क्षेत्र व भक्ति अनुसार भिन्न होती है।
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